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Pakistan Blast: डेरा इस्माइल खान में चेकपोस्ट के पास धमाका, 11 की मौत, वीडियो आया सामने

Pakistan Blast: Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में एक चेकपोस्ट के पास जोरदार धमाका हुआ. पुलिस के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 11 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि 20 अन्य घायल हुए हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. डेरा इस्माइल खान में हुए धमाके के बाद के बताए जा रहे कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि इसमें धमाके के तुरंत बाद का दृश्य है. पोस्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी सैन्य चेकपोस्ट को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला किया गया. पोस्ट में इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को जिम्मेदार बताया गया है. वायरल वीडियो में धमाके के बाद इलाके में मची अफरा-तफरी और नुकसान का दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है.  The post Pakistan Blast: डेरा इस्माइल खान में चेकपोस्ट के पास धमाका, 11 की मौत, वीडियो आया सामने appeared first on Naya Vichar.

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‘सुराब बमबारी’ से ‘आजादी’ तक: Sarmachar के संपादकीय में BLF ने क्या संदेश दिया?

Balochistan Liberation Front (BLF) से जुड़े त्रैमासिक प्रकाशन Sarmachar के जून–जुलाई–अगस्त 2026 अंक का संपादकीय केवल सुराब की एक कथित सैन्य कार्रवाई पर प्रतिक्रिया नहीं है. यह दरअसल संगठन के उस व्यापक नेतृत्वक और वैचारिक narrative को सामने रखता है, जिसके जरिए वह अपनी लंबे समय से जारी सशस्त्र गतिविधियों को ‘राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष’ के रूप में प्रस्तुत करता है. इस अंक का संपादकीय शीर्षक है— ‘Bombardment on Civilians: Evidence of the Occupying State’s Vulnerability and Defeat.’ यानी नागरिकों पर बमबारी को पाकिस्तान की कमजोरी और कथित हार का प्रमाण बताया गया है. BLF से जुड़े Aashob Publications ने इसे Sarmachar के सातवें संस्करण के रूप में जारी किया है. प्रकाशन में संगठन की गतिविधियों की रिपोर्ट और infographic भी शामिल हैं. Read only here: The post ‘सुराब बमबारी’ से ‘आजादी’ तक: Sarmachar के संपादकीय में BLF ने क्या संदेश दिया? appeared first on Naya Vichar.

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Explained: कभी केजरीवाल को जिताया, अब देंगे टक्कर! क्यों जन सुराज का दिल्ली डेब्यू कराना चाह रहे हैं प्रशांत किशोर?

चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को पटना के गांधी मैदान में बड़ी रैली की. बिहार के अलग-अलग इलाकों से जुटे समर्थकों के सामने जन सुराज पार्टी लॉन्च करने का ऐलान किया था. जन सुराज की लॉन्चिंग के समय पीके का दावा था कि बिहार में पार्टी के एक करोड़ कार्यकर्ता हैं. बिहार चुनाव में पीके के दावे की पोल खुल गई और पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट बांकीपुर पर जीत के बाद प्रशांत किशोर की नजर अब दिल्ली पर है. बांकीपुर की जीत के करीब 55 दिन बाद दिल्ली में जन सुराज पार्टी एक बड़ी बैठक आयोजित कर रही है. इस बैठक में दिल्ली की नेतृत्व में जन सुराज की एंट्री का प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. यह भी चर्चा है कि प्रशांत किशोर इस प्रस्ताव का अनुमोदन कर देंगे और जन सुराज की दिल्ली इकाई के गठन पर औपचारिक रूप से मोहर लग जाएगी. हालांकि, जन सुराज ने दिल्ली प्लान पर आधिकारिक रूप से कोई ऐलान नहीं किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि प्रशांत किशोर आखिर दिल्ली की नेतृत्व में जन सुराज का डेब्यू क्यों कराना चाह रहे हैं? बिहार की 238 सीटों पर 3.44 फीसद वोट हासिल कर एक भी सीट नहीं जीत सकने वाली पार्टी क्या दिल्ली में कमाल दिखा पाएगी? जन सुराज के दिल्ली डेब्यू की चर्चा क्यों? जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर इन दिनों दिल्ली में हैं. उनके सम्मान में दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित हो रहा है. दिल्ली में रहने वाले प्रशांत किशोर के समर्थक यह मांग कर रहे हैं कि जन सुराज को दिल्ली में भी संगठन का गठन करना चाहिए. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि संभवत: इसको लेकर प्रस्ताव भी पेश किया जा सकता है. अगर जन सुराज की दिल्ली इकाई का गठन होता है तो बिहार के बाहर यह संगठन विस्तार की दिशा में पहला कदम होगा. प्रशांत किशोर के लिए दिल्ली में संगठन खड़ा करना चुनौतीपूर्ण होगा: एक्सपर्ट नेतृत्वक विश्लेषक रशीद किदवई ने नया विचार डिजिटल से बातचीत में कहा कि प्रशांत किशोर पहले चुनावी रणनीतिकार के तौर पर सफल रहे हैं और अब खुद नेतृत्व में हैं. नेतृत्वक दल बनाने के बाद प्रशांत किशोर की महत्वाकांक्षा सिर्फ बिहार की सियासत तक सीमित रहेगी, ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर भी चर्चा जोरों पर है. प्रशांत किशोर की दिल्ली में सक्रियता, जन सुराज के सियासी डेब्यू की चर्चा को इसी से जोड़कर देखा जा सकता है. रशीद किदवई ने साथ ही यह भी जोड़ा कि दिल्ली की नेतृत्व आसान नहीं है. रशीद किदवई ने कहा कि दिल्ली में बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के रूप में तीन बड़े नेतृत्वक दल पहले से ही मजबूत स्थिति में हैं. ऐसे में प्रशांत किशोर और जन सुराज के लिए दिल्ली में संगठन खड़ा करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण होगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली का महत्व सिर्फ विधानसभा की नेतृत्व तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय राजधानी में किसी नेतृत्वक संगठन की गतिविधियों पर देशभर की नजर रहती है. इसलिए दिल्ली में मौजूदगी प्रशांत किशोर को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नेतृत्वक भूमिका बनाने का अवसर भी दे सकती है. ‘जन सुराज बिहार के बाहर भी विस्तार को लेकर गंभीर है’ बिहार की नेतृत्व को वर्षों से कवर करते आ रहे एक वरिष्ठ पत्रकार की राय है कि प्रशांत किशोर के दिल्ली प्लान के पीछे यह संदेश देने की रणनीति हो सकती है कि जन सुराज बिहार के बाहर भी विस्तार को लेकर गंभीर है. दिल्ली में इसका चुनावी असर क्या होगा, यह देखना होगा. उन्होंने कहा कि जन सुराज के लिए अभी यही बेहतर होता कि पार्टी बिहार में अपनी जमीन मजबूत करने की दिशा में काम करती. प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में जीत जरूर दर्ज की है, लेकिन इसे अभी पूरे बिहार या राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी नेतृत्वक सफलता का संकेत नहीं माना जा सकता. बिहार चुनाव में जन सुराज खाता तक नहीं खोल सकी थी, लेकिन एक धारणा जरूर बनी थी कि प्रशांत किशोर चुनावी मुकाबले में एक फैक्टर हैं. दिल्ली में सक्रियता के जरिये जन सुराज को यह संदेश देने का मौका मिल सकता है कि पार्टी बिहार से बाहर अन्य राज्यों और राष्ट्रीय नेतृत्व को लेकर गंभीर है. बिहार में मिली पहली जीत के बाद प्रशांत किशोर के लिए दिल्ली अगला नेतृत्वक प्रयोग हो सकता है. राष्ट्रीय राजधानी में सक्रियता प्रशांत किशोर को नेतृत्वक दृष्टि से राष्ट्रीय विमर्श में बनाए रख सकती है. कभी केजरीवाल के लिए बनाई थी चुनावी रणनीति दिल्ली की नेतृत्व का मैदान प्रशांत किशोर के लिए नया नहीं है. साल 2019 में I-PAC ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ काम करना शुरू किया था. इसके एक साल बाद 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी भी इसी कंपनी की थी. चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. तब I-PAC की पहचान ही प्रशांत किशोर के नाम से हुआ करती थी. हालांकि, जन सुराज की लॉन्चिंग के साथ ही प्रशांत किशोर ने इस कंपनी में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली जिस आम आदमी पार्टी के लिए कभी पीके ने विजयी रणनीति बनाई थी, क्या अब उसी दल को जन सुराज चुनावी चुनौती देगी? यह देखना दिलचस्प होगा. ये भी पढ़ें: प्रशांत किशोर का मिशन 2030: बिहार के बाद अब दिल्ली में उतरेगी जन सुराज The post Explained: कभी केजरीवाल को जिताया, अब देंगे टक्कर! क्यों जन सुराज का दिल्ली डेब्यू कराना चाह रहे हैं प्रशांत किशोर? appeared first on Naya Vichar.

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T N Seshan से Ashok Lavasa तक, 33 साल में चुनाव आयुक्तों के बीच 3 बड़े टकराव की कहानी

हिंदुस्तान के तीन सदस्यीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली इस हफ्ते चर्चा में है. 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में कम से कम 14 बार अपनी असहमति दर्ज कराई. रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने सफाई दी कि उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं. आयोग के मुताबिक, बैठक के दौरान अलग-अलग राय रखना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे अंतिम फैसले से अलग देखा जाना चाहिए. इस समाचार के सामने आने के बाद CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष लगातार हमलावर है. अब सवाल उठता है कि क्या ऐसा पहली बार हुआ, या इससे पहले भी इस तरह की चीजें चुनाव आयोग में देखने को मिल चुकी है. टीएन शेषन और चुनाव आयुक्त गिल और कृष्णमूर्ति के बीच मतभेद की समाचारें 1993 में चुनाव आयोग को स्थायी तौर पर एक सदस्य से बढ़ाकर तीन सदस्यीय संस्था बनाया गया. इसके बाद से आयोग के सदस्यों के बीच कई बार किसी मुद्दे पर राय अलग-अलग रही है. अलग-अलग दौर में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद के मामले सामने आते रहे हैं. उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और चुनाव आयुक्त एमएस गिल और जीवीजी कृष्णमूर्ति के बीच मतभेद की समाचारें सामने आई थीं. शेषन ने दोनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी थी. हालांकि, कोर्ट ने नियुक्तियों को सही माना और कहा कि आयोग के तीनों सदस्यों का दर्जा बराबर होगा. ये भी पढ़ें: SIR पर बढ़ा विवाद, BJP के 3 सहयोगी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार से मांगा स्पष्टीकरण 1995 में T.N. Seshan vs. Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की फैसले लेने में बराबर भूमिका होगी. यानी मुख्य चुनाव आयुक्त को अन्य चुनाव आयुक्तों के मुकाबले ज्यादा अधिकार नहीं दिए जा सकते. तीनों सदस्य मिलकर आयोग के फैसलों की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. जनवरी 2009 में चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की मांग की गई थी जनवरी 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की मांग की थी. उन्होंने चावला पर “नेतृत्वक निष्पक्षता की कमी” का आरोप लगाया था. गोपालस्वामी ने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र भी लिखा था. हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से चावला को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हुई और बाद में चावला खुद मुख्य चुनाव आयुक्त बने. चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, चुनाव कराने या आयोग के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े मुद्दों पर सदस्यों की राय अलग-अलग होना सामान्य बात है. हालांकि, अंतिम फैसला आयोग सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लेता है. आयोग लंबित मामलों पर चर्चा के लिए आमतौर पर हफ्ते में एक या दो बार बैठक करता है. पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा भी रहे चर्चा में अगर किसी चुनाव आयुक्त की राय बहुमत के फैसले से अलग होती है, तो वह अपनी असहमति को लिखित रूप में दर्ज कर सकता है. इसके लिए वह फाइल पर अपनी अलग राय या डिसेंट नोट लिख सकता है.  पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने 2019 में भी ऐसा ही किया था. उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों पर आयोग के बहुमत के फैसले से असहमति जताई थी. बहुमत ने दोनों को इन शिकायतों के मामले में क्लीन चिट दी थी, जबकि लवासा ने अपनी अलग राय दर्ज की थी. ये भी पढ़ें: Watch Video: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़क पर उतरा राजद, कलेक्ट्रेट के सामने पुतला फूंककर जताया विरोध लवासा ने यह आपत्ति भी जताई थी कि उनकी असहमति वाली राय यानी डिसेंट नोट को आयोग के अंतिम आदेशों में दर्ज नहीं किया जा रहा है. वरिष्ठता के आधार पर उनके अगले मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की संभावना थी. हालांकि, 2020 में उन्होंने चुनाव आयोग के पद से इस्तीफा दे दिया. The post T N Seshan से Ashok Lavasa तक, 33 साल में चुनाव आयुक्तों के बीच 3 बड़े टकराव की कहानी appeared first on Naya Vichar.

