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Jharkhand High Court: कोर्ट जाने पर कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकते, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी कर्मचारी को मात्र इस कारण से सेवा से पृथक करना कि उसने अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, पूर्णतः मनमाना, दुर्भावनापूर्ण एवं विधि-विरुद्ध है. हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने रिट याचिका धरो उरांव एवं अन्य की ओर से दायर याचिका में यह महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए स्पष्ट किया कि “किसी नागरिक को अपने संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु न्यायालय की शरण में जाने के कारण किसी भी प्रकार के प्रतिकूल परिणाम भुगतने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. न्यायालय जाने का अधिकार स्वयं में एक संवैधानिक अधिकार है तथा इस अधिकार के प्रयोग के प्रतिशोध में की गई कोई भी कार्यवाही विधि के शासन की जड़ पर प्रहार करती है.” क्या था मामला? याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत में पक्ष रखा. याचिकाकर्तागण को वर्ष 2004-2005 से स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, राज्य प्रशासन की अभियंत्रण कोषांग में लिपिक, टाइपिस्ट, चालक, पंप ऑपरेटर आदि पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया था. वर्ष 2016 में विभाग के विलय के पश्चात इन कर्मचारियों को जनवरी 2017 तक नियमित रूप से कार्य करने दिया गया, किंतु तत्पश्चात बिना किसी औपचारिक आदेश अथवा कारण बताओ नोटिस के उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया. पूर्व में समन्वय पीठ द्वारा चार फरवरी 2017 को याचिकाकर्ताओं की सेवा नियमित करने का आदेश पारित किया गया था, जिसे राज्य द्वारा अपील याचिका दायर कर चुनौती दी गयी, परंतु वह भी 25,000 रुपये के हर्जाने के साथ खारिज कर दी गई. इसके बावजूद विभाग द्वारा दिनांक 14 अगस्त 2024 के आदेश से याचिकाकर्ताओं के सेवा नियमितीकरण के दावे को अस्वीकृत कर दिया गया. कोर्ट का महत्वपूर्ण अभिनिर्धारण जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता 10 वर्षों से अधिक समय तक बिना किसी अवकाश अथवा शिकायत के स्वीकृत पदों पर कार्यरत रहे तथा उनकी नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित थी. पीठ ने राज्य के इस तर्क को अस्वीकार कर दिया कि याचिकाकर्ता स्वीकृत पदों पर नियुक्त नहीं थे. सुप्रीम कोर्ट के जग्गो बनाम हिंदुस्तान संघ जैसे नजीरी निर्णयों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि जहां कार्य की प्रकृति सतत एवं संस्थान के लिए अपरिहार्य हो, वहां मात्र “संविदा” अथवा “अस्थायी” के नामकरण मात्र से नियुक्ति को अनियमित घोषित नहीं किया जा सकता. कोर्ट का निष्कर्ष एवं आदेश जस्टिस रोशन ने यह भी टिप्पणी की कि “राज्य एवं उसकी अभिकरणों द्वारा वादियों को उनके संवैधानिक उपचारों के प्रयोग मात्र के लिए दंडित करने की प्रथा तत्काल समाप्त होनी चाहिए.” पीठ ने दिनांक 14 अगस्त 2024 के प्रशासन के तर्कयुक्त आदेशों को रद्द कर दिया. राज्य प्रशासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को समस्त परिणामी लाभों के साथ छह सप्ताह के भीतर सेवा में पुनर्स्थापित कर नियमितीकरण का औपचारिक आदेश जारी किया जाये. ये भी पढ़ें: झारखंड कांग्रेस में खींचतान: केशव महतो ने अभिलाष साहू को बनाया उपाध्यक्ष, प्रभारी के. राजू ने कहा- पहले जांच, फिर पदभार The post Jharkhand High Court: कोर्ट जाने पर कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकते, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला appeared first on Naya Vichar.

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नीरज कुमार को अनंत सिंह की खुली चुनौती, बोले- बजरंगबली मंदिर के सामने आमने-सामने होंगे, AK-47 मामले पर भी उठाए सवाल

