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Asian Para Games 2026: कौन हैं सुर्वणा राज? 15.66 मीटर का थ्रो फेंक जीता गोल्ड

Asian Para Games 2026: जापान के नागोया में गुरुवार को स्त्री F54 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में सुर्वणा राज ने 15.66 मीटर का थ्रो कर पहला स्थान हासिल किया. ईरान की शाहला हदीदी ने 15.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन 14.65 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.

सुर्वणा राज की पहचान सिर्फ एक पैरा एथलीट के तौर पर नहीं है. वह दिव्यांग लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों और सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में भी काम करती हैं. एक्सेसिबिलिटी विशेषज्ञ के रूप में वह हिंदुस्तान में अब तक 1,000 से अधिक एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कर चुकी हैं. नागोया में मिला स्वर्ण पदक उनके स्पोर्ट्स करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

2017 में शुरू किया पैरा एथलेटिक्स का सफर

सुर्वणा राज ने 2017 में पैरा एथलेटिक्स में अपना सफर शुरू किया था. इसके बाद उन्होंने डिस्कस थ्रो में लगातार प्रदर्शन करते हुए एशिया की प्रमुख F54 खिलाड़ियों में जगह बनाई. वह महाद्वीपीय रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रह चुकी हैं और तीन एशियन पैरा गेम्स में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. कोच पिंटू नागर उनके स्पोर्ट्स को निखारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

नागोया में गोल्ड मेडल जीतने से पहले भी सुर्वणा ने इस साल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए थे. दुबई में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के तहत 17वीं फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने स्त्री F54/55 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. वहीं, ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा ट्रैक मीट में उन्होंने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक हासिल किया था.

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स्पोर्ट्स के साथ दिव्यांगों की सुविधाओं के लिए भी करती हैं काम

सुर्वणा राज स्पोर्ट्स के अलावा एक्सेसिबिलिटी विशेषज्ञ के रूप में काम करती है. उनका काम यह जांचना है कि सार्वजनिक स्थानों, इमारतों और सेवाओं का इस्तेमाल दिव्यांग लोग कितनी आसानी से कर सकते हैं और कहां सुधार की जरूरत है.

वह अब तक देशभर में 1,000 से अधिक एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कर चुकी हैं. इसके अलावा, वह हिंदुस्तान निर्वाचन आयोग की सुलभ चुनाव पहल की ब्रांड एंबेसडर भी रह चुकी हैं. इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना है.

स्पोर्ट्स के मैदान पर पदक जीतने और मैदान के बाहर सुलभता के लिए काम करने का उनका सफर उन्हें दूसरी खिलाड़ियों से अलग पहचान देता है. नागोया में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी उपलब्धियों में एक और पदक जोड़ लिया है.

क्या है F54 डिस्कस थ्रो कैटेगरी?

F54 पैरा एथलेटिक्स की बैठकर थ्रो करने वाली श्रेणी है. इसमें ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनकी शारीरिक स्थिति के कारण धड़ और निचले अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. खिलाड़ी विशेष थ्रोइंग चेयर पर बैठकर डिस्कस फेंकते हैं और मुख्य रूप से हाथों तथा शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत का इस्तेमाल करते हैं.

इस स्पर्धा में शरीर को स्थिर रखना, संतुलन बनाए रखना और सही तकनीक से ताकत लगाना महत्वपूर्ण होता है. सुर्वणा ने इसी श्रेणी में 15.66 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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