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June 13, 2026

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TVS iQube vs Orbiter: मई 2026 में खूब बिकीं TVS की ये दो इलेक्ट्रिक स्कूटर, जानें आपके लिए सही कौन?

TVS मोटर कंपनी फिलहाल हिंदुस्तान की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनियों में से एक बन चुकी है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कंपनी ने मई 2026 में 42,459 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप पर जगह बनाई है. इसने बाजार में Bajaj Auto, Ather Energy और Hero MotoCorp जैसी बड़ी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है. फिलहाल कंपनी के पास इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में दो मॉडल मौजूद हैं. पहला TVS iQube और दूसरा Orbiter. अगर आप भी इनमें से किसी एक को लेने की सोच रहे हैं लेकिन कन्फ्यूज हैं, तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. हमने आपके लिए दोनों स्कूटर्स का आसान और डिटेल्ड कम्पैरिजन किया है, ताकि आप सही फैसला ले सकें. चलिए शुरू करते हैं. TVS iQube vs Orbiter: डिजाइन  TVS iQube का लुक ज्यादा प्रीमियम और फैमिली-फ्रेंडली लगता है. वहीं Orbiter का डिजाइन ज्यादा सिंपल और बजट-फोकस्ड है. iQube में आपको क्लीन बॉडी लाइनें, मैच्योर डिजाइन और बेहतर फिट-फिनिश मिलता है. वहीं Orbiter को खास तौर पर प्रैक्टिकल और सस्ता ऑप्शन रखने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका लाइट और मिनिमल लुक डेली राइड को ध्यान में रखकर बनाया गया है. कुल मिलाकर कहें तो, अगर आपको स्टाइल और प्रीमियम फील चाहिए तो iQube बेहतर होगा. लेकिन अगर आपका फोकस बजट और सिंपल यूज है तो Orbiter ज्यादा सही ऑप्शन है. TVS iQube vs Orbiter: बैटरी और रेंज TVS iQube में 2.2 kWh 3.1 kWh, 3.5 kWh, 4.7 kWh and 5.3 kWh तक के वेरिएंट मिलते हैं. इसकी रेंज भी काफी अच्छी है. एक बार फुल चार्ज करने पर यह लगभग 94 km से लेकर 212 km तक चल सकता है. हालांकि इसमें फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट नहीं मिलता. 0 से 80% चार्ज होने में करीब 4 घंटे 18 मिनट तक लग सकते हैं. ये वेरिएंट-वेरिएंट पर डिपेंड करता है. यह भी पढ़ें: फ्यूल खर्च से परेशान लोगों के लिए ये 5 इलेक्ट्रिक स्कूटर हैं बेहतर चॉइस, फटाफट डालें नजर वहीं दूसरी तरफ TVS Orbiter एक बजट-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक स्कूटर है, जो सिर्फ 1.8 kWh और 3.1 kWh ऑप्शन के साथ आता है. इसकी रेंज भी iQube के मुकाबले थोड़ी कम है, जो 86 km से लेकर 158 km तक जाती है. लेकिन चार्जिंग के मामले में यह थोड़ा तेज है. छोटी बैटरी लगभग 2 घंटे 20 मिनट में 80% तक चार्ज हो जाती है और बड़ी बैटरी को करीब 4 घंटे 10 मिनट लगते हैं. TVS iQube vs Orbiter: सेफ्टी पैकेज सेफ्टी के मामले में TVS iQube और Orbiter दोनों ही स्कूटर्स अच्छे फीचर्स के साथ आते हैं, लेकिन दोनों का फोकस थोड़ा अलग है. iQube ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी पर जोर देता है. वहीं Orbiter को रोजमर्रा की प्रैक्टिकल यूज के हिसाब से बनाया गया है. iQube में आपको रेगेनरेटिव ब्रेकिंग, ट्यूबलेस टायर्स, डे/नाइट डिस्प्ले मोड, जियोफेंसिंग, एंटी-थेफ्ट अलर्ट, क्रैश और फॉल डिटेक्शन जैसे स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स मिलते हैं. वहीं TVS Orbiter में भी जरूरी सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं, जैसे एंटी-थेफ्ट और जियोफेंस अलर्ट, क्रैश और फॉल डिटेक्शन, टॉव अलर्ट और पानी-धूल से बचाव की सुविधा. इसमें 14-इंच का बड़ा फ्रंट अलॉय व्हील और 34 लीटर का स्टोरेज भी मिलता है. साथ ही इसे 600 से ज्यादा सेफ्टी टेस्ट्स से भी गुजारा गया है. TVS iQube vs Orbiter: टेक्नोलॉजी और फीचर्स iQube में Smart LED हेडलैंप DRLs के साथ, HMI कंट्रोलर, TFT डिस्प्ले, 32-लीटर स्टोरेज और SmartXonnect जैसे स्मार्ट फीचर्स मिलते हैं. इसमें म्यूजिक कंट्रोल, कॉल अलर्ट, OTA अपडेट, पार्किंग और रिवर्स असिस्ट, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, TPMS, इनकॉग्निटो मोड और USB चार्जिंग जैसी खूबियां भी हैं. वहीं Orbiter भी फीचर्स के मामले में पीछे नहीं है. इसमें LED हेडलैंप, SmartXonnect, नेविगेशन, कॉल और मैसेज अलर्ट, OTA अपडेट, लाइव लोकेशन शेयरिंग, क्रूज कंट्रोल, हिल-होल्ड असिस्ट, रिवर्स पार्किंग असिस्ट, USB चार्जिंग, Eco और City राइड मोड, LCD क्लस्टर और DTE जैसी सुविधाएं मिलती हैं. TVS iQube vs Orbiter: कीमत TVS iQube की एक्स-शोरूम कीमत 94,434 रुपये है, लेकिन अगर आप BaaS (Battery as a Service) ऑप्शन चुनते हैं तो यह सिर्फ 59,999 रुपये में मिल जाता है. वहीं दूसरी तरफ TVS Orbiter की कीमत 84,500 रुपये है, जबकि BaaS के साथ यह सिर्फ 49,999 रुपये में उपलब्ध हो जाता है. TVS iQube vs Orbiter: आपको कौन सा खरीदना चाहिए? TVS iQube थोड़ी प्रीमियम प्राइस पर आता है क्योंकि इसमें ज्यादा फीचर्स, बेहतर डिजाइन और एडवांस टेक्नोलॉजी मिलती है. वहीं Orbiter को खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो बजट में एक सिंपल और काम का इलेक्ट्रिक स्कूटर चाहते हैं. इसका डिजाइन सीधा-साधा है और रोजमर्रा की सिटी राइडिंग के लिए यह काफी कम्फर्टेबल और प्रैक्टिकल है. अब दोनों में से कौन सा बेहतर है, ये आपकी जरूरत पर डिपेंड करता है. अगर आपको प्रीमियम लुक, नए फीचर्स और टेक्नोलॉजी चाहिए तो iQube सही रहेगा. लेकिन अगर आपका फोकस कम कीमत, इजी यूज और डेली कम्यूट है तो Orbiter ज्यादा बेहतर ऑप्शन है. यह भी पढ़ें: एक बार चार्ज करिए और लंबा चलाइए, कम बजट में ये 5 इलेक्ट्रिक स्कूटर्स देते हैं सबसे ज्यादा रेंज The post TVS iQube vs Orbiter: मई 2026 में खूब बिकीं TVS की ये दो इलेक्ट्रिक स्कूटर, जानें आपके लिए सही कौन? appeared first on Naya Vichar.