Anant Singh Vs Neeraj Kumar: पटना स्नातक निर्वाचन सीट को लेकर जेडीयू के भीतर सियासी खींचतान बढ़ती जा रही है. मोकामा विधायक अनंत सिंह और जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार के बीच जुबानी जंग अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई है. नीरज कुमार के बयान पर अनंत सिंह ने फिर पलटवार किया है. उन्होंने नीरज कुमार को बजरंगबली मंदिर के सामने आमने-सामने आने की चुनौती दी है. अनंत सिंह ने कहा कि अगर नीरज कुमार में हिम्मत है, तो वह बजरंगबली के मंदिर के सामने आएं. दोनों वहीं आमने-सामने अपनी बात रखेंगे. उन्होंने कहा कि वहां जनता खुद दोनों की बातें सुनेगी और सब कुछ साफ हो जाएगा. ‘आज से नहीं, 15-18 साल से मेरे खिलाफ बोल रहे’ अनंत सिंह ने दावा किया कि नीरज कुमार आज से उनके खिलाफ बयान नहीं दे रहे हैं. उनके मुताबिक, जब नीरज कुमार पहली बार विधान पार्षद बने थे, तभी से वह उनके खिलाफ बोलते और उन्हें चुनौती देते रहे हैं. उन्होंने पत्रकारों से नीरज कुमार के पुराने वीडियो देखने की बात कही. अनंत सिंह ने कहा कि पुराने बयानों को देखने से दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद की पूरी कहानी सामने आ जाएगी. ‘बजरंगबली के सामने जो कहना है, कहें’ अनंत सिंह ने कहा कि नीरज कुमार बजरंगबली के सामने खड़े होकर जो कहना चाहते हैं, कहें. उन्होंने दावा किया कि अगर नीरज कुमार वहां यह कह दें कि अनंत सिंह ने कभी उनकी मदद नहीं की, तो वह अपनी बात वापस ले लेंगे. अनंत सिंह ने यह भी कहा कि वह मंदिर के सामने होने वाली बातचीत को जनता के सामने रखने के लिए तैयार हैं. उन्होंने इसे अपने लिए अदालत जैसा बताया. AK-47 मामले पर भी लगाए गंभीर आरोप जुबानी जंग के बीच अनंत सिंह ने पुराने AK-47 मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर पर AK-47 रखवाकर उन्हें जेल भेजने की साजिश की गई थी. अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर इस मामले में भूमिका होने का आरोप लगाया और नार्को टेस्ट की मांग दोहराई. इन आरोपों की पुष्टि के तौर पर कोई नया तथ्य अनंत सिंह ने पेश नहीं किया है. इस मामले पर नीरज कुमार पहले ही पलटवार कर चुके हैं और सबूत होने पर कोर्ट जाने की चुनौती दे चुके हैं. ‘नीरज की जीत में कई बार मदद की’ अनंत सिंह ने नीरज कुमार के नेतृत्वक सफर को लेकर भी दावा किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार नीरज कुमार की चुनावी जीत में मदद की है. अनंत सिंह के मुताबिक, नीरज कुमार को पहली बार चुनाव लड़ने और टिकट दिलाने में भी उन्होंने मदद की थी. उन्होंने कहा कि अगर नीरज कुमार को लगता है कि उन्होंने उनकी कोई मदद नहीं की, तो वह बजरंगबली मंदिर के सामने आकर यह बात कह दें. अनुज सिंह के समर्थन का किया ऐलान पटना स्नातक निर्वाचन सीट को लेकर अनंत सिंह पहले ही नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर सामने आ चुके हैं. उन्होंने अनुज सिंह को अपना उम्मीदवार बताते हुए उनके समर्थन का ऐलान किया है. टिकट के सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि पार्टी टिकट दे तो ठीक है. टिकट नहीं मिलता है, तो निर्दलीय चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला है. पुराने नेतृत्वक विवाद भी किए याद अनंत सिंह ने जेडीयू से अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं. इसके बावजूद नीरज कुमार ने कई बार उनका विरोध किया. उन्होंने ललन सिंह को लेकर भी आरोप लगाए. अनंत सिंह ने दावा किया कि नीरज कुमार ने ललन सिंह के खिलाफ भी विरोध की नेतृत्व की है. इन आरोपों पर नीरज कुमार की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें नीतीश कुमार के पुराने कार्यक्रम का भी जिक्र अनंत सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मोकामा दौरे से जुड़ी एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि उस समय विरोध के दौरान मंच को नुकसान पहुंचाया गया था. अनंत सिंह के मुताबिक, नीरज कुमार वहां से बेगूसराय चले गए थे और दूसरे पक्ष के लिए वोट मांग रहे थे. इस दावे पर भी नीरज कुमार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. पटना स्नातक सीट ने बढ़ाई सियासी गर्मी दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन सीट के चुनाव को लेकर जेडीयू के भीतर खींचतान पहले से चर्चा में है. नीरज कुमार इस सीट से चुनावी मैदान में हैं, जबकि अनंत सिंह उनके समर्थन के बजाय अनुज सिंह के साथ खड़े हैं. दोनों नेताओं के बीच पहले भी बयानबाजी हो चुकी है. Also Read: बच्चों के लिए बिहार पुलिस की नई व्यवस्था, 2 अक्टूबर से सभी थानों में शुरू होगी यह सुविधा, जानें क्या होगा फायदा The post नीरज कुमार को अनंत सिंह की खुली चुनौती, बोले- बजरंगबली मंदिर के सामने आमने-सामने होंगे, AK-47 मामले पर भी उठाए सवाल appeared first on Naya Vichar.