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दिनभर रील्स देखने की लत और फोन छीनने पर गुस्सा? ऐसे कम करें बच्चों का स्क्रीन टाइम

Screen Time Addiction: पहले शिशु छुपन-छुपाई, लूडो, कैरम जैसे स्पोर्ट्स स्पोर्ट्सते थे. इसके अलावा शिशु दोस्तों के साथ बाहर जाकर क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन जैसे गेम्स भी स्पोर्ट्सते थे. लेकिन आजकल के पेरेंट्स की यह शिकायत रहती है कि उनका बच्चा दिनभर मोबाइल में घुसा रहता है. वह न तो कोई इंटरेस्टिंग टॉपिक देखता है, बल्कि दिनभर रील्स देखकर अपना टाइम बर्बाद करता है. अगर शिशु से मोबाइल छीन लो तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अचानक शिशु के हाथ से मोबाइल छीनने पर उनका गुस्सा होना डोपामिन लूप और स्क्रीन की लत की ओर साफ इशारा करता है. डिजिटल दुनिया शिशु को कर रही कंट्रोल शोध बताते हैं कि लगातार मोबाइल देखने से अगर शिशु को खुशी और अच्छा महसूस होने लगता है, तो इससे दिमाग में डोपामाइन नाम का हॉर्मोन बनता है. यह प्रक्रिया फोन छीनने से टूट जाती है, इस वजह से शिशु को बेचैनी, निराशा और गुस्सा आता है. ऐसे में कहीं न कहीं डिजिटल दुनिया शिशु को कंट्रोल कर रही होती है. इसलिए कभी भी शिशु के हाथ से जबरदस्ती फोन न छीनें. शिशु को 10 मिनट पहले बता दें कि अब वह फोन रखकर अपनी पढ़ाई शुरू करें या फिर उसे कोई दूसरा काम दें. इससे शिशु को अचानक फोन बंद करने का दबाव महसूस नहीं होगा और वह धीरे-धीरे अपनी आदत बदल सकेगा. स्क्रीन टाइम सीमित करें और आउटडोर गेम्स से जोड़ें शिशु को मोबाइल की जगह आउटडोर गेम्स, ड्राइंग या फिर किसी और क्रिएटिव काम में व्यस्त रखें. दिनभर में स्क्रीन टाइम समय निश्चित कर दें, एक घंटा स्क्रीन टाइम किसी भी शिशु के लिए काफी है. शिशु को पार्क में स्पोर्ट्सने, साइकिल चलाने या दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए भी प्रोत्साहित करें. इससे उसकी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव आएगा और वह मोबाइल से दूर रह सकेगा. डांटने के बजाय समझें शिशु की ‘मन की बात’ अक्सर पेरेंट्स अपने बिजी शेड्यूल में यहां तक भूल जाते हैं कि क्या उन्होंने आज अपने शिशु से ठीक से बातचीत की है. उसके स्कूल में क्या चल रहा है, वह किन चीजों को लेकर परेशान है, यह भी पता नहीं होता है. इसलिए शिशु को डांटने से पहले खुद से जरूर सोचें, उनसे बातचीत करें एवं उनकी प्रॉब्लम्स को समझें. इससे खुद-ब-खुद कई बातें सामने आएंगी, जिनका समाधान करने की जरूरत होगी. इससे शिशु को सपोर्ट मिलेगा और वह फोन की जगह आपसे बातें शेयर करने में ज्यादा समय देगा, जिससे उसका स्क्रीन टाइम काफी हद तक कम होगा. यह भी पढ़ें: आपकी गैरमौजूदगी में Netflix पर क्या देख रहे हैं शिशु ? ऐसे रखें नजर The post दिनभर रील्स देखने की लत और फोन छीनने पर गुस्सा? ऐसे कम करें बच्चों का स्क्रीन टाइम appeared first on Naya Vichar.