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JoSAA राउंड-1 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी, ऐसे डाउनलोड करें अलॉटमेंट लेटर

JoSAA Round 1 Seat Allotment Result 2026: ज्वॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी (JoSAA) ने काउंसलिंग 2026 के तहत राउंड-1 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी कर दिया है. ऐसे उम्मीदवार जिन्हें IIT, NIT, IIIT और GFTI संस्थानों में एडमिशन चाहिए, वे JoSAA काउंसलिंग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपना सीट अलॉटमेंट चेक कर सकतेह हैं. किस आधार पर अलॉट हुई है सीट?  छात्रों को JEE Main या JEE Advanced रैंक, उनके द्वारा सेलेक्ट की गई च्वॉइसेज, कैटेगरी और उपलब्ध सीटों के आधार पर सीट अलॉट की गई है. राउंड-1 में सीट मिलने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी. देखें जोसा काउंसलिंग का शेड्यूल इवेंट तारीख राउंड-1 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 13 जून 2026 राउंड-1 ऑनलाइन रिपोर्टिंग शुरू 13 जून 2026 सीट स्वीकृति शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 26 जून 2026 राउंड-2 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 30 जून 2026 कैसे करें JoSAA Round 1 Result 2026  JoSAA की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं. View Seat Allotment Result लिंक पर क्लिक करें. JEE Main/JEE Advanced आवेदन संख्या, पासवर्ड और सुरक्षा पिन दर्ज करें. लॉगिन करने के बाद सीट आवंटन का डिटेल स्क्रीन पर दिखाई देगा. अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करें और फ्यूचर के लिए उसका प्रिंटआउट निकाल लें.  सीट मिलने के बाद क्या करें? राउंड-1 में सीट आवंटित होने के बाद उम्मीदवारों को ऑनलाइन रिपोर्टिंग करनी होगी. इस दौरान उन्हें फीस जमा करनी होगी और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने होंगे. इसके अलावा उम्मीदवार अपनी पसंद के अनुसार Freeze, Float या Slide ऑप्शन भी चुन सकते हैं. Freeze: आवंटित सीट स्वीकार कर आगे की काउंसलिंग में भाग नहीं लेना. Float: वर्तमान सीट स्वीकार करते हुए अगले राउंड में बेहतर संस्थान/कोर्स का इंतजार करना. Slide: उसी संस्थान में बेहतर पसंदीदा ब्रांच मिलने की संभावना बनाए रखना. रजिस्ट्रेशन करने के लिए ऊपर दी गई तस्वीर पर क्लिक करें देश के 138 संस्थानों में मिलेगा प्रवेश JoSAA 2026 के माध्यम से देशभर के 138 प्रमुख तकनीकी संस्थानों में प्रवेश दिया जाएगा. इनमें 23 IIT, IISc बेंगलुरु, 31 NIT, 26 IIIT, IIEST शिबपुर और 56 अन्य प्रशासनी वित्तपोषित तकनीकी संस्थान (GFTI) शामिल हैं. यह भी पढ़ें- IIT हैदराबाद का AI या CS कौन सी ब्रांच है बेस्ट? सीटें, कटऑफ और करियर स्कोप से समझें अंतर The post JoSAA राउंड-1 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी, ऐसे डाउनलोड करें अलॉटमेंट लेटर appeared first on Naya Vichar.