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नीम और करी पत्ता मिलाकर बनाएं ये होममेड पाउडर, बालों से लेकर स्किन तक आएगा काम

Curry Patta Powder For Hair: करी पत्ता सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के काम नहीं आता. नीम का इस्तेमाल भी लंबे समय से स्किन और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है. अगर आपके घर में करी पत्ता और नीम आसानी से मिल जाता है, तो आप इन दोनों का पाउडर घर पर ही तैयार कर सकते हैं. इसे बनाना भी काफी आसान है और सही तरह से रखने पर कुछ समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. आइए जानते हैं इसे बनाने का आसान तरीका. करी पत्ता और नीम पाउडर बनाने के लिए चाहिए ये चीजें करी पत्ते और नीम से तैयार पाउडर की सांकेतिक तस्वीर, Pc -AI इस पाउडर को बनाने के लिए आपको सिर्फ दो चीजों की जरूरत होगी. 2 कप साफ नीम की पत्तियां 2 कप ताजा करी पत्ता पत्तियां जितनी साफ और अच्छी होंगी, पाउडर भी उतना ही अच्छा बनेगा. सबसे पहले पत्तियों को अच्छी तरह साफ करें सबसे पहले नीम और करी पत्ते को डंठल से अलग कर लें. इसके बाद दोनों को 2-3 बार साफ पानी से धो लें. इससे पत्तियों पर लगी धूल और मिट्टी निकल जाएगी. धोने के बाद इन्हें किसी साफ कपड़े या बड़ी प्लेट पर फैला दें. अब इन्हें ऐसी जगह रखें जहां हवा आती-जाती रहे. पत्तियों को 1-2 दिन तक अच्छी तरह सूखने दें. पत्तियों को पूरी तरह सुखाना है जरूरी पत्तियों में बिल्कुल भी नमी नहीं रहनी चाहिए. अगर पत्तियां सूखने के बाद भी थोड़ी नरम लग रही हैं, तो उन्हें कुछ देर और सूखने दें. जल्दी में तेज धूप में रखने के बजाय इन्हें हल्की छांव और हवा वाली जगह पर सुखाना आसान तरीका है. इससे पत्तियां धीरे-धीरे अच्छी तरह सूख जाएंगी. अब बनाएं दोनों का बारीक पाउडर जब नीम और करी पत्ते पूरी तरह सूखकर कुरकुरे हो जाएं, तो इन्हें मिक्सी के सूखे जार में डालें. अब दोनों को बारीक पीस लें. पाउडर को और मुलायम बनाने के लिए इसे एक बार छलनी से छान सकते हैं. जो मोटा हिस्सा बच जाए, उसे दोबारा पीस लें. पाउडर को ऐसे रखें स्टोर तैयार पाउडर को किसी साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें. डिब्बे में पानी या नमी बिल्कुल नहीं जानी चाहिए. इसे निकालने के लिए हमेशा सूखी चम्मच का इस्तेमाल करें. अगर पाउडर में नमी, बदबू या रंग में कोई अजीब बदलाव नजर आए, तो इसे इस्तेमाल न करें. फेस पैक में ऐसे कर सकते हैं इस्तेमाल अगर आप इसे चेहरे पर लगाना चाहते हैं, तो 1 चम्मच नीम-करी पत्ता पाउडर में थोड़ा दही या गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं. चाहें तो इसमें एक चुटकी हल्दी भी डाल सकते हैं. इस पेस्ट को चेहरे पर हल्के हाथ से लगाएं और करीब 10-15 मिनट बाद पानी से धो लें. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ा सा पैक हाथ की त्वचा पर लगाकर देख लें. जलन या खुजली हो तो चेहरे पर इसका इस्तेमाल न करें. बालों के लिए ऐसे बनाएं हेयर पैक बालों के लिए 2 चम्मच इस पाउडर में थोड़ा एलोवेरा जेल या नारियल तेल मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं. इसे बालों की जड़ों और स्कैल्प पर लगाएं. करीब 20-30 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें. अगर स्कैल्प पर पहले से खुजली, घाव या ज्यादा जलन है, तो इसे लगाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर है. यह भी पढ़ें: हर समय चेहरा दिखता है थका हुआ? ये आसान होममेड फेस मिस्ट करें ट्राई The post नीम और करी पत्ता मिलाकर बनाएं ये होममेड पाउडर, बालों से लेकर स्किन तक आएगा काम appeared first on Naya Vichar.

