कांग्रेस पार्टी को लगभग 22 साल तक नेतृत्व प्रदान करने वाली सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण (memoir) को किताब का रूप दिया है. सोनिया गांधी जब हिंदुस्तान आईं थीं तो वो एक प्रधानमंत्री की बहू थीं, उसके बाद वो एक प्रधानमंत्री की पत्नी बनीं और फिर उन्होंने 22 साल से अधिक समय तक कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली. इस लिहाज से उनके जीवन को देखें, तो उन्होंने 50 साल से अधिक का समय हिंदुस्तानीय नेतृत्व के केंद्र में रखकर बिताया है. विपक्ष में रहने के बाद भी उनकी भूमिका कम नहीं हुई है, यही वजह है कि उनके आलोचक और प्रशंसक दोनों को इस किताब का इंतजार है.
सोनिया गांधी के दृष्टिकोण से नजर आएगी हिंदुस्तानीय नेतृत्व की घटनाएं
सोनिया गांधी की किताब का नाम है-‘Belonging: A Journey of Love’. शीर्षक पर अगर बात करें, तो ऐसा भ्रम हो सकता है कि यह किताब सिर्फ उनके निजी रिश्तों पर टिकी होगी, लेकिन यह स्वाभाविक है कि उनके प्रेम का सफर हिंदुस्तान की प्रधानमंत्री के घर से शुरू हुआ है तो उसमें नेतृत्व की बातें तो होंगी ही. किताब को लेकर कई ऐसी चर्चाएं सामने आई हैं कि इसमें कई ऐसी बातें हो सकती हैं,जो विवादास्पद होंगी. इस संबंध में नया विचार के साथ बात करते हुए उनके जीवनी Sonia: A Biography लिखने वाले रशीद किदवई कहते हैं कि यह एक बेहतरीन किताब हो सकती है. यह एक ऐसी किताब होगी जिसमें हिंदुस्तानीय नेतृत्व और यहां के समाज को लेकर सोनिया गांधी का दृष्टिकोण सामने आएगा. कुछ ऐसी चर्चाएं हो रही हैं कि इसमें बीजेपी और आरएसएस को लेकर विवादित चीजें हो सकती हैं. मेरा यह मानना है कि दोनों एक दूसरे के कट्टर विरोधी सोच वाली पार्टियों से आते हैं, तो उनकी सोच वैसी ही होगी. ‘मौत का सौदागर’ और ‘जर्सी गाय’ जैसी टिप्पणियों से हम वाकिफ हैं. रशीद किदवई कहते हैं ‘मेरा यह मानना है कि किताब आने दीजिए,अगर उसमें कोई ऐसी बात होगी, जिससे किसी का मान हनन होता है, तो कोर्ट के दरवाजे खुले हैं.’ पेंगुइन इंडिया ने इसे छापने से मना क्यों किया यह बात मेरी समझ से परे है.
किताब का मुख्य आकर्षण क्या हो सकता है?
सोनिया गांधी ने अपनी किताब में किस संस्मरण को प्राथमिकता दी होगी उसे लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं. रशीद किदवई का कहना है कि मुझे यह उम्मीद है कि सोनिया गांधी जो बहुत ही सुलझी हुई स्त्री हैं, उन्होंने इस किताब में वैसी ही चीजों को शामिल किया होगा, जिसपर बातें बहुत कम ही लिखी गई हैं. 544 पेज की इस किताब की शुरुआत बेशक इटली से हुई होगी, लेकिन यह पूरी किताब हिंदुस्तान पर ही केंद्रित होगी. सोनिया गांधी 13 जनवरी 1968 को दिल्ली आई थीं और 25 फरवरी 1968 को राजीव गांधी से उनकी शादी हुई थी, तब से अबतक उनके जीवन में जो कुछ हुआ, वो सारी बातें इस किताब में सोनिया गांधी के दृष्टिकोण से लिखी गई होंगी. सेकेंड वर्ल्ड वार के बाद इटली में उनका बचपन, कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से उनकी मुलाकात से लेकर हिंदुस्तान के पहले पॉलिटिकल परिवार के अंदर की ज़िंदगी, इंदिरा और राजीव गांधी की हत्या, पॉलिटिक्स में उनके बिना मन के आने और कांग्रेस की कमान संभालने से लेकर प्रधानमंत्री का पद ठुकराने जैसी बातें भी इसमें शामिल होंगी. रशीद किदवई कहते हैं कि इस किताब के बारे में सोनिया गांधी खुद कहती हैं कि वह अपने परिवार के लोगों की सोच, उनके फैसलों और उनके कामों के पीछे की वजहों को समझना चाहती हैं. साथ ही, वह उनकी मानवीय कमजोरियों और गलतियों को भी सामने लाना चाहती हैं.
राजीव गांधी की नेतृत्व में एंट्री पर सोनिया का विरोध
रशीद किदवई बताते हैं कि सोनिया गांधी की किताब में संजय गांधी की मौत और उसके बाद राजीव गांधी की नेतृत्व में इंट्री पर खास फोकस हो सकता है. इसकी वजह यह है कि सोनिया अपनी निजी जिंदगी को ज्यादा महत्व देती थीं, लेकिन संजय की मौत के बाद उसपर खतरा मंडराया था. राजीव गांधी को नेतृत्व में एंट्री लेनी पड़ी थी और इसे उन्होंने अपनी ड्यूटी बताया था. उस वक्त क्या-क्या हुआ. संजय गांधी के साथ उनके रिश्ते कैसे थे? यह भी संभव है कि उन्होंने अपनी देवरानी मेनका गांधी और उसके बेटे की चर्चा भी इस किताब में की हो. मेनका गांधी ने जो आरोप सोनिया गांधी और गांधी परिवार पर लगाए, संभव है उनपर भी यह किताब बात करती हो.
हिंदुस्तान में HarperCollins India हैं किताब के प्रकाशक
जब किताब के प्रकाशन की बात हुई थी तो हिंदुस्तान में सोनिया गांधी की किताब को पेंगुइन इंडिया प्रकाशित कर रही थी,लेकिन बाद में पेंगुइन इंडिया ने प्रकाशन से मना कर दिया. उसके बाद HarperCollins India इस किताब को छाप रहा है.अमेरिका में इस किताब का प्रकाशन Alfred A Knopf, जो Penguin Random House का इम्प्रिंट (प्रकाशन समूह का हिस्सा) कर रहा है जबकि ब्रिटेन में William Collins, जो HarperCollins Publishers का इम्प्रिंट है, वो किताब को प्रकाशित कर रहा है.
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