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कौन से यूरोपीय देश पाकिस्तान को देते हैं हथियार? जिससे भारत पर हुए हमले; जयशंकर ने उठाए सवाल

Europe Weapon Supply Pakistan: हिंदुस्तान के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया बयान के बाद पाकिस्तान के रक्षा तंत्र को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. पाकिस्तान की सैन्य ताकत लगभग पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुकी है, लेकिन उसकी थलसेना, वायुसेना और नौसेना आज भी कई महत्वपूर्ण यूरोपीय हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म पर निर्भर है. तो आखिर कौन से देश हैं, जो पाकिस्तान को सैन्य सहायता देते हैं.  फिनलैंड में आयोजित कुलतारांता टॉक्स कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने यूरोपीय देशों द्वारा पाकिस्तान को हथियार बेचने के मुद्दे को उठाया. हिंदुस्तान द्वारा रूस से तेल खरीदने पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान ने अमेरिका के कहने पर तेल खरीदा था. इसी के बाद उन्होंने यूरोप के दोहरे रवैये पर भी कटाक्ष किया और कहा कि हिंदुस्तान ने कभी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला, लेकिन यूरोप से मिले हथियारों का इस्तेमाल हिंदुस्तान के खिलाफ किया गया. उनके कहने का अर्थ था कि यूरोपीय देश उन्हें हथियार बेचते हैं जो इस्तेमाल हिंदुस्तान पर हमले के लिए करते हैं.  लंबे समय से यूरोप रहा है पाकिस्तान का सप्लायर स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के अनुसार, 1990 के दशक से लेकर 2010 के दशक तक पाकिस्तान ने अपनी वायुसेना और नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए यूरोपीय देशों पर काफी भरोसा किया. उस दौर में पाकिस्तान के कुल हथियार आयात में यूरोपीय देशों की हिस्सेदारी लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. हालांकि हालात अब पहले जैसे नहीं हैं. SIPRI की 2021-2025 अवधि की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान की यूरोपीय हथियारों पर निर्भरता काफी कम हो चुकी है. वर्तमान में नीदरलैंड्स, तुर्किये और ब्रिटेन सीमित स्तर पर पाकिस्तान को रक्षा सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं.  यूरोपीय देशों में पाकिस्तान को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने वालों में नीदरलैंड्स सबसे आगे माना जाता है. SIPRI के अनुसार 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के कुल हथियार आयात में नीदरलैंड्स की हिस्सेदारी 4.6 प्रतिशत रही. डच कंपनी डेमन पाकिस्तान नौसेना के लिए जहाज और गश्ती पोत निर्माण से जुड़ी रही है.  पाकिस्तान की सेना में आज भी इस्तेमाल हो रहे यूरोपीय हथियार पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां और सैन्य इकाइयां कई यूरोपीय हथियारों का इस्तेमाल करती हैं. इनमें इटली की बेरेटा और ऑस्ट्रिया की ग्लॉक पिस्तौलें शामिल हैं. इसके अलावा एसआईजी कंसोर्टियम के हथियार, जर्मनी की हेकलर एंड कोच द्वारा निर्मित एमपी-5 सबमशीन गन और जी-3 राइफल भी पाकिस्तान के शस्त्रागार का हिस्सा हैं. बेल्जियम की एफएन हर्स्टल कंपनी की एफएन पी-90 सबमशीन गन भी पाकिस्तानी बलों के पास मौजूद है. दुनिया के कई देशों की विशेष सुरक्षा इकाइयां और वीआईपी सुरक्षा दस्ते भी इन हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा ऑस्ट्रिया निर्मित आर्गेस 84 पी2ए1 ग्रेनेड लांचर, स्पेन का अलकोतान-100 और फ्रांस का एमओ-120-आरटी मोर्टार भी पाकिस्तान के सैन्य उपकरणों में शामिल हैं. जमीनी वाहनों में भी यूरोप की मौजूदगी सिर्फ हथियार ही नहीं, पाकिस्तान कुछ यूरोपीय सैन्य वाहनों का भी इस्तेमाल करता है. ब्रिटेन की लैंड रोवर डिफेंडर गाड़ियां और ब्रिटिश मूल का आर्डवार्क माइनस्वीपिंग वाहन आज भी विभिन्न सैन्य भूमिकाओं में इस्तेमाल किए जाते हैं. पिछले साल ब्रिटेन के सैन्य अधिकारियों ने पाकिस्तान का दौरा भी किया था.  