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The Untold Story: Kantara के ‘Karma’ की आवाज ने दिया धोखा! Female समझ बैठे लोग, Male Singer ने गाया है ये गाना

Kantara का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में फिल्म के दमदार scenes, Rishab Shetty और ‘Varaha Roopam’ जैसे गाने आते हैं. लेकिन इस फिल्म का एक और गाना है, जिसकी आवाज सुनते ही लोग आज भी कुछ पल के लिए ठहर जाते हैं. यह है ‘Karma’. इस गाने को पहली बार सुनने पर बहुत से लोगों को लगा कि शायद इसे किसी Female Singer ने गाया है. आवाज में ऐसी ऊंची pitch, अलग texture और खुरदुरापन है कि singer की पहचान करना आसान नहीं. लेकिन इस रहस्यमयी आवाज के पीछे कोई स्त्री नहीं, बल्कि Male Singer और Musician Venkatesh D.C. हैं. यही Venkatesh D.C. इस गाने की सबसे दिलचस्प कहानी हैं. आखिर कौन हैं Venkatesh D.C.? Venkatesh D.C. सिर्फ प्लेबैक सिंगर नहीं हैं. वह एक ट्रेंड म्यूजिशियन और कई तरह के इंस्ट्रूमेंट्स बजाने में उन्हें विरासत हासिल है. संगीत से उनका रिश्ता बचपन से रहा है. एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने सात साल की उम्र में तबला सीखना शुरू किया था. आगे चलकर उन्होंने कई तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स पर महारत हासिल की. उनका म्यूजिकल वर्ल्ड सिर्फ हिंदुस्तानीय संगीत तक सीमित नहीं रहा. Mridangam, Pakhawaj, Dhol, Darbuka, Djembe और Cajon जैसे कई इंस्ट्रूमेंट्स के साथ उन्होंने अलग-अलग म्यूजिकल ट्रेडिशन को भी समझा. यही वजह है कि उनकी आवाज और गायकी में एक अलग तरह की rawness सुनाई देती है और यही rawness ‘Karma’ की सबसे बड़ी पहचान बन गई. ‘Karma’ Venkatesh D.C. तक कैसे पहुंचा? Kantara के संगीतकार B. Ajaneesh Loknath को फिल्म की दुनिया के लिए ऐसा म्यूजिक चाहिए था जो सिर्फ कानों को अच्छा न लगे, बल्कि कहानी के माहौल का हिस्सा महसूस हो. Venkatesh D.C. ने एक इंटरव्यू में बताया कि ‘Karma’ उनके पास उनकी आवाज और सिंगिंग स्टाइल के मुताबिक आया. यानी इस गाने के लिए किसी सामान्य प्लेबैक वॉइस की तलाश नहीं थी. गाने की जरूरत ऐसी आवाज की थी जिसमें अलग टेक्सचर और हाई पिच हो. Venkatesh की आवाज उस जरूरत के साथ बिल्कुल फिट बैठी. यही वह जगह है जहां एक सिंगर की कमी उसकी सबसे बड़ी खूबी बन जाती है. उनकी आवाज conventional male playback voice जैसी नहीं सुनाई देती. यही वजह है कि कई म्यूजिक लवर्स इसे पहली बार सुनकर फीमेल वॉइस समझ लेते हैं. गाने में आवाज इतनी अलग क्यों रखी गई? ‘Karma’ कोई सामान्य romantic song नहीं है. इसके लिरिक्स इंसान के कर्म, उसके पाप, अहंकार, पछतावे और उसके किए हुए कामों के परिणाम की बात करते हैं. इसलिए इसकी आवाज में भी एक तरह की बेचैनी और चेतावनी चाहिए थी. Venkatesh की आवाज इस मूड को पकड़ती है. उनकी आवाज में कहीं लोकगीत जैसा खुरदरापन सुनाई देता है, तो कहीं इतनी ऊंची pitch आती है कि वह सामान्य Male Voice से बिल्कुल अलग महसूस होती है. यही संयोग ‘Karma’ को बाकी गानों से अलग करता है. ‘Karma’ के lyrics का असली मतलब क्या है? गाने का नाम ही ‘Karma’ है, यानी कर्म. गीत इंसान को उसके किए हुए कामों की याद दिलाता है. इसका मूल भाव है कि इंसान दुनिया से अपने कर्म छिपा सकता है, लेकिन अपने कर्मों के परिणाम से नहीं बच सकता. गीत में कर्म को ऐसी चोट के रूप में दिखाया गया है जिसका निशान आसानी से नहीं मिटता. एक और खूबसूरत imagery में दीपक और आग का इस्तेमाल किया गया है. अंधेरे को दूर करने के लिए जलाया गया दीपक अगर नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो वही रोशनी विनाश की वजह बन सकती है. यानी संदेश सीधा है. जिस चीज को हम अपने लिए सही समझते हैं, अगर उसके पीछे गलत नीयत और गलत कर्म हों, तो वही हमारे लिए मुसीबत बन सकती है. सिर्फ आवाज नहीं, संगीत भी कहानी कहता है ‘Karma’ को B. Ajaneesh Loknath ने कंपोज किया है. Lyrics Trilok Trivikrama ने लिखे और vocals Venkatesh D.C. ने दिए. गाने की कंपोजिशन में folk और spiritual मूड का असर साफ सुनाई देता है. इसका म्यूजिक किसी कमर्शल सॉन्ग जैसा नहीं बनाया गया. इसमें एक रॉ और अर्दी फील रखी गई है. यही कारण है कि गाना सुनते समय ऐसा लगता है जैसे कोई कहानी सुनाई जा रही हो या कोई वॉर्निंग दी जा रही हो. Venkatesh की आवाज बनी उनकी पहचान Kantara से पहले Venkatesh D.C. का संगीत सफर काफी दिलचस्प रहा है. उन्होंने अलग-अलग instruments और म्यूजिकल फॉर्म्स के साथ काम किया है. लेकिन ‘Karma’ ने उनकी आवाज को एक बड़े ऑडियंस तक पहुंचा दिया. विडंबना यह है कि बहुत से लोग सिंगर का नाम जाने बिना उनकी आवाज पहचानने लगे. कुछ म्यूजिक लवर्स को तो यह भी विश्वास नहीं हुआ कि गाना किसी पुरुष ने गाया है. यानी Venkatesh की सबसे बड़ी पहचान ही उनकी वही आवाज बन गई, जिसे पहली बार सुनकर लोग पहचान नहीं पाए. फिर Kantara Chapter 1 में भी लौटी वही आवाज Kantara franchise के अगले chapter में भी Venkatesh D.C. की आवाज सुनाई दी. ‘Karma Song’ के नए वर्जन में भी उनका नाम vocals के लिए credit किया गया. इससे एक बात साफ होती है. ‘Karma’ की आवाज कोई संयोग नहीं थी. Venkatesh D.C. की आवाज उस म्यूजिकल वर्ल्ड का हिस्सा बन चुकी थी जिसे Ajaneesh Loknath और Kantara की टीम तैयार कर रही थी. जिस गाने को सुनकर सवाल उठा, उसी ने singer को पहचान दी ‘Karma’ की कहानी सिर्फ एक गाने की making की कहानी नहीं है. यह उस आवाज की कहानी है जिसे सुनकर लोग पहले confuse हुए. फिर singer का नाम खोजा. और जब पता चला कि इतनी ऊंची और अलग आवाज के पीछे एक Male Singer है, तो यही curiosity उसकी पहचान बन गई. Venkatesh D.C. की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उन्होंने अपनी अलग आवाज को बदलने की कोशिश नहीं की. उनकी वही unconventional आवाज, जिसे पहली बार सुनकर लोग पहचान नहीं पाए, Kantara के ‘Karma’ की सबसे बड़ी ताकत बन गई. और शायद यही किसी कलाकार की सबसे बड़ी जीत होती है. जब उसकी ‘अलग’ चीज ही उसकी पहचान बन जाए. The post The Untold Story: Kantara के ‘Karma’ की आवाज ने दिया धोखा! Female समझ बैठे लोग, Male Singer ने गाया है ये गाना appeared first on Naya Vichar.

