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July 19, 2026

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Salman Khan Viral Video: चेहरे पर थकान, दुबला दिखा शरीर… क्या सचमुच खराब है सलमान खान की तबीयत? वायरल वीडियो से बढ़ी चर्चा

Fans Reaction on Viral Video, PC: Instagram Salman Khan Upcoming Movies: सलमान खान की अगली फिल्म कौन-सी है? वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान जल्द ही ‘मातृभूमि’ फिल्म में नजर आएंगे. इस फिल्म का पहले नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ था, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया. फिल्म में सलमान एक हिंदुस्तानीय सेना के कर्नल की भूमिका निभा रहे हैं. उनके साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम रोल में नजर आएंगी. फिलहाल फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान नहीं किया गया है. ‘मातृभूमि’ के बाद सलमान खान निर्देशक वंशी पेडीपल्ली की अगली फिल्म में नजर आएंगे. इस फिल्म में उनके साथ साउथ की मशहूर एक्ट्रेस नयनतारा भी दिखाई देंगी. फिलहाल इस प्रोजेक्ट को SVC63 नाम से जाना जा रहा है और इसे ईद 2027 पर रिलीज करने की तैयारी है. यह भी पढ़ें: Bajrangi Bhaijaan: सलमान खान के हाथ पर हर्षाली को 20 बार थूकना पड़ा था चिकन… को-स्टार ने 10 साल बाद बताई शूटिंग की सच्चाई यह भी पढ़ें: क्या सच में गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं सलमान खान? वायरल पोस्ट में दावा- घरवाले इलाज कराने का दबाव बना रहे हैं The post Salman Khan Viral Video: चेहरे पर थकान, दुबला दिखा शरीर… क्या सचमुच खराब है सलमान खान की तबीयत? वायरल वीडियो से बढ़ी चर्चा appeared first on Naya Vichar.

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सोनम वांगचुक पूरे होश में हैं, सफदरजंग हॉस्पिटल के हेल्थ अपडेट में बताया गया-नॉर्मल हैं जरूरी पैरामीटर

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक शनिवार सुबह से दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में भर्ती हैं. उनके स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ चारू बाम्बा ने बताया कि वह अभी पूरी तरह होश में हैं, अलर्ट हैं. उनका ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, सैचुरेशन यानी ऑक्सीजन लेबल पूरी तरह नाॅर्मल है. सोनम वांगचुक का अनशन अभी भी जारी डॉ चारू बाम्बा ने मीडिया को बताया कि सोनम वांगचुक के जरूरी पैरामीटर नॉर्मल हैं. लेकिन उनके लैब पैरामीटर में थोड़ा बदलाव है, जिसकी वजह से हम उन्हें अस्पताल में जरूरी ट्रीटमेंट दे रहे हैं. चूंकि वे अभी भी अनशन पर हैं, इसलिए वह बहुत कमजोर हैं और इसकी वजह से कुछ कॉम्प्लीकेशंस भी हो सकते हैं. हमें लगता है कि उनकी लगातार मॉनिटरिंग करने की जरूरत है इसलिए हम उन्हें अस्पताल में ही रहने की सलाह देते हैं. इसकी वजह यह है कि अगर उन्हें तत्काल किसी भी तरह के इलाज की जरूरत हो तो उसे अविलंब उपलब्ध कराया जा सके. सोनम की पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल पर जताया अविश्वास सोनम की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सफदरजंग अस्पताल पर अविश्वास जताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है और कोर्ट से यह मांग की है कि उन्हें अपने पति सोनम वांगचुक को किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने की इजाजत दी जाए. गीतांजलि का कहना है कि सफदरजंग अस्पताल में इतने पुलिस हैं, जो शक पैदा करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा मालूम होता है कि सोनम अस्पताल में नहीं बल्कि जेल में हैं. ये भी पढ़ें : सोनम वांगचुक के इलाज पर विवाद: हाईकोर्ट पहुंचीं पत्नी गीतांजलि, बोलीं- सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं The post सोनम वांगचुक पूरे होश में हैं, सफदरजंग हॉस्पिटल के हेल्थ अपडेट में बताया गया-नॉर्मल हैं जरूरी पैरामीटर appeared first on Naya Vichar.

