डिस्क्लेमर- मैं एक म्यूजिक लवर हूं, और मुझे लगभग हर जॉनर के गाने पसंद है. यही वजह है, सोशल मीडिया पर जितने म्यूजिक से रिलेटेड वीडियोज होते हैं, मैं बड़े ही ध्यान से सुनती हूं. इसी बीच सरफेस पर एक इवेंट का वीडियो वायरल होता है और वो रील मेरे फीड तक पहुंचती थी. मुझे हैरानी हुई कि अमृता फडणवीस गाने की शौकीन हैं. खैर, जब गाना सुना.. पहला रिएक्शन जोरदार की हंसी और फिर मन में सवाल उठता है कि भाई इतना ओवर कॉन्फिडेंस कहां से आया है और अब मैं उनसे कुछ कहना चाहती हूं…
डियर अमृता जी, आप सिंगिंग का गला क्यों घोंट रही हैं?
आखिर आप गाना गा रही हैं या लोगों के कानों का टेस्ट ले रही हैं? माफ कीजिएगा, लेकिन हर चीज को टैलेंट नहीं कहा जा सकता. गाना गाने के लिए सिर्फ माइक पकड़ना काफी नहीं होता. सुर भी लगने चाहिए, आवाज भी अच्छी लगनी चाहिए और सुनने वाले को कम से कम ऐसा तो लगे कि हां, कुछ अच्छा सुना है.
लेकिन यहां तो मामला ही उल्टा लग रहा है. गाना सुनकर सुकून मिलने के बजाय लोग सोच में पड़ जाएं कि आखिर उन्होंने सुना क्या है, तो सवाल उठेंगे ही. और सवाल उठ रहे हैं, तो उन्हें सिर्फ ट्रोलिंग कहकर खारिज भी नहीं किया जा सकता.
अमृता जी,एक बात बताइए. क्या आजकल सिंगर बनने के लिए सुर में गाना जरूरी नहीं रह गया है? क्या बस कुछ अलग कर देना ही काफी है? अगर ऐसा है, तो फिर सालों तक रियाज करने वाले गायकों की मेहनत का क्या मतलब रह गया?
संगीत कोई ऐसी चीज नहीं है कि मन किया और कुछ भी गाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया. गाने में आवाज के साथ सुर और समझ भी चाहिए. हर कोई गा सकता है, लेकिन हर कोई अच्छा गा सकता है, ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह बात समझने की जरूरत है.
आज सोशल मीडिया पर वायरल होना इतना बड़ा लक्ष्य बन गया है कि लोग शायद यह भूलने लगे हैं कि वायरल होने और अच्छा गाने में बहुत फर्क है. किसी वीडियो पर हजारों कमेंट आ जाएं, लोग उसे शेयर करने लगें, इसका मतलब यह नहीं कि गायकी भी शानदार है. कई बार लोग तारीफ करने के लिए नहीं, हैरानी जताने के लिए भी वीडियो देखते हैं.
और अमृता जी, हर प्रतिक्रिया को अपनी जीत समझ लेना भी ठीक नहीं. अगर लोग आपके गाने पर सवाल उठा रहे हैं, तो यह भी देखिए कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. हर आलोचना दुश्मनी नहीं होती. कभी-कभी सामने वाला वही कह रहा होता है, जिसे सुनना हमें पसंद नहीं.
बेशक, गायकी में एक्सपेरिमेंट करने से किसी को रोकना नहीं चाहिए. लेकिन एक्सपेरिमेंट के नाम पर कुछ भी कर देना भी सही नहीं है. आखिर संगीत सुनने वाले भी कोई वजह लेकर ही गाना सुनते हैं. उन्हें अच्छा लगे, दिल खुश हो, कुछ देर सुकून मिले. अगर गाना सुनकर यही सोचना पड़े कि इसे गाया क्यों गया, तो फिर दिक्कत कहां है, यह समझना मुश्किल नहीं.
अमृता जी, माइक पकड़ लेना आसान है, लेकिन लोगों के दिलों तक पहुंचना आसान नहीं. उसके लिए आवाज के साथ हुनर भी चाहिए. और सिर्फ चर्चा में आ जाना किसी कलाकार की कामयाबी का पैमाना नहीं हो सकता.
इसलिए सवाल सीधा है. आप गाना गाकर लोगों को अपना फैन बनाना चाहती हैं या ऐसा कुछ करना चाहती हैं कि लोग आपको सुनकर हैरान रह जाएं?
क्योंकि संगीत के नाम पर कुछ भी परोस देना और उसे गायकी मान लेना, दोनों अलग बातें हैं. और सुनने वालों को यह फर्क समझाने की जरूरत नहीं है.
ये भी पढ़ें: Kader Khan Birthday: ‘अमित नहीं, ‘सर जी’ कहो!’ एक हिदायत ने तोड़ा कादर खान का ईगो, हाथ से निकलीं ‘खुदा गवाह’ समेत कई फिल्में!
The post Dear Amruta Ji, आप सिंगिंग का गला क्यों घोंट रही हैं? appeared first on Naya Vichar.