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कबड्डी में भारत की बादशाहत, एक ही दिन में ईरान को दो बार पटका; महिलाओं के बाद पुरुषों ने जीता गोल्ड

India vs Iran Kabaddi Final: एशियन गेम्स 2026 में हिंदुस्तानीय कबड्डी का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला. पहले स्त्री टीम ने ईरान को हराकर गोल्ड मेडल जीता और इसके कुछ ही घंटों बाद पुरुष टीम ने भी वही कहानी दोहरा दी. हिंदुस्तान ने रोमांचक फाइनल में ईरान को 40-34 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इस जीत के साथ हिंदुस्तान ने पुरुष कबड्डी में एशियन गेम्स का अपना 9वां गोल्ड मेडल जीत लिया. हिंदुस्तान के लिए यह सिर्फ एक और गोल्ड नहीं था. पुरुष टीम ने हांगझोउ एशियन गेम्स में जीते खिताब को भी बरकरार रखा. यानी हिंदुस्तान ने लगातार दूसरी बार पुरुष कबड्डी में एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक अपने नाम किया. पहले बेटियों ने जीता गोल्ड, फिर बेटों ने किया कमाल हिंदुस्तान के लिए शनिवार का दिन कबड्डी में पूरी तरह गोल्डन रहा. दिन की शुरुआत स्त्री टीम की खिताबी जीत से हुई. हिंदुस्तानीय स्त्रीओं ने भी फाइनल में ईरान को 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीता. इसके बाद पुरुष टीम ने भी ईरान के खिलाफ फाइनल में मोर्चा संभाला. हालांकि शुरुआत से मुकाबला आसान नहीं था, लेकिन दूसरे हाफ में हिंदुस्तानीय टीम ने गियर बदला और आखिर में 40-34 से मुकाबला अपने नाम कर लिया. एक दी दिन में हिंदुस्तान ने कबड्डी में डबल धमाल कर दिया. पहले हाफ में पिछड़ गया था हिंदुस्तान ईरान के खिलाफ फाइनल में हिंदुस्तान को शुरुआत से ही कड़ी चुनौती मिली. शुरुआती आठ मिनट के बाद स्कोर 5-5 से बराबर था. इसके बाद हिंदुस्तान ने 12-9 की बढ़त बनाई, लेकिन ईरान ने जोरदार वापसी करते हुए स्कोर अपने पक्ष में कर लिया. मुकाबले में कई बार बढ़त दोनों टीमों के बीच बदलती रही. हिंदुस्तान ने 16-14 की बढ़त बनाई, लेकिन ईरान ने फिर पलटवार किया और पहले हाफ के खत्म होने तक 18-17 की बढ़त हासिल कर ली. इंटरवल तक हिंदुस्तान सिर्फ एक अंक से पीछे था और मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ था. ये भी पढ़ें: Asian Games 2026: हिंदुस्तान की बेटियों ने ईरान को हराकर कबड्डी में जीता गोल्ड, 37-34 से दर्ज की रोमांचक जीत दूसरे हाफ में बदला मैच का रुख दूसरे हाफ की शुरुआत में ईरान ने अपनी बढ़त को 20-17 तक पहुंचा दिया. इसके बाद हिंदुस्तानीय डिफेंस ने वापसी की राह तैयार की. एक अहम सुपर टैकल की मदद से हिंदुस्तान ने अंतर कम किया और फिर 21-20 की बढ़त हासिल कर ली. ईरान ने तुरंत बराबरी कर ली, लेकिन इसके बाद हिंदुस्तान ने धीरे-धीरे मैच पर पकड़ बनानी शुरू की. हिंदुस्तान 24-21 से आगे हुआ, हालांकि ईरान ने सुपर टैकल के जरिए दो अंक लेकर स्कोर 24-23 कर दिया. इसके बाद हिंदुस्तान ने पटलवार करते हुए ईरान को ऑलआउट कर 29-24 की बढ़त बना ली. यहां से हिंदुस्तानीय टीम ने मुकाबले में पकड़ बनाना शुरू किया. जिसके बाद हिंदुस्तान ने ईरान को फिर आगे निकलने का मौका नहीं दिया. हिंदुस्तान ने मुकाबला 40-34 से जीतकर गोल्ड मेडल पक्का कर लिया. पुरुष कबड्डी में हिंदुस्तान का 9वां एशियन गेम्स गोल्ड ईरान को हराकर हिंदुस्तान ने एशियन गेम्स में पुरुष कबड्डी का 9वां स्वर्ण पदक जीत लिया. अब तक हुए 10 एशियन गेम्स संस्करणों में हिंदुस्तान ने 9 बार पुरुष कबड्डी का गोल्ड अपने नाम किया है. हिंदुस्तान ने हांगझोउ एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था और अब 2026 में खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया है. हिंदुस्तान के खाते में आया चौथा गोल्ड पुरुष कबड्डी में इस जीत के साथ हिंदुस्तान ने एशियन गेम्स 2026 में अपना चौथा स्वर्ण पदक जीत लिया. स्त्री और पुरुष कबड्डी टीमों की लगातार जीत ने हिंदुस्तान के अभियान को भी मजबूती दी. दोनों टीमों ने फाइनल में ईरान को हराकर अपने-अपने खिताब का बचाव किया. ये भी पढ़ें: मीराबाई चानू को मेडल का था सालों से इंतजार, आखिर मिला… एशियन गेम्स में जीता सिल्वर The post कबड्डी में हिंदुस्तान की बादशाहत, एक ही दिन में ईरान को दो बार पटका; स्त्रीओं के बाद पुरुषों ने जीता गोल्ड appeared first on Naya Vichar.