वायुसेना की ताकत में यूरोप का अहम योगदान हालांकि पाकिस्तान वायुसेना ने हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में चीनी लड़ाकू विमानों को शामिल किया है, लेकिन उसके बेड़े में कई यूरोपीय प्लेटफॉर्म अब भी सक्रिय हैं. फ्रांस के डसॉल्ट मिराज लड़ाकू विमान पाकिस्तान की वायु शक्ति का लंबे समय से हिस्सा रहे हैं. इसके अलावा स्वीडन का साब एरीआई एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम भी पाकिस्तान के पास है, जो हवाई निगरानी और कमांड क्षमताओं को मजबूत बनाता है.  फ्रांस निर्मित डसॉल्ट फाल्कन-20 विमान का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर मिशनों में किया जाता है. वहीं एमबीडीए स्पाडा-2000 एयर डिफेंस सिस्टम भी पाकिस्तान की वायु रक्षा व्यवस्था में शामिल है. समुद्री सुरक्षा में भी यूरोपीय प्लेटफॉर्म की भूमिका पाकिस्तान नौसेना भी यूरोप से मिले प्लेटफॉर्म पर काफी हद तक निर्भर रही है. उसके बेड़े में 1970 के दशक में विकसित फ्रांसीसी अगोस्ता श्रेणी की पनडुब्बियां शामिल हैं. ये लंबे समय से पाकिस्तान की समुद्री रणनीति का अहम हिस्सा रही हैं. इसके अलावा ब्रिटेन निर्मित सी किंग हेलीकॉप्टर भी पाकिस्तान नौसेना के पास हैं. ये हेलीकॉप्टर पनडुब्बी रोधी अभियानों में इस्तेमाल किए जाते हैं और अमेरिकी सिकोरस्की एस-61 के लाइसेंस प्राप्त संस्करण माने जाते हैं. तुर्किये बना महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार पाकिस्तान के लिए तुर्किये भी एक अहम रक्षा सहयोगी है. SIPRI के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान के हथियार आयात में तुर्किये की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है. पाकिस्तान ने तुर्किये से बैयराक्तार टीबी-2 ड्रोन, सैन्य वाहन और नौसेना के लिए विभिन्न जहाज खरीदे हैं. दोनों देश संयुक्त रूप से लड़ाकू विमान विकास परियोजनाओं पर भी काम कर चुके हैं. ये भी पढ़ें:- अमेरिका ने फिर वेनेजुएला में बरसाया बम, ट्रंप का दावा- मारा गया ‘खून का प्यासा’ ट्रेन डी अरागुआ का सरगना ये भी पढ़ें:- किसने मारा 3 हिंदुस्तानीयों को? ट्रंप और ईरान ने एक दूसरे पर लगाया आरोप, जयशंकर ने US विदेश मंत्री को लगाया फोन चीन बना पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता वर्तमान समय में पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों का सबसे बड़ा आधार चीन है. SIPRI के अनुसार 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के कुल बड़े हथियार आयात का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा चीन से आया. वहीं 2015 से 2024 की अवधि में भी चीन की हिस्सेदारी करीब 78 प्रतिशत रही थी. पाकिस्तान लंबे समय से चीन से लड़ाकू विमान, युद्धपोत और अन्य उन्नत सैन्य उपकरण खरीदता रहा है. मई 2025 में हिंदुस्तान-पाकिस्तान तनाव के बाद चीन ने पाकिस्तान को जे-10सी लड़ाकू विमान उपलब्ध कराए. इसके अलावा पाकिस्तान ने एफसी-31 स्टेल्थ फाइटर विमान भी हासिल किए हैं. पाकिस्तान को चीन से तोप और टैंक तकनीक में भी चीन से सहायता मिली है.  वहीं हाल ही में पाकिस्तान को चीन से हैंगोर क्लास की पनडुब्बियों की भी सप्लाई मिलने लगी है. दोनों देशों के बीच 5 अरब डॉलर समझौते के तहत इस तरह की 8 सबमरीन बनाई जानी है, जिसमें से चार चीन में बनेंगी, जबकि चार का निर्माण कराची शिपयार्ड में होगा.   इसके अलावा पाकिस्तान को

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जामताड़ा : एंबुलेंस सेवा फेल, ट्रैक्टर से अस्पताल पहुंचे मरीज की इलाज के दौरान मौत

