CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका जेल से बाहर आते ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर से मोर्चा खोल दिया है. सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट कर साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. बुधवार (21 अक्टूबर) की रात सौरव दास ने करीब नौ दिनों बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना पहला पोस्ट किया. उन्होंने लिखा- Gyanu has to go, यानी ज्ञानू को जाना होगा.
अभिजीत दीपके ने शेयर किया दोनों नेताओं का वीडियो
सौरव दास की पोस्ट के अलावा पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी एक वीडियो जारी किया है. इसमें सौरव दास और आशुतोष रांका हाथों में तिरंगा लिए दिखाई दे रहे हैं. दोनों हिंदुस्तान माता की जय और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हैं. वीडियो के कैप्शन में दीपके ने भी लिखा है Gyanu must go!, यानी ज्ञानू को जाना ही होगा. इस वीडियो के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसके नेताओं की गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध जारी है.
आखिर क्यों जेल भेजे गए थे दोनों नेता?
सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की घोषणा की थी. पार्टी ने बाद में कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम भी रखा था. इसके बाद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका कुछ कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे. पुलिस का आरोप है कि उन्होंने वहां लगे बैरिकेड पार किए और बिना अनुमति उस इलाके में प्रवेश किया, जहां प्रदर्शन पर रोक थी.
दोनों नेताओं ने तिरंगा दिखाते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की थी. इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. उन पर पहले दिए गए शांति बनाए रखने के मुचलके की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप भी लगा. अदालत ने उन्हें पहले पांच दिन के लिए जेल भेजा और 19 अक्टूबर को हिरासत दो दिन और बढ़ा दी.
हाईकोर्ट पहुंचे, फिर वापस लेनी पड़ी याचिका
बुधवार को दोनों नेताओं ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मामले की सुनवाई जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में कानूनी अपील का दूसरा रास्ता उपलब्ध है. जज ने दोनों नेताओं के वकील को सलाह दी कि वे पहले विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के फैसले का इंतजार करें. जरूरत पड़ने पर उसके बाद संबंधित अदालत में अपील कर सकते हैं.
50 हजार के बॉन्ड पर मिली रिहाई
हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने के बाद दोनों नेताओं का मामला दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित एसईएम अदालत में पहुंचा. यहां विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट रितु राज ने उनकी रिहाई का आदेश दिया. अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड भरने का निर्देश दिया. बॉन्ड और जमानतदारों की जांच करने के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन को रिहाई वारंट जारी किया गया. हालांकि, अदालत ने साफ किया कि मामले की जांच अभी जारी रहेगी और दोनों नेताओं को सुनवाई के दौरान उपस्थित होना होगा.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का दिया भरोसा
रिहाई से पहले सौरव दास और आशुतोष रांका ने अदालत में लिखित आश्वासन दिया कि वे कानून व्यवस्था नहीं बिगाड़ेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी रूप से दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया जाता, तब तक वहां किसी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे. दोनों ने भविष्य में होने वाले किसी भी आंदोलन को संविधान और कानून के दायरे में रखने की बात कही.
मैं, सौरव दास, यह वचन देता हूं और वादा करता हूं कि मैं शांति भंग करने का कोई भी कार्य नहीं करूंगा. इसके अलावा, मैं न्यायपालिका और उसके सभी साधनों, जिनमें माननीय एसईएम न्यायालय भी शामिल है, पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करता हूं. हम शांति, कानून व्यवस्था और जन शांति के प्रति अपने वचन और प्रतिबद्धता को दोहराते हैं और यह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि जनता मंदार को कानून के अनुसार निरस्त किए जाने तक हम वहां किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे. हम यह भी दोहराते हैं कि किया गया कोई भी विरोध प्रदर्शन संविधान की सीमाओं के भीतर ही होगा. दास और रांका के लिखित वचनपत्र
अभिजीत दीपके ने आगे की रणनीति पर क्या कहा?
इससे पहले सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा था कि सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद पार्टी के नेता दोबारा बैठक करेंगे. इसी बैठक में तय किया जाएगा कि आंदोलन को आगे किस तरह बढ़ाया जाए. फिलहाल सीजेपी ने नए आंदोलन की तारीख या स्थान तय नहीं किया है. दोनों नेताओं की रिहाई के बाद पार्टी की बैठक होने की संभावना है. हालांकि, इस बारे में कोई आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है. ऐसे में अब देखना होगा कि अदालत में दिए गए आश्वासन और कानूनी पाबंदियों के बीच सीजेपी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना अगला कदम किस तरह तय करती है.
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