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PM Modi ने लॉन्च किया NGT Mobile App, अब मोबाइल पर मिलेगी पर्यावरण से जुड़े केस की हर जरूरी जानकारी

NGT Mobile App Launch : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) Mobile App लॉन्च किया. यह सम्मेलन 19 और 20 सितंबर को NGT की ओर से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर हिंदुस्तान समेत 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं. क्या है NGT Mobile App? NGT Mobile App नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से जुड़े मामलों की जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म है. ऐप के जरिए यूजर्स केस स्टेटस, कॉज लिस्ट और मामलों से जुड़े ऑर्डर/जजमेंट देख सकते हैं. यानी NGT में चल रहे किसी मामले की स्थिति या उसके आदेश की जानकारी के लिए बार-बार वेबसाइट देखने की जरूरत कम होगी. ऐप को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने विकसित किया है. पर्यावरण न्याय व्यवस्था में डिजिटल कनेक्ट NGT पर्यावरण से जुड़े मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे के लिए महत्वपूर्ण संस्था है. ऐसे में मोबाइल ऐप के जरिए मामलों और आदेशों तक आसान पहुंच से न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. NGT के इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य केस से जुड़ी जरूरी जानकारी को मोबाइल के जरिए ज्यादा आसानी से उपलब्ध कराना है. ये भी पढ़ें: 408 साल पुराना मथुरा विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट में टली सुनवाई, समझें कैसे शुरू हुआ कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह का मसला The post PM Modi ने लॉन्च किया NGT Mobile App, अब मोबाइल पर मिलेगी पर्यावरण से जुड़े केस की हर जरूरी जानकारी appeared first on Naya Vichar.

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Prabhat Khabar Exclusive: ‘तालिबान को जल्द सैन्य झटके लगेंगे’, NRF कमांडर रूबिन सत्तार का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

पिछले कुछ महीनों से उत्तरी अफगानिस्तान, खासकर बदख्शां और पंजशीर प्रांतों में तालिबान बलों पर तालिबान विरोधी गुटों, जैसे नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF), अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट (AFF) और हाल ही में गठित सिपाह-ए-मिहान—की ओर से लगभग रोजाना हमले किए जाने की समाचारें सामने आती रही हैं. तालिबान ने हाल के दिनों में इन अशांत इलाकों में अपनी तैनाती बढ़ाई है और प्रतिरोधी कमांडरों का पता लगाने के लिए गुप्त अभियान भी शुरू किए हैं. इन्हीं अभियानों के दौरान NRF के ऑपरेशंस कमांडर हसीब पंजशिरी, जिन्हें कोये मरकज के नाम से भी जाना जाता था, की सलांग घाटी में तालिबान के विशेष बलों द्वारा किए गए घात में मौत हो गई. हसीब पंजशिरी के पूर्व डिप्टी कमांडर रूबिन सत्तार से अफगानिस्तान-पाकिस्तान मामलों के भू-नेतृत्वक विश्लेषक मनीष राय ने बातचीत की. सत्तार वर्तमान में नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) की स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट, यूनिट 01 के कमांडर हैं. Manish Rai interview Rubin Sattar of NRF, Afghanistan Read more: PM Modi @ 76: पीएम मोदी के दौर में कैसे बदली हिंदुस्तान की सभ्यतागत पहचान? काशी से ‘हिंदुस्तान’ तक समझिए कहानी The post Naya Vichar Exclusive: ‘तालिबान को जल्द सैन्य झटके लगेंगे’, NRF कमांडर रूबिन सत्तार का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू appeared first on Naya Vichar.

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DUSU Election Result 2026: तीसरे राउंड के बाद बदली तस्वीर, अध्यक्ष पद पर ABVP को पछाड़ NSUI आगे, वाइस प्रेसिडेंट में निर्दलीय का दबदबा