जामताड़ा से उमेश कुमार की रिपोर्ट  Jamtara News: स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. समय पर एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने के कारण एक गंभीर मरीज को ट्रैक्टर पर खटिया लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनी आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या है पूरा मामला?  मामला जामताड़ा थाना क्षेत्र के गोपालपुर पंचायत अंतर्गत शहरबेड़ा गांव का है. जानकारी के अनुसार शुक्रवार 12 जून की रात को मोनू टुडू की अचानक तबीयत बिगड़ गई. हालत गंभीर होने पर परिजनों ने प्रशासनी 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन आरोप है कि कई बार कॉल करने और मदद की गुहार लगाने के बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची. ट्रैक्टर से अस्पताल पहुंचाने के बावजूद मरीज की मौत जब कोई प्रशासनी सहायता नहीं मिली तो परिजनों और ग्रामीणों ने खुद मरीज को अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया. गांव में उपलब्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया रखकर मोनू टुडू को लिटाया गया और किसी तरह जामताड़ा सदर अस्पताल लाया गया. हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी. अस्पताल में डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन उपचार के दौरान ही मोनू टुडू की मौत हो गई. सिविल सर्जन ने जांच के दिए आदेश, एंबुलेंस कॉल की होगी जांच मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ शिव प्रसाद मिश्रा ने कहा कि कहां से चूक हुई है, मामले का जांच किया जाएगा, साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि परिजन द्वारा 108 एंबुलेंस को फोन किया था या नहीं. यह भी पढ़ें: झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों पर बारिश में नहीं रुकेगा सफर, NHAI ने शुरू किया ड्रेनेज सफाई का विशेष अभियान यह भी पढ़ें: Dhanbad: युवा संगम में मध्य प्रदेश का 56 सदस्यीय दल पहुंचा IIT धनबाद, झारखंड की संस्कृति से हुए रू-ब-रू यह भी पढ़ें: पश्चिमी सिंहभूम: बायोमेट्रिक व्यवस्था के विरोध में सेल प्रबंधन का पुतला दहन करेगी संयुक्त यूनियन The post जामताड़ा : एंबुलेंस सेवा फेल, ट्रैक्टर से अस्पताल पहुंचे मरीज की इलाज के दौरान मौत appeared first on Naya Vichar.

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जमशेदपुर: पुलिसकर्मी बनकर एडवोकेट से ठगी की कोशिश, पकड़े जाने के डर से भागे बदमाश

जमशेदपुर से संजीव की रिपोर्ट Jamshedpur News: जमशेदपुर शहर में खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताकर बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले शातिर ठगों ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह को अपना शिकार बनाने की कोशिश की. लेकिन अधिवक्ता ने अपनी कानूनी समझ और सूझबूझ से तुरंत ठगों की चाल को समझ लिया. इसके बाद पकड़े जाने के डर से ठग तुरंत मौके से फरार हो गए.  कोर्ट से लौट रहे थे अधिवक्ता, बुलेट सवारों ने रोका रास्ता  जानकारी के अनुसार, कोर्ट से काम निपटाकर वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह मोटरसाइकिल से मानगो स्थित अपने घर लौट रहे थे. मानगो बस स्टैंड गोलचक्कर के पास एक बुलेट पर सवार दो युवक उनका पीछा करने लगे. अधिवक्ता जैसे ही मानगो पुल पार कर आगे बढ़े, बुलेट सवारों ने उन्हें ओवरटेक कर रोका. कुछ दूरी पर ही मानगो यातायात पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी. बाइक चला रहे युवक ने पीछे बैठे व्यक्ति की तरफ रौब से इशारा करते हुए कहा कि ये हमारे बड़ा बाबू (इंस्पेक्टर) हैं. इसके तुरंत बाद पीछे बैठे तथाकथित इंस्पेक्टर ने डराने वाले लहजे में कहा कि आगे क्षेत्र में एक बड़ी हत्या हो गई है. माहौल बहुत खराब है, आपको डर नहीं लगता. अपनी सोने की चेन और अंगूठी उतारकर चुपचाप रख लीजिए, नहीं तो कुछ भी अनहोनी हो सकती है. इस पर अधिवक्ता विद्या सिंह ने कहा कि तुम शायद मुझे नहीं पहचानते. मैं एक अधिवक्ता हूं और किसी से नहीं डरता. इसके बाद दोनों बदमाश तुरंत अपनी बुलेट पर सवार होकर वहां से भाग गए.  कद-काठी से दिख रहे थे असली पुलिसवाले अधिवक्ता विद्या सिंह ने बताया कि अचानक हुई बातचीत से वे पल भर के लिए हैरान रह गए. दोनों बदमाशों की कद-काठी लंबी-चौड़ी और रंग गोरा था और वे दिखने में बिल्कुल पुलिसवाले ही लग रहे थे.  सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी पुलिस वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ हुई ठगी के प्रयास की सूचना मिलते ही साकची और बिष्टुपुर थाना पुलिस तुरंत रेस हो गई. पुलिस टीम ने मानगो पुल, बस स्टैंड गोलचक्कर और घटनास्थल के आस-पास की दुकानों व चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला. पुलिस बुलेट सवार बदमाशों की तलाश में जुटी है. लगातार हो रही हैं ठगी की वारदातें  खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्गों को डराने और उनके जेवर ठगने वालों ने जमशेदपुर पुलिस की नींद उड़ा रखी है. आशंका है कि यह ईरानी गिरोह का काम है. इस गिरोह ने पिछले कुछ दिनों में शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया है. पिछले दिनों जुगसलाई में बुजुर्ग से छह लाख, बिष्टुपुर में बुजुर्ग स्त्री से दो लाख और साकची में 2.15 लाख रुपये के गहनों की ठगी कर फरार हो गए थे. यह भी पढ़ें: Dhanbad: युवा संगम में मध्य प्रदेश का 56 सदस्यीय दल पहुंचा IIT धनबाद, झारखंड की संस्कृति से हुए रू-ब-रू यह भी पढ़ें: पश्चिमी सिंहभूम: बायोमेट्रिक व्यवस्था के विरोध में सेल प्रबंधन का पुतला दहन करेगी संयुक्त यूनियन The post जमशेदपुर: पुलिसकर्मी बनकर एडवोकेट से ठगी की कोशिश, पकड़े जाने के डर से भागे बदमाश appeared first on Naya Vichar.