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डिजिटल अरेस्ट से ऑनलाइन फ्रॉड तक: साइबर अपराध पर साथ आए 91 देश, UN की संधि से क्या बदलेगा

ऑनलाइन ठगी, डेटा चोरी, हैकिंग और इंटरनेट के जरिए होने वाले दूसरे अपराध किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं. अपराधी एक देश में बैठकर दूसरे देश के व्यक्ति या कंपनी को निशाना बना सकते हैं और डिजिटल सबूत किसी तीसरे देश में मौजूद सर्वर पर मिल सकता है. ऐसे मामलों में अलग-अलग देशों की कानून व्यवस्था के बीच तालमेल बड़ी चुनौती होती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए हिंदुस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए और उन्होंने इसे सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने वाला कदम बताया. समझते हैं कि UN कन्वेंशन क्या है और हिंदुस्तान डिजिटल भविष्य के लिए यह कितना कारगर है? और इसका आप पर क्या असर होगा ? UN साइबर क्राइम कन्वेंशन है क्या? संयुक्त राष्ट्र का यह कन्वेंशन साइबर अपराध से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग का एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करता है. करीब पांच साल चली बातचीत के बाद तैयार हुआ यह पहला व्यापक वैश्विक साइबर अपराध कन्वेंशन है. जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2024 में मंजूर किया था. इसका मकसद केवल हैकिंग जैसे अपराधों से निपटना नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके किए जाने वाले गंभीर अपराधों की जांच में दुनिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है. हिंदुस्तान ने हस्ताक्षर किए, इसका क्या मतलब हुआ? हिंदुस्तान के हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं है कि कन्वेंशन हिंदुस्तान में तुरंत लागू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 25 सितंबर 2026 तक यह कन्वेंशन अभी लागू नहीं हुआ है. इसके लिए कम से कम 40 देशों को अनुसमर्थन, स्वीकृति, मंजूरी या शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद 90 दिन में कन्वेंशन प्रभावी होगा. यानी हिंदुस्तान का मौजूदा कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समझौते से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण औपचारिक कदम है, लेकिन इसका पूरा कानूनी असर आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा. ये भी पढ़ें: UNGA : ऑनलाइन ठगों पर दुनिया भर में कसेगा शिकंजा, साइबर क्राइम के खिलाफ हिंदुस्तान ने साइन किया UN कन्वेंशन साइबर अपराध की जांच में क्या बदलेगा? इसे उदाहरण से समझते हैं… मान लीजिए हिंदुस्तान में किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई. ठगी करने वाला किसी दूसरे देश(पाकिस्तान) में बैठा है और ठगी का पैसा किसी तीसरे देश (अमेरिका) में मौजूद खाते में चला गया. ऐसे मामले में हिंदुस्तानीय जांच एजेंसियों को पाकिस्तान और अमेरिका से जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हासिल करने की जरूरत पड़ सकती है. कन्वेंशन का एक बड़ा उद्देश्य ऐसे ही मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आसान बनाना है. इसमें गंभीर अपराधों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत साझा करने के लिए सहयोग का ढांचा बनाया गया है. इससे अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच जांच से जुड़ी जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है. आम लोगों के लिए इसका मतलब क्या है? आम इंटरनेट यूजर के लिए इसका सबसे बड़ा मतलब सीधे तौर पर कोई नया नियम लागू होना नहीं है. इसका असर ज्यादातर पर्दे के पीछे होने वाली जांच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यवस्था में दिखाई देगा. ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान, डिजिटल चोरी या दूसरे गंभीर साइबर अपराधों में अगर अपराधी और पीड़ित अलग-अलग देशों में हैं, तो जांच एजेंसियों को डिजिटल सबूत जुटाने की जरूरत होती है. कन्वेंशन ऐसे मामलों में देशों के बीच सहयोग मजबूत करने का आधार देता है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, कन्वेंशन साइबर अपराध की रोकथाम और जांच के साथ-साथ पीड़ितों की सुरक्षा, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण पर भी जोर देता है. क्या इससे ऑनलाइन ठगी तुरंत बंद हो जाएगी? नहीं, यह समझना जरूरी है कि इस तरह का कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता अपने आप साइबर ठगी खत्म नहीं कर सकता. अपराध रोकने के लिए मजबूत कानून, पुलिस और जांच एजेंसियों की क्षमता, डिजिटल फोरेंसिक व्यवस्था और लोगों में साइबर सुरक्षा की जागरूकता भी जरूरी है. कन्वेंशन का फायदा खास तौर पर उन मामलों में हो सकता है जहां अपराध की कड़ी कई देशों से जुड़ी हो. हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग देश इसे अपनी घरेलू कानूनी व्यवस्था के साथ किस तरह लागू करते हैं. ये भी पढ़ें: Explained: ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी में कांग्रेस! कैसे होती है CEC की नियुक्ति और हटाने का क्या है नियम? आगे की प्रक्रिया क्या होगी? संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार, कन्वेंशन पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी और देशों के लिए न्यूयॉर्क में 31 दिसंबर 2026 तक हस्ताक्षर का रास्ता खुला है. 25 सितंबर 2026 तक 91 हस्ताक्षर और तीन पक्षकार दर्ज थे, लेकिन कन्वेंशन अभी प्रभावी नहीं हुआ था. हिंदुस्तान के हस्ताक्षर के बाद अगला महत्वपूर्ण सवाल इसके अनुसमर्थन और घरेलू स्तर पर लागू किए जाने की प्रक्रिया का होगा.  The post डिजिटल अरेस्ट से ऑनलाइन फ्रॉड तक: साइबर अपराध पर साथ आए 91 देश, UN की संधि से क्या बदलेगा appeared first on Naya Vichar.