DUSU Election Result 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव के लिए वोटों की गिनती चल रही है. तीसरे राउंड की गिनती के बाद तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है. NSUI के विजय शंकर मीणा ने AVBP के यश डबास को पीछे छोड़ दिया है और 400 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं. जबकि वाइस प्रेसिडेंट के पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ABVP के ईशु मौर्य को पीछे छोड़ 2000 वोटों से आगे चल रहे हैं. पहले राउंड में ABVP ने प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी पद पर बनाई थी बढ़त गिनती का पहला राउंड पूरा हो चुका है, जिसमें ABVP दो अहम पदों – प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी – पर आगे है. जबकि वाइस-प्रेसिडेंट और जॉइंट सेक्रेटरी के पदों पर निर्दलीय उम्मीदवार आगे चल रहे हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU Election 2026) के लिए वोटों की गिनती नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में चल रही है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के नतीजे आज घोषित किए जाने की उम्मीद है. 20 उम्मीदवार मैदान में DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. प्रमुख छात्र संगठनों में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन शामिल हैं. AVBP के प्रत्याशी अध्यक्ष पद – यश डबास उपाध्यक्ष पद – इशू मौर्य सचिव पद – रिया छावड़ी संयुक्त सचिव – लक्ष्य राज सिंह NSUI के प्रत्याशी अध्यक्ष- विजय शंकर मीणा उपाध्यक्ष- वीर चतरथ सचिव- नम्रता चौधरी संयुक्त सचिव- गोपाल चौधरी AISA-SFI के संयुक्त उम्मीदवार अध्यक्ष- अनन्या रतूड़ी (आइसा) उपाध्यक्ष- अक्षत शिखर (आइसा) सचिव- स्टैनजिन डेस्क्योंग (SFI) संयुक्त सचिव- बी पारिजात (SFI) 40.46 प्रतिशत हुआ था मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. 2025 में मतदान प्रतिशत 39.5 रहा था. इस बार मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी के 52 केंद्रों पर दो चरणों में कराया गया. सुरक्षा के कड़े इंतजाम DUSU के मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ राजेश सिंह कहते हैं, “वोटों की गिनती के लिए हमने जो इंतजाम किए हैं, वे पूरी तरह से पुख्ता हैं. दिल्ली पुलिस हमारे साथ मिलकर काम कर रही है और उन्होंने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. ये भी पढ़ें: DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक The post DUSU Election Result 2026: तीसरे राउंड के बाद बदली तस्वीर, अध्यक्ष पद पर ABVP को पछाड़ NSUI आगे, वाइस प्रेसिडेंट में निर्दलीय का दबदबा appeared first on Naya Vichar.

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त्योहारों से ठीक पहले ₹8 महंगा हो सकता है दूध, कर्नाटक सरकार को 3 दिन का अल्टीमेटम

Milk Price Hike: कर्नाटक में त्योहारों से पहले आम लोगों पर महंगाई का एक और असर पड़ सकता है. राज्य के दूध उत्पादक संघों ने दूध की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की है. यह मांग बेंगलुरु प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाई गई. उत्पादकों का कहना है कि पशु चारा, कच्चे माल, ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत के कारण डेयरी किसानों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है. दूध उत्पादकों ने राज्य प्रशासन को इस मामले में 3 दिन का समय दिया है. उनका कहना है कि अगर इस दौरान कैबिनेट बैठक बुलाकर उनकी मांग पर फैसला नहीं लिया गया, तो वे विरोध तेज करते हुए विधान सौध तक मार्च निकाल सकते हैं. दूध की कीमत बढ़ाने की मांग क्यों उठी? कर्नाटक मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक, किसानों की लागत बढ़ रही है, जबकि दूध के लिए उन्हें मिलने वाली कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है. संघों ने दूध की खरीद कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ प्रशासन से मिलने वाले इंसेंटिव को भी बढ़ाने की मांग की है. फिलहाल प्रशासन की ओर से दूध उत्पादकों को 5 रुपये प्रति लीटर इंसेंटिव दिया जाता है. संघ इसे बढ़ाकर 8 रुपये प्रति लीटर करने की मांग कर रहे हैं. उत्पादकों का दावा है कि बामुल, चामुल, मांड्या मिल्क और तुमकुर समेत राज्य के कई बड़े दूध संघ इस मांग के समर्थन में हैं. चारा और पशु आहार की बढ़ती लागत का कितना असर? डेयरी संघों ने दूध उत्पादन की लागत बढ़ने के पीछे कई वजहें बताई हैं. उनके मुताबिक, कम बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण हरे चारे की कमी हुई है. इसके अलावा पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले मक्का, चोकर और शीरे जैसे कच्चे माल की कीमत करीब 25% तक बढ़ी है. बछड़ों के बिछावन के सामान के साथ-साथ ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ने की बात कही गई है. उत्पादकों का कहना है कि इन बढ़ती लागतों के कारण किसानों के लिए मवेशियों को पालना मुश्किल होता जा रहा है. क्या कर्नाटक में दूध का उत्पादन भी घटा है? दूध उत्पादक संघों ने उत्पादन में गिरावट का भी मुद्दा उठाया है. उनके मुताबिक, कर्नाटक में पहले रोजाना करीब 1.11 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता था, जो अब घटकर करीब 1.05 करोड़ से 1.06 करोड़ लीटर प्रतिदिन रह गया है. बामुल मिल्क यूनियन के प्रेसिडेंट नागराज के मुताबिक, डेयरी संघ पिछले 8 महीनों से राज्य प्रशासन से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है. उनका कहना है कि लागत बढ़ने और उत्पादन घटने का असर आगे चलकर दूध की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है. अगर 8 रुपये बढ़े तो आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? अगर प्रशासन इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो कर्नाटक में दूध के दाम बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर पड़ेगा. खासकर नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान इसका असर केवल पैकेट वाले दूध तक सीमित नहीं रह सकता. दूध से बनने वाली मिठाई, खोया और दूसरे डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है. फिलहाल राज्य प्रशासन की ओर से इस मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है. कर्नाटक के दूध उत्पादक संघों की नजर अब अगले तीन दिनों में प्रशासन की प्रतिक्रिया पर है. ये भी पढ़ें: मुर्गी पालन शुरू करना है? प्रशासन देगी 25 लाख तक की सब्सिडी, जानें आवेदन का पूरा तरीका The post त्योहारों से ठीक पहले ₹8 महंगा हो सकता है दूध, कर्नाटक प्रशासन को 3 दिन का अल्टीमेटम appeared first on Naya Vichar.

