Iran Abbas Araghchi Ali Khamenei Office: अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय पर हुए हमले को लेकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया कि हमले के समय वह उसी इमारत में मौजूद थे और विस्फोट के बाद मलबे के बीच से बाहर निकलने में सफल रहे. अराघची ने कहा कि उस समय उनकी सबसे बड़ी चिंता खुद की नहीं, बल्कि अली खामेनेई की सुरक्षा को लेकर थी. लेबनान के टीवी चैनल अल-मयादीन को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अराघची ने संघर्ष के शुरुआती दिनों की घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया.
हमले के बाद दो दिन तक अनिश्चितता में रहे
ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने भी इसे रिपोर्ट किया, जिसमें अराघची ने कहा, ’28 फरवरी को संघर्ष के शुरुआती घंटों में जब अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय पर हमला हुआ, तब मैं वहीं मौजूद था. मेरी पहली सोच और मेरी पहली चिंता नेता की स्थिति को लेकर थी.’ उन्होंने बताया कि हमले के बाद स्थिति बेहद अराजक थी और कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे.
विदेश मंत्री ने कहा कि अगले दो दिनों तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि खामेनेई किस स्थिति में हैं. इस दौरान उनका पूरा ध्यान लोगों को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर केंद्रित रहा. उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार खामेनेई को सुरक्षित स्थान या बंकर में जाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
Iranian FM Araghchi reveals he survived strikes that killed Ali Khamenei
‘I WAS EMERGING FROM THE RUBBLE’
‘At the moment of his martyrdom, I was in the office that was attacked’
IDF footage: ’50 Israeli jets bomb Khamenei’s compound’ pic.twitter.com/9CAxK0t5mW
— RT (@RT_com) June 4, 2026
‘जब तक जनता सुरक्षित नहीं, मैं भी नहीं जाऊंगा’
अराघची ने दावा किया कि अली खामेनेई का मानना था कि यदि आम ईरानी नागरिकों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है तो वह स्वयं भी किसी विशेष सुरक्षा व्यवस्था का लाभ नहीं लेंगे. विदेश मंत्री के मुताबिक, खामेनेई ने कहा था कि जो कुछ देश की जनता के साथ होगा, वही उनके साथ भी होना चाहिए. अराघची ने युद्ध के दौरान खामेनेई की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि खतरे के बावजूद वह लगातार प्रशासनी कामकाज और रणनीतिक फैसलों की निगरानी करते रहे.
खाड़ी देशों को पहले ही दी थी चेतावनी
इंटरव्यू में अराघची ने यह भी कहा कि संघर्ष तेज होने से पहले उन्होंने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का दौरा किया था. उन्होंने कहा कि हमने साफ कर दिया था कि अगर ईरान पर हमलों के लिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया गया तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी.
उनके मुताबिक, क्षेत्रीय देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए किए जाने का समर्थन नहीं किया था, लेकिन अमेरिका ने अपनी रणनीति जारी रखी. अराघची ने अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि यदि पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे नहीं होते तो वे ईरान की जवाबी कार्रवाई का निशाना भी नहीं बनते.
‘ईरान की प्रतिक्रिया ने विरोधियों को चौंकाया’
विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया की तीव्रता ने उसके विरोधियों को आश्चर्यचकित कर दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई लोगों ने इतनी तेज और तत्काल प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की थी. अराघची के अनुसार, बड़े पैमाने पर हमले झेलने के बावजूद ईरान ने बहुत कम समय में जवाब दिया, जिसने विरोधी पक्ष की रणनीतिक गणनाओं को प्रभावित किया.
मोजतबा खामेनेई के पास है पूरी कमान
ईरान के नेतृत्व परिवर्तन पर पूछे गए सवालों के जवाब में अराघची ने कहा कि अब मोजतबा खामेनेई देश के सर्वोच्च नेतृत्व की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि मोजतबा खामेनेई का शासन व्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों पर मजबूत प्रभाव है तथा राज्य की बागडोर पूरी तरह उनके नियंत्रण में है. अराघची ने कहा कि नए सर्वोच्च नेता के साथ लगातार संवाद बना हुआ है. उनके निर्देश नियमित रूप से अधिकारियों तक पहुंचाए जा रहे हैं. उनके मुताबिक, नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी व्यवस्था में कोई रुकावट नहीं आई है.
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28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में शुरू हुई जंग
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नामक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया. इस अभियान में ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल अड्डों, वायु-रक्षा प्रणालियों और शीर्ष सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाया गया. इस हमले में तेहरान सहित कई शहरों में विस्फोट हुए.
इन्ही हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य एवं सुरक्षा अधिकारियों के मारे जाने की समाचारें सामने आईं. इजरायल ने दावा किया कि उसके लगभग 200 लड़ाकू विमानों ने सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला किया, जबकि अमेरिका ने भी मिसाइल और हवाई हमलों में भाग लिया.
हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसे उसने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV’ नाम दिया. ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों की सैन्य सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और इराक के कुछ हिस्सों में हवाई हमले की घटनाएँ दर्ज की गईं.
इस दिन से शुरू हुआ संघर्ष आगे चलकर 2026 के ईरान युद्ध में बदल गया, जिसके कारण पूरे मध्य-पूर्व में तनाव, आर्थिक प्रभाव और बड़े पैमाने पर जनहानि हुई. इसने पूरी दुनिया में आर्थिक संकट और जियो पॉलिटिकल टेशन को भी पैदा कर दिया, जो अब तक जारी है. फिलहाल 8 अप्रैल से दोनों पक्षों (अमेरिका और ईरान) के बीच सीजफायर चल रहा है, लेकिन आए दिन भड़काऊ बयानबाजी और छिटपुट हमले कब दोबारा युद्ध का रुख अख्तियार कर लें, कहा नहीं जा सकता.
ANI के इनुपुट के साथ.
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