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Explained: 2030 तक भारत से खत्म हो जाएगी बेरोजगारी, कितना हकीकत-कितना फसाना है यह दावा?

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में हिंदुस्तान की कुल बेरोजगारी दर 5% थी. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा क्रमशः 4.2% और 6.9% था. इससे अलग, इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन (IDA) ने एक बयान में कहा कि हिंदुस्तान के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में 2030 तक 35 करोड़ से अधिक नए रोजगार पैदा हो सकते हैं और ऐसा होने पर 2030 तक देश से बेरोजगारी खत्म हो जाएगी!

हालांकि, अहम सवाल यह है कि 35 करोड़ नौकरियां पैदा करने का यह अनुमान कितना व्यावहारिक है? अगर ऐसा होता है तो यह कैसे होगा? और क्या इससे सच में देश से बेरोजगारी खत्म हो जाएगी? इसे आसान भाषा में 3 सवालों के जवाब से समझते हैं.

पहला सवाल: 35 करोड़ नौकरियां आएगा कहां से?

23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन (IDA) ने अपने बयान में अनुमान जताया कि हिंदुस्तान के मैन्युफैक्चरिंग यानी विनिर्माण और सर्विस सेक्टर में 2030 तक 35 करोड़ से ज्यादा रोजगार पैदा हो सकते हैं.

दिसंबर 2025 में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) ने बताया था कि देश में रोजगार बढ़ाने के लिए लोगों को काम से जुड़ी बेहतर ट्रेनिंग देने, छोटे कारोबारों को आगे बढ़ाने और मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जहां ज्यादा लोगों को नौकरी मिल सके.

NCAER के मुताबिक, अगर कामगारों को औपचारिक तरीके से कौशल प्रशिक्षण देने का दायरा 9 प्रतिशत अंक बढ़ाया जाए, तो 2030 तक करीब 93 लाख अतिरिक्त नौकरियां पैदा हो सकती हैं. आसान भाषा में कहें तो, हर 100 कामगारों में कौशल प्रशिक्षण पाने वालों की हिस्सेदारी में 9 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी होने पर इतनी नौकरियां पैदा होने की संभावना है.

जून 2025 में द इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में NCAER की स्टडी के हवाले से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में 2030 तक 35 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक इसमें सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 28 करोड़ बताई गई थी और बाकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में.

2030 तक हिंदुस्तान से खत्म हो जाएगी बेरोजगारी का मतलब क्या है

35 करोड़ रोजगार अवसर पैदा होने का दावा सही साबित भी हो जाए, तब भी यह देखना जरूरी होगा कि उनमें कितनी वास्तव में नई नौकरियां हैं, कितने लोग काम की तलाश में हैं और पैदा होने वाले रोजगार उनकी योग्यता, स्थान और जरूरतों के अनुरूप हैं या नहीं. यानी रोजगार के अवसर बढ़ना और बेरोजगारी पूरी तरह खत्म होना दो अलग बातें हैं. कुल मिलाकर, हिंदुस्तान में मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की संभावनाएं जरूर हैं. लेकिन 2030 तक 35 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान अपने आप में बेरोजगारी खत्म होने का प्रमाण नहीं है. इसके लिए यह देखना होगा कि वास्तव में कितनी नई नौकरियां पैदा होती हैं, कितने नए लोग श्रम बाजार में आते हैं और इन नौकरियों में कितने लोगों को उनकी योग्यता के अनुरूप नियमित तथा पर्याप्त आय वाला काम मिलता है. फिलहाल, 2030 तक बेरोजगारी खत्म होने का दावा एक संभावना ही है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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