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408 साल पुराना मथुरा विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट में टली सुनवाई, समझें कैसे शुरू हुआ कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह का मसला

Krishna Janmabhoomi Dispute : कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद पर सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्थगित कर दी गई है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी. विवाद से जुड़े कई मुकदमें दर्ज हैं जिनमें से किसे मुख्य मामला माना जाए, इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट फंस गई थी. अगस्त में ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से संकेत दिया गया था कि इस उलझन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ही सुलझाएगी. ये तो वर्तमान में हुए डेवलपमेंट हैं, आइए जान लें कि राम जन्मभूमि विवाद सुलझने के बाद तेजी से सुर्खियों में आया कृष्ण जन्मभूमि विवाद क्या है. क्या है कृष्ण जन्मभूमि विवाद? मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि विवाद मुख्य रूप से 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर है. जिस पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर (करीब 11 एकड़ जमीन पर) और शाही ईदगाह मस्जिद दोनों बने हुए हैं. हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1670 में यहां स्थित प्राचीन केशवदेव मंदिर को तुड़वाकर उसके ऊपर मस्जिद का निर्माण करवाया था. हिंदू पक्ष का मानना है कि मस्जिद का मुख्य हिस्सा (गर्भ गृह) वही सटीक स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. हिंदू पक्ष का दावा हिंदू पक्ष का कहना है कि विवादित जमीन पर पूरा हक हिंदुओं का है. उनका कहना है कि मस्जिद की दीवारों और खंभों पर आज भी हिंदू धार्मिक चिन्ह, जैसे कमल के फूल और शेषनाग की आकृतियां मौजूद हैं. उनकी मांग है कि मस्जिद को वहां से हटाकर जमीन मंदिर ट्रस्ट को सौंपी जाए. मुस्लिम पक्ष का तर्क मुस्लिम पक्ष यानी शाही ईदगाह कमेटी का कहना है कि यह मस्जिद सदियों पुरानी है और 1968 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हो चुका था. जिसके तहत मस्जिद की जगह पर उनका अधिकार माना गया था. हाईकोर्ट के 2025 के आदेश को दूसरे हिंदू पक्ष ने दी थी चुनौती यह पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के 18 जुलाई, 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एक वादी की अर्जी मंजूर करते हुए उसके मुकदमे को अन्य सभी मुकदमों के लिए ‘प्रतिनिधि मुकदमा’ (Representative Action) मान लिया गया था और तय किया गया था कि इस पर फैसला पहले होगा. हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ एक अन्य हिंदू वादी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ता की दलील है कि जब मथुरा जिला अदालत से सभी मुकदमे हाईकोर्ट ट्रांसफर हुए थे, तब उनका मुकदमा मुख्य था, ऐसे में बिना बाकी पक्षों को सुने किसी दूसरे वादी को सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधि दर्जा देना पूरी तरह गलत है. शाही ईदगाह परिसर को लेकर लंबित हैं 20 से अधिक मुकदमे मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के मालिकाना हक को लेकर 20 से ज्यादा दीवानी मुकदमे चल रहे हैं. हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने जन्मभूमि पर बने प्राचीन मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनवाई थी, जिसके निशान आज भी परिसर में मौजूद हैं. शुरुआत में ये सभी मामले मथुरा की निचली अदालत में दाखिल हुए थे, जिन्हें बाद में हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी मस्जिद कमेटी और हिंदू पक्षों की कई अर्जियां लंबित हैं, जिनमें से एक याचिका पर शीर्ष अदालत ने जनवरी 2024 में विवादित परिसर के कोर्ट कमिश्नर सर्वे कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. समझिए विवाद का इतिहास और कानूनी मोड़ श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ और शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के बीच 1968 में एक समझौता हुआ था, जिसमें मस्जिद के वजूद को स्वीकारा गया था. हालांकि मौजूदा याचिकाओं में हिंदू पक्ष इस समझौते को अवैध और धोखाधड़ी बताकर खारिज करने की मांग कर रहा है. इसके बाद साल 1991 में प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट लाया जाता है. मुस्लिम पक्ष इस कानून का हवाला देते हैं. जिसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस रूप में था, उसे बदला नहीं जा सकता. वहीं हिंदू पक्ष का तर्क है कि यह कानून इस मामले पर लागू नहीं होता है क्योंकि जमीन के मालिकाना हक पर विवाद बहुत पहले से चलता आ रहा है. 1618 या 1670 कब से हुई विवाद की शुरुआत ओरछा के राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने 1618 में भव्य केशवदेव मंदिर का निर्माण कराया था. जिसकी भव्यता को देखने दूर-दूर से लोग आते थे. जहांगीर और बाद के मुगल शासकों को भी केशवदेव मंदिर का इतनी ऊंचाई पर और भव्य निर्माण किया जाना पसंद नहीं आया. फिर बाद में 1670 में जाकर मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तुड़वा दिया था. जिसका जिक्र शाही इतिहासकार साकी मुस्तैद खान की पुस्तक मासिर-ए-आलमगीरी में मिलता है. 1618 से सुलगता आ रहा विवाद 408 साल पुराना हो चुका है. हालांकि 1670 के दशक में मंदिर गिराए जाने के बाद खून-खराबे का जिक्र इतिहास में मिलता है, लेकिन अयोध्या में 1992 के घटनाक्रम जैसी कोई भी हिंसक घटना या ढांचा गिराने जैसी स्थिति मथुरा में नहीं देखी गई. दोनों पक्षों के श्रद्धालु और नमाजी अपने-अपने निर्धारित हिस्सों में बिना किसी टकराव के आते-जाते हैं. ये भी पढ़ें: मध्य प्रदेश का मौसम: 19 सितंबर को MP में फिर बरसेंगे बादल, भोपाल-इंदौर समेत कई इलाकों में बारिश के आसार The post 408 साल पुराना मथुरा विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट में टली सुनवाई, समझें कैसे शुरू हुआ कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह का मसला appeared first on Naya Vichar.