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JTET Exam 2026 देने वालों का इंतजार खत्म! 1 नवंबर हो सकती है परीक्षा

JTET Exam 2026: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है. 11 अक्टूबर को प्रस्तावित परीक्षा अब नहीं होगी. हाईकोर्ट में हुई हालिया सुनवाई के दौरान झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने पहले दी गई समयसीमा में बदलाव की जानकारी देते हुए 1 नवंबर को परीक्षा कराने की संभावित तारीख बतायी है. हालांकि, JAC की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है. संकेत हैं कि सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक नई परीक्षा तिथि की औपचारिक घोषणा की जा सकती है. हाईकोर्ट में बदली गयी परीक्षा की टाइमलाइन JTET का पूरा मामला फिलहाल हाईकोर्ट की निगरानी में चल रहा है. इससे पहले JAC ने अदालत में दाखिल टाइमलाइन में 11 अक्टूबर को परीक्षा और दिसंबर में रिजल्ट देने की बात कही थी. अब हालिया सुनवाई में परिषद ने अदालत को बताया कि परीक्षा निर्धारित तिथि पर कराना संभव नहीं है और इसके लिए कुछ अतिरिक्त समय चाहिए. सुनवाई के दौरान JAC ने 1 नवंबर को परीक्षा आयोजित करने की संभावित तिथि अदालत के सामने रखी. अदालत में दी गई इस जानकारी के बाद अभ्यर्थियों के बीच नई संभावित तारीख को लेकर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन अंतिम फैसला आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही माना जाएगा. अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार JAC की ओर से अभी नई तिथि की अधिसूचना जारी नहीं हुई है. परिषद को विज्ञप्ति के माध्यम से परीक्षा की नई तारीख घोषित करनी है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह घोषणा सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक किसी भी दिन की जा सकती है. यानी फिलहाल अभ्यर्थियों को 1 नवंबर को संभावित परीक्षा तिथि मानकर तैयारी जारी रखने की सलाह दी जा रही है, जबकि अंतिम पुष्टि JAC की आधिकारिक सूचना से होगी. एडमिट कार्ड और रिजल्ट की संभावित टाइमलाइन यदि परीक्षा 1 नवंबर को होती है तो एडमिट कार्ड लगभग 15 अक्टूबर के आसपास जारी होने की संभावना है. वहीं रिजल्ट दिसंबर अंत तक जारी करने की बात पहले की तरह बरकरार रखी गई है. यानी परीक्षा की तिथि में बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन परिणाम जारी करने की समयसीमा में फिलहाल कोई बदलाव नहीं बताया गया है. दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी होंगे शामिल JTET में इस बार केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के अभ्यर्थी भी शामिल होंगे. परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों की संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ी है. बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया 2024 में शुरू हुई थी, जब करीब 3 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. बाद में पहले से आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को दोबारा शुल्क नहीं देना पड़ा और नए आवेदन भी जुड़े. इसके बाद अभ्यर्थियों की संख्या बढ़कर लगभग 4.5 लाख तक पहुंच गई है. 10 साल बाद बढ़ी परीक्षा की अहमियत JTET लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही है, इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ गई है. बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक और पारा शिक्षक भी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं. इसके पीछे एक कारण यह भी है कि पात्रता परीक्षा पास करने पर उन्हें निर्धारित लाभ और मानदेय से जुड़ी सुविधाएं मिल सकती हैं. इसे भी पढ़ें: NHAI को हाईकोर्ट से राहत, डिप्टी जीएम की बहाली मामले में CAT का आदेश रद्द सहायक आचार्य भर्ती से भी जुड़ी है परीक्षा JTET का सीधा संबंध राज्य में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में सहायक आचार्य भर्ती से भी जुड़ा हुआ है. पहले हुई सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि अगली सहायक आचार्य नियुक्ति JTET आयोजित होने के बाद ही आगे बढ़ेगी. इसी वजह से यह परीक्षा केवल पात्रता परीक्षा नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रशासनी शिक्षक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है. फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि 11 अक्टूबर की जगह 1 नवंबर संभावित नई तिथि के रूप में सामने आई है, जबकि अंतिम फैसला JAC की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा. इसे भी पढ़ें: झारखंड में ओवरस्पीडिंग लील रही लोगों की जान, NCRB की रिपोर्ट में पहले ही दी गई थीं चेतावनियां The post JTET Exam 2026 देने वालों का इंतजार खत्म! 1 नवंबर हो सकती है परीक्षा appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी बोलीं- मुझे नजरबंद कर दिया, टीएमसी की रैली के रास्ते पर भाजपा ने किया कब्जा