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अभिषेक बनर्जी के घर की हुई तलाशी, बीजेपी बोली- किसी को भी जांच से छूट नहीं मिल सकती

मामले पर रिएक्शन देते हुए बीजेपी नेता लॉकेट चटर्जी ने कहा कि अगर किसी मामले में भ्रष्टाचार, शिकायत या एफआईआर दर्ज है, तो जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई करेंगी. उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी को भी जांच से छूट नहीं मिल सकती. लॉकेट ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कई बार ऐसे बयान दिए, जो लोगों को भड़काने वाले थे. उनके मुताबिक, किसी मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ये नेतृत्वक बदले की कार्रवाई नहीं : लॉकेट चटर्जी लॉकेट चटर्जी ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने चुनाव में अपना फैसला सुना दिया और अब जिन मामलों में शिकायतें दर्ज हैं, उनकी जांच आगे बढ़ेगी. लॉकेट का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के कई नेता, पार्षद और पंचायत प्रतिनिधि पहले से ही अलग-अलग मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं या जेल जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि इसे नेतृत्वक बदले की कार्रवाई बताना सही नहीं है. VIDEO | Kolkata: On recent searches at former West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee’s residence and TMC’s office in Kalighat, BJP leader Locket Chatterjee says, “If there is corruption, an FIR, or a case, then raids are bound to happen. That is just how the legal system and… pic.twitter.com/cnUSL4xTTw — Press Trust of India (@PTI_News) June 13, 2026 लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय तक गलत काम और भ्रष्टाचार हुआ, जिसकी वजह से जनता नाराज हुई. उन्होंने कहा कि जो लोग कानून तोड़ते हैं, उन्हें आखिरकार जवाब देना पड़ता है. उनके मुताबिक, जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और आने वाले समय में सच्चाई सबके सामने आ जाएगी. यह भी पढ़ें : अभिषेक बनर्जी के घर 4 घंटे तक चली छापेमारी, ममता बनर्जी भी पहुंचीं मौके पर कार्रवाई चार घंटे से ज्यादा समय तक चली पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने की टीम ने कोलकाता पुलिस की मदद से शनिवार तड़के करीब तीन बजे अभिषेक बनर्जी के घर पर तलाशी शुरू की. यह कार्रवाई चार घंटे से ज्यादा समय तक चली. इस छापेमारी को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी नाराजगी जताई और सवाल उठाए हैं. The post अभिषेक बनर्जी के घर की हुई तलाशी, बीजेपी बोली- किसी को भी जांच से छूट नहीं मिल सकती appeared first on Naya Vichar.

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अब चुटकियों में बुक होगी ट्रेन टिकट, रेल मंत्री ने किया नई वेबसाइट का ऐलान