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DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU Election 2026) के लिए वोटों की गिनती शनिवार को शुरू हो गई है. नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में मतगणना चल रही है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के नतीजे आज घोषित किए जाने की उम्मीद है. दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. 2025 में मतदान प्रतिशत 39.5 रहा था. इस बार मतदान दिल्ली यूनिवर्सिटी के 52 केंद्रों पर दो चरणों में कराया गया. 20 उम्मीदवार मैदान में DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. प्रमुख छात्र संगठनों में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन शामिल हैं. अध्यक्ष पद पर ABVP ने यश डबास और NSUI ने विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया था. उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP की ओर से इशू मौर्य, जबकि NSUI की ओर से वीर छत्रथ मैदान में थे. ABVP ने 4-0 से जीत का किया दावा ABVP की DUSU वाइस प्रेसिडेंट पद की उम्मीदवार इशू मौर्य ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “हमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों पर भरोसा है. हमें पूरा यकीन है कि अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) 4-0 से जीत हासिल करेगी. अगर तुलना करें, तो इस बार वोटिंग पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हुई है… उन्हें ABVP के हर उम्मीदवार और खुद संगठन पर भरोसा है. इसीलिए मुझे पूरा यकीन है कि इस बार ABVP निर्णायक बहुमत से जीतेगी.” 1,000 EVM की हुई थी व्यवस्था चुनाव के लिए कुल 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की व्यवस्था की गई थी. इनमें से 960 मशीनों का इस्तेमाल मतदान के लिए किया गया, जबकि 40 को रिजर्व में रखा गया था. पहले चरण में सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक मतदान हुआ. शाम के छात्रों के लिए दूसरे चरण में दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक वोट डाले गए. कॉलेज चुनावों में ABVP के जीत के दावे केंद्रीय नतीजों से पहले ABVP ने कई कॉलेजों में अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा किया है. संगठन के मुताबिक, अदिति महाविद्यालय, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग), डॉ बीआर आंबेडकर कॉलेज, हिंदुस्तानी कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में उसके उम्मीदवारों ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है. ABVP के अनुसार, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग) में उसके पैनल ने 6-0 से जीत दर्ज की। हिंदुस्तानी कॉलेज में सभी आठ और शिवाजी कॉलेज में सभी छह पदों पर उसके उम्मीदवार विजयी रहे. हालांकि, ये दावे संगठन की ओर से जारी जानकारी पर आधारित हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर लगाई रोक DUSU चुनाव के नतीजों से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जीत के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी थी. यह रोक सड़कों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी कैंपस और हॉस्टल में भी लागू होगी. कोर्ट ने सभी छात्र संगठनों और चुनाव लड़ रहे 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर चुनाव आचार नियमों के कथित उल्लंघन पर जवाब भी मांगा है. अदालत ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली यूनिवर्सिटी को Lyngdoh Committee की सिफारिशों और पहले के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है. ये भी पढ़ें: यूपी में कृषि निदेशालय में नौकरी पाने का मौका, सैलरी होगी 45000 से ज्यादा The post DUSU Election Result 2026: कौन बनेगा दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का अध्यक्ष? ABVP-NSUI के बीच फाइट; विजय जुलूस पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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बेटे के एक आइडिया ने ड्राइवर बाप को बनाया लखपति, जानिए जामताड़ा के इस ट्रक ड्राइवर की कितनी है कमाई