ममता बनर्जी ने खुद को नजरबंद किये जाने का दावा करके पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में सनसनी फैला दी है. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने शनिवार को कहा- मुझे नजरबंद कर दिया गया है. तृणमूल कांग्रेस की रैली में जाने की अनुमति नहीं दी गयी. इतना ही नहीं, उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को गुंडा तक करार दे दिया. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के नेताओं को भी ‘नजरबंद’ करके रखा गया है. श्रीरामपुर में होने वाली रैली में ममता गुट के नेताओं को शामिल होने से रोका जा रहा है. पत्रकारों को संबोधित करतीं ममता बनर्जी. फोटो : ममता बनर्जी के फेसबुक पेज का स्क्रीन शॉट. ममता बनर्जी ने संवाददाताओं को किया संबोधित ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सबसे बड़ी नेता ममता बनर्जी ने कोलकाता में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा- भाजपा के गुंडों ने श्रीरामपुर में तृणमूल की रैली स्थल तक जाने वाले रास्ते पर कब्जा कर लिया. वहां कोई पुलिस नहीं थी. ममता बनर्जी ने ये बातें अपनी पार्टी के एक नेता पर हुए कथित हमले के बाद कहीं. हमें नजरबंद करके रखा गया है. मुझे रैली वाली जगह पर जाने की इजाजत नहीं है. लेकिन मैं जाऊंगी और रैली को संबोधित करूंगी. मुझे रोक सकें तो रोककर दिखाएं. -ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस की नेता कुणाल घोष को बुरी तरह पीटा गया : ममता बनर्जी ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा समर्थकों ने टीएमसी के नेता और विधायक कुणाल घोष पर हमला किया है. कुणाल को बुरी तरह से पीटा गया है. वह गंभीर रूप से घायल हैं. इतना ही नहीं, कार पर हमला भी किया गया है. ममता बनर्जी ने पूछा- कार पर हमले हो रहे हैं, विधायक को पीटा जा रहा है, पुलिस कहां है. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी की प्रस्तावित पदयात्रा से पहले 4 टीएमसी नेता की गिरफ्तारी से हुगली में सियासत गरमायी ‘भाजपा प्रशासन बंगाल के लिए सही नहीं’ ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए यह शुभ संकेत नहीं है. विपक्षी पार्टी को कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. उन्होंने कहा कि वह इसके विरोध में कोर्ट जायेंगीं. दीदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रशासन इस राज्य के लिए सही नहीं है. ‘बंगाल में जो हो रहा है अफ्रीका में भी नहीं होता’ बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर ने यहां तक कहा कि अफ्रीका में भी ऐसा नहीं होता, जैसा आजकल बंगाल में हो रहा है. उन्होंने कहा- लोगों को वोट देने का अधिकार नहीं रहा. लोगों को विरोध-प्रदर्शन का अधिकार नहीं है. लोगों को बोलने का अधिकार नहीं है. एक जगह से दूसरी जगह जाने का अधिकार नहीं है. ये भी पढ़ें: बारुईपुर दुष्कर्म-हत्याकांड के विरोध में सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी, लगे चोर-चोर के नारे, टीएमसी-भाजपा कार्यकर्ता भिड़े कोर्ट के आदेश का भी नहीं हो रहा पालन : ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में अब कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है. पुलिस को कोर्ट के ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- हमें हर बार कार्यक्रम के लिए कोर्ट की अनुमति लेनी होती है. हमें कोर्ट जाना पड़ता है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि कोर्ट के पास बहुत से काम हैं. पहले से बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं. बिहार या उत्तर प्रदेश में ऐसा जुल्म नहीं होता : ममता ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जो जुल्म विपक्षी दल पर हो रहा है, वह बिहार या उत्तर प्रदेश में नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा देश के किसी हिस्से में नहीं होता. अगर ये लोग जनता के वोट से जीते होते, तो ऐसा नहीं करते. The post ममता बनर्जी बोलीं- मुझे नजरबंद कर दिया, टीएमसी की रैली के रास्ते पर भाजपा ने किया कब्जा appeared first on Naya Vichar.

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