IRCTC New Website : ट्रेन टिकट बुक करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए हिंदुस्तानीय रेलवे एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार, 11 जून को घोषणा की है कि अगले महीने यानी 15 जुलाई तक IRCTC (आईआरसीटीसी) की एक बिल्कुल नई वेबसाइट लॉन्च कर दी जाएगी. यह जानकारी रेल मंत्री ने जयपुर के मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान साझा की. #WATCH | On students’ demand, Union Railway Minister announces new IRCTC website to be launched by 15th July pic.twitter.com/fjX6z6vyj1 — ANI (@ANI) June 11, 2026 क्यों खास होगी नई वेबसाइट ? अक्सर देखा जाता है कि त्योहारों या तत्काल टिकट बुकिंग के समय भारी ट्रैफिक के कारण IRCTC की वेबसाइट धीमी हो जाती है. यात्रियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए इस प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया जा रहा है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में रेलवे के एक सीनियर अफसर ने बताया कि इस नई वेबसाइट में पहले के मुकाबले कई बेहतरीन, तेज और आधुनिक फीचर्स जोड़े जा रहे हैं. इसका सीधा मकसद यूजर्स के ऑनलाइन टिकट बुकिंग के अनुभव को बेहद आसान, सुरक्षित और शानदार बनाना है. यात्रियों को क्या फायदा होगा ? सुपरफास्ट स्पीड: नई तकनीक की वजह से वेबसाइट लोड होने और टिकट बुक होने में कम समय लगेगा. आधुनिक इंटरफेस: वेबसाइट का लुक और लेआउट ज्यादा फ्रेंडली होगा, जिससे आम यूजर भी आसानी से समझ सकेंगे. बेहतर फंक्शन: टिकट कैंसिल करने से लेकर रिफंड स्टेटस देखने जैसे काम पहले से ज्यादा सुचारू रूप से होंगे. Also Read : प्लेटफॉर्म टिकट होने के बावजूद लगा ₹500 का जुर्माना, नियम जानकर उड़ जाएंगे होश The post अब चुटकियों में बुक होगी ट्रेन टिकट, रेल मंत्री ने किया नई वेबसाइट का ऐलान appeared first on Naya Vichar.

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गरुड़ पुराण: मृत्यु के बाद शव के नाक और कान में क्यों लगाई जाती है रुई? जानिए रहस्य

Garuda Puran: सनातन धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिनमें अंतिम संस्कार को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद किए जाने वाले कर्मों और नियमों का विस्तार से उल्लेख मिलता है. आपने अक्सर देखा होगा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके नाक और कान में रुई लगा दी जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है? क्या यह केवल वर्षों पुरानी परंपरा है या इसके पीछे कोई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण भी छिपा है? आइए जानते हैं. कान और नाक में रुई डालने का महत्व गरुड़ पुराण में मानव शरीर को नौ द्वारों का घर बताया गया है. इनमें दो आंखें, दो कान, दो नथुने, एक मुंह और दो विसर्जन अंग शामिल हैं. मान्यता है कि जब आत्मा शरीर छोड़ती है, तो वह इन्हीं मार्गों में से किसी एक से बाहर निकलती है. सोने के कणों और तुलसी की सुरक्षा शास्त्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार से पहले मृतक के कुछ खुले अंगों में सोने के छोटे कण या तुलसी के पत्ते रखे जाते हैं. सोना पवित्र धातु माना जाता है, जबकि तुलसी को मोक्ष प्रदान करने वाली माना गया है. नाक और कान के छिद्र अपेक्षाकृत बड़े होने के कारण ये वस्तुएं बाहर न गिरें, इसलिए वहां रुई लगा दी जाती है. जीवात्मा के पुनः प्रवेश को रोकने की मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के तुरंत बाद जीवात्मा का शरीर के प्रति मोह पूरी तरह समाप्त नहीं होता. इसलिए वह अपनी देह में दोबारा प्रवेश करने का प्रयास कर सकती है. ऐसे में शरीर के खुले मार्गों को रुई से बंद कर दिया जाता है, ताकि आत्मा की आगे की यात्रा में कोई बाधा न आए. नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा गरुड़ पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि मृत्यु के बाद शरीर निष्प्राण हो जाता है. ऐसी स्थिति में नकारात्मक शक्तियां या अशुभ ऊर्जाएं शरीर के खुले अंगों के माध्यम से उसमें प्रवेश कर सकती हैं. रुई को एक प्रकार का सुरक्षा कवच माना जाता है, जो इन प्रभावों से बचाव का प्रतीक है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण मृत्यु के बाद शरीर में अपघटन (सड़न) की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव तेजी से बढ़ने लगते हैं. नाक और कान जैसे छिद्रों को रुई से बंद करने से शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों और संक्रमण के प्रसार को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिलती है. मृत्यु के बाद शरीर के अंदर गैसें बनने लगती हैं और कुछ द्रव भी बाहर निकल सकते हैं. ऐसे में नाक और कान में रुई लगाने से इन स्रावों को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है तथा शव को व्यवस्थित और सम्मानजनक स्थिति में रखने में मदद मिलती है. यहां पढ़ें धर्म से जुड़ी समाचारें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Naya Vichar The post गरुड़ पुराण: मृत्यु के बाद शव के नाक और कान में क्यों लगाई जाती है रुई? जानिए रहस्य appeared first on Naya Vichar.