Success Story Rajesh Rawani: झारखंड के जामताड़ा के रहने वाले राजेश रावनी की कहानी सिर्फ एक ट्रक ड्राइवर के सोशल मीडिया स्टार बनने की कहानी नहीं है. यह इस बात का उदाहरण भी है कि किसी आम नौकरी या रोजमर्रा के काम से जुड़े हुनर को सही तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेश किया जाए, तो उससे कमाई का नया रास्ता बनाया जा सकता है. करीब 25 साल से देशभर में ट्रक चलाने वाले राजेश आज ‘R Rajesh Vlogs’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं. हाईवे पर खाना बनाने से शुरू हुआ उनका कंटेंट अब लाखों लोगों तक पहुंच चुका है. इसी डिजिटल सफर के साथ उन्होंने अपने ट्रक को भी इस तरह कस्टमाइज कराया है कि वह उनके लिए सफर, काम और कंटेंट तीनों का हिस्सा बन गया है. शुरुआत कैसे हुई? राजेश लंबे सफर के दौरान सड़क किनारे खुद खाना बनाते थे. चिकन, मटन, मछली और पनीर जैसी चीजें बनाकर वह उनकी तस्वीरें और छोटे वीडियो परिवार के साथ शेयर करते थे. 2021 में उनके बेटे सागर रावनी ने इन वीडियो में संभावनाएं देखीं. उन्होंने वीडियो एडिट करके यूट्यूब पर डालना शुरू किया. शुरुआत में यह बस रोजमर्रा की जिंदगी को दिखाने वाला कंटेंट था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी. खास बात यह रही कि दर्शक सिर्फ खाना बनाने के वीडियो नहीं देखना चाहते थे. वे उस ट्रक ड्राइवर के बारे में जानना चाहते थे जो यह सब कर रहा था. राजेश के फेस-रिवील वीडियो को कथित तौर पर 24 घंटे में करीब 4.5 लाख व्यू मिले. कमाई का मॉडल कैसे बदला? राजेश ने पहले अपनी कमाई को ट्रक ड्राइविंग से जोड़ा था. उनके मुताबिक, उस समय उन्हें करीब ₹25,000-₹30,000 महीने की कमाई होती थी. यूट्यूब चैनल लोकप्रिय होने के बाद उनकी आय में बड़ा बदलाव आया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मासिक कमाई करीब ₹4-5 लाख तक पहुंच गई, जबकि कुछ महीनों में यह आंकड़ा ₹18 लाख तक भी गया. उनके “लग्जरी ट्रक” में ऐसा क्या खास है? राजेश रवानी की लग्जरी ट्रक की रील: View on Instagram राजेश रवानी का यह नया ट्रक केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी सफलता और सहूलियत का एक चलता-फिरता ठिकाना है. इसे लंबी यात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर कस्टमाइज किया गया है: अपग्रैडेड इंटीरियर: आरामदायक सीटें और रहने के लिए विस्तारित जगह (Expanded living space). मोबाइल किचन: समर्पित कुकिंग एरिया, ताकि वे सफर के दौरान अपना पसंदीदा खाना बनाना जारी रख सकें. आधुनिक सुविधाएं: एयर कंडीशनिंग (AC), रेफ्रिजरेशन (फ्रीज) और सामान रखने के लिए स्टोरेज कैबिनेट्स. ये भी पढ़ें: ₹158 करोड़ की कमाई और ₹98 करोड़ का घर, जानें कितनी है N Chandrasekaran की नेट वर्थ The post बेटे के एक आइडिया ने ड्राइवर बाप को बनाया लखपति, जानिए जामताड़ा के इस ट्रक ड्राइवर की कितनी है कमाई appeared first on Naya Vichar.

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