रांची. चारा घोटाला मामले में 25 वर्षों से फरार आरोपी सत्येंद्र कुमार को सीबीआइ ने गिरफ्तार कर लिया है. गुरुवार की देर रात उत्तर प्रदेश के लखनऊ रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार सत्येंद्र को पकड़ा गया. आरोपी के खिलाफ अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था. सीबीआइ अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ला रही है, जहां संबंधित विशेष अदालत में पेश किया जायेगा.
गुप्त सूचना पर लखनऊ स्टेशन पर बिछाया जाल
सीबीआइ को सूचना मिली थी कि सत्येंद्र कुमार मध्यप्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार होकर लखनऊ जा रहा है. इसके बाद जांच एजेंसी की टीम लखनऊ रेलवे स्टेशन पर तैनात हो गयी. ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही अधिकारियों ने बोगी में आरोपी की पहचान की और उसे हिरासत में ले लिया. आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया.
10 करोड़ रुपये से अधिक की दवा आपूर्ति का आरोप
सत्येंद्र कुमार पर चारा घोटाले के दौरान प्रशासनी खजाने से कथित तौर पर फर्जी तरीके से राशि निकालने का आरोप है. बताया गया है कि उसने अपने सहयोगी दिनेश राय के साथ मिलकर पशुपालन विभाग को बड़े पैमाने पर दवाइयों की आपूर्ति की थी.
सत्येंद्र का परिवार रांची में कचहरी के पास रहता था. सत्येंद्र और दिनेश राय ने रांची के बीआइटी मेसरा से बी-फार्मा की पढ़ाई की थी. इसके बाद दोनों ने दवा निर्माण कंपनी बनायी. जांच के अनुसार, इस फर्म के माध्यम से 10 करोड़ रुपये से अधिक की दवाओं की आपूर्ति दिखाकर घोटाले की रकम हड़पने का आरोप है.
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2001 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद से था फरार
इस मामले में दिनेश राय पहले ही गिरफ्तार हो चुका है और अदालत उसे सजा भी सुना चुकी है. वहीं, सत्येंद्र कुमार वर्ष 2001 में सीबीआइ की ओर से आरोप पत्र दाखिल किये जाने के बाद से फरार था. गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पटना स्थित अपना आवास भी छोड़ दिया था.
फरारी के दौरान उसके नेपाल में दवा कंपनी शुरू करने की सूचना भी जांच एजेंसी को मिली थी. उसके लगातार नेपाल में रहने की जानकारी थी. अदालत से स्थायी गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद से सीबीआइ उसकी तलाश कर रही थी.
क्या है चारा घोटाला?
चारा घोटाला एकीकृत बिहार के समय पशुपालन विभाग में हुआ था. वर्ष 1996 में सीबीआइ ने इसकी औपचारिक जांच शुरू की थी. इस घोटाले से जुड़े विभिन्न मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद समेत कई राजनेताओं, अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं को सजा सुनायी जा चुकी है.
सीबीआइ को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी मध्यप्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार होकर लखनऊ आ रहा है. इसके बाद टीम ने लखनऊ रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ा दी. ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही अधिकारियों ने उसकी पहचान कर उसे पकड़ लिया. गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने पटना स्थित अपना घर छोड़ दिया था. फरारी के दौरान नेपाल में दवा कंपनी शुरू करने और वहीं रहने की सूचना भी जांच एजेंसी को मिली थी. वर्ष 2001 में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से उसकी तलाश जारी थी. अब गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाया जा रहा है.
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