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लैंडिंग के वक्त हादसे का शिकार हुआ IAF का AN-32

रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि यह घटना तब हुई जब विमान रोवरिया इलाके में हिंदुस्तानीय वायु सेना के अड्डे पर उतर रहा था. वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और दुर्घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी फिलहाल नहीं है. उन्होंने कहा कि मामले में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है. An AN-32 transport aircraft of the Indian Air Force has met with an accident at the Jorgat Air Force station in Assam. More details are awaited: Indian Air Force pic.twitter.com/XdybiLdljq — ANI (@ANI) June 13, 2026 हिंदुस्तानीय वायु सेना ने बताया कि जोरहाट में दुर्घटनाग्रस्त हुए AN-32 विमान के पास आग बुझाने का काम जारी है. हादसे के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड और आपातकालीन टीमों को मौके पर भेज दिया गया. अधिकारी स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने और विमान की हालत का आकलन करने में जुटे हैं. फिलहाल हादसे में किसी के घायल होने या नुकसान की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हादसे के बाद की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर लिखा कि जोरहाट में AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया है. फिलहाल पूरी जानकारी का इंतजार है. AN32 crashes during landing at Jorhat Details awaitedHowever, in the landing accidents that I have seen of AN32, people have always walked awayI hope it’s the same case here too pic.twitter.com/0HeAUFoy81 — Dr MJ Augustine Vinod 🇮🇳 (@mjavinod) June 13, 2026 The post लैंडिंग के वक्त हादसे का शिकार हुआ IAF का AN-32 appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली में महंगी होगी बिजली! DERC ने हटाई सरचार्ज कैप, बढ़ेगा बिल

Delhi Electricity Bill Hike : चिलचिलाती धूप और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की मार झेल रहे दिल्ली के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद परेशान करने वाली समाचार है. वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और कोयले की आसमान छूती कीमतों के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट का सीधा असर अब दिल्ली की जनता की जेब पर पड़ने जा रहा है. दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राजधानी की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को उपभोक्ताओं से भारी-भरकम ‘फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्‍टमेंट सरचार्ज’ (FPPAS) वसूलने की खुली छूट दे दी है. इस नए आदेश के बाद बिजली कंपनियों पर लगी 10 प्रतिशत की पुरानी सीमा पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे दिल्ली के एक बड़े वर्ग का मासिक बिजली बिल करीब 16 से 18 प्रतिशत तक बढ़ना बिल्कुल तय है. क्यों महंगा होने जा रहा है बिजली का बिल ? इस पूरी बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह बिजली उत्पादन की बढ़ती लागत (Cost of Power Generation) है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-नेतृत्वक तनाव के कारण विदेशों से आयात होने वाले कोयले की कीमतों और उसके ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है. बिजली उत्पादन की इसी रिकॉर्ड तोड़ लागत की भरपाई करने के लिए दिल्ली की प्रमुख बिजली कंपनियों— बीआरपीएल (BRPL), बीवाईपीएल (BYPL) और टाटा पावर (TPDDL) ने अप्रैल में आई भारी लागत के बाद मई के महीने में आयोग से लिमिट बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है. आपकी कंपनी अब कितना वसूलेगी सरचार्ज? नए आदेश के मुताबिक, अलग-अलग बिजली कंपनियों के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर सरचार्ज का बोझ इस तरह बढ़ेगा. टाटा पावर (TPDDL): उत्तरी दिल्ली के उपभोक्ताओं को अब पूरा 16 प्रतिशत FPPAS देना होगा. बीएसईएस राजधानी (BRPL): दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए अप्रैल महीने के आधार पर कुल 17.94 प्रतिशत सरचार्ज वसूला जाएगा. बीएसईएस यमुना (BYPL): पूर्वी और मध्य दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए कुल 17.43 प्रतिशत सरचार्ज वसूलने की हरी झंडी दी गई है. डीईआरसी (DERC) ने साफ कर दिया है कि कंपनियों को दी गई यह विशेष छूट तब तक मासिक आधार पर जारी रहेगी, जब तक कि आयोग इस संबंध में कोई अगला नया दिशानिर्देश या आदेश जारी नहीं कर देता. किन लोगों पर पड़ेगा इसका सीधा असर? इस कड़े फैसले के बीच दिल्ली के एक बड़े वर्ग के लिए राहत की बात यह है कि इसका असर सभी उपभोक्ताओं पर एक समान नहीं पड़ेगा: सब्सिडी वाले उपभोक्ता (सुरक्षित): जो उपभोक्ता दिल्ली प्रशासन की तरफ से पूर्ण (100% यानी 200 यूनिट तक फ्री) या 50 प्रतिशत (400 यूनिट तक) की बिजली सब्सिडी पा रहे हैं, उन्हें इस बढ़ोतरी से पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. उनका बिल नहीं बढ़ेगा. गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ता (झटका): इस बढ़े हुए सरचार्ज का सीधा झटका सिर्फ उन लोगों को लगेगा जो दिल्ली प्रशासन की बिजली सब्सिडी योजना के दायरे से बाहर हैं. मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के वे लोग, जो पूरा बिजली बिल चुकाते हैं, उनका मासिक बजट अब पूरी तरह हिलने वाला है. Also Read : खाद्य वस्तुओं और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से मई में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.93% पर पहुंची; आरबीआई ने भी बढ़ाया अनुमान The post दिल्ली में महंगी होगी बिजली! DERC ने हटाई सरचार्ज कैप, बढ़ेगा बिल appeared first on Naya Vichar.

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