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FIFA World Cup 2026 Final: फाइनल से पहले लियोनेल मेसी का भावुक पोस्ट, टीम के लिए कही यह बड़ी बात

Lionel Messi emotional message: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल से ठीक एक दिन पहले अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने अपनी टीम के नाम एक बेहद भावुक संदेश साझा किया है. स्पेन के खिलाफ होने वाले खिताबी मुकाबले से पहले 39 वर्षीय मेसी ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनकी नजर में सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ ट्रॉफियां नहीं, बल्कि टीम के साथ बिताया गया पूरा सफर और आपसी रिश्ते हैं. मेसी ने अपने संदेश के साथ अर्जेंटीना टीम के खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ की एक ग्रुप फोटो भी साझा की. इस तस्वीर के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता और पारिवारिक माहौल है. View on Instagram मेसी का भावुक संदेश अपने भावुक संदेश में मेसी ने लिखा कि बीते वर्षों की सबसे खूबसूरत यादें केवल खिताब जीतने की नहीं हैं, बल्कि टीम के साथ बिताए गए हर पल की हैं. उन्होंने लिखा, “इन सभी वर्षों की सबसे खूबसूरत बात सिर्फ खिताब नहीं रहे, बल्कि पूरा सफर रहा. इस समूह के साथ हर दिन बिताना, साथ मिलकर मुकाबला करना, मुश्किल समय में एक-दूसरे को संभालना और हर कदम का आनंद लेना ही सबसे बड़ी उपलब्धि रही है.” मेसी ने साफ किया कि टीम की असली ताकत खिलाड़ियों के बीच भरोसा, दोस्ती और एक-दूसरे के लिए समर्पण है. कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ का भी जताया आभार मेसी ने अपने संदेश में केवल खिलाड़ियों का ही नहीं, बल्कि कोच लियोनेल स्कालोनी के नेतृत्व वाले कोचिंग स्टाफ और टीम के सपोर्ट स्टाफ का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया. उन्होंने लिखा, “मेरे हर साथी खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ और उन सभी शानदार लोगों का धन्यवाद, जो हर दिन इस राष्ट्रीय टीम को एक परिवार बनाए रखने के लिए मेहनत करते हैं. कल जो भी हो, यह समूह पहले ही ऐसी कहानी लिख चुका है जिसे हम कभी नहीं भूलेंगे और जिसे कोई मिटा नहीं सकता. वामोस अर्जेंटीना.” अर्जेंटीना की सबसे बड़ी ताकत पिछले कुछ वर्षों में अर्जेंटीना की सफलता के पीछे केवल शानदार प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि टीम के भीतर मजबूत एकता और आपसी विश्वास को भी बड़ी वजह माना जाता है. कप्तान मेसी कई मौकों पर इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि ड्रेसिंग रूम का माहौल और खिलाड़ियों के बीच गहरा जुड़ाव ही टीम को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालता है. फाइनल से पहले आया उनका यह संदेश भी उसी भावना को दर्शाता है और खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है. तीसरा वर्ल्ड कप फाइनल स्पोर्ट्सेंगे मेसी स्पेन के खिलाफ होने वाला मुकाबला लियोनेल मेसी के करियर का तीसरा फीफा वर्ल्ड कप फाइनल होगा. इससे पहले वह 2014 में जर्मनी के खिलाफ फाइनल में उतरे थे, जहां अर्जेंटीना को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद उन्होंने 2022 में अपनी कप्तानी में अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाया और लंबे इंतजार के बाद देश को तीसरा वर्ल्ड कप दिलाया. अब मेसी लगातार दूसरे विश्व कप खिताब के साथ अपने ऐतिहासिक करियर में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे. स्पेन होगी बड़ी चुनौती फाइनल में अर्जेंटीना के सामने मजबूत और संतुलित स्पेनिश टीम होगी. स्पेन पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताबी मुकाबले तक पहुंचा है. ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों को दो दिग्गज टीमों के बीच बेहद रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है. हालांकि अर्जेंटीना को भरोसा है कि टीम की एकजुटता, अनुभव और मेसी की कप्तानी उन्हें एक बार फिर इतिहास रचने का मौका दे सकती है. इसे भी पढ़े- FIFA World Cup 2026 Closing Ceremony: मेटलाइफ स्टेडियम में जुटेंगे ग्लोबल स्टार्स, जानिए कौन-कौन होंगे शामिल The post FIFA World Cup 2026 Final: फाइनल से पहले लियोनेल मेसी का भावुक पोस्ट, टीम के लिए कही यह बड़ी बात appeared first on Naya Vichar.

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KTM खरीदने का है प्लान? 390 Duke से RC 200 तक, कौन-सी KTM आपके लिए है बेस्ट?

हिंदुस्तानीय युवाओं के बीच अगर किसी मोटरसाइकिल ब्रैंड ने परफॉर्मेंस और स्पोर्टी राइडिंग का नया ट्रेंड बनाया है, तो उसमें KTM का नाम सबसे ऊपर आता है. तेज एक्सीलरेशन, एग्रेसिव डिजाइन और रेसिंग डीएनए वाली KTM बाइक्स आज सिर्फ कॉलेज स्टूडेंट्स ही नहीं, बल्कि अनुभवी राइडर्स की भी पहली पसंद बन चुकी हैं. 2026 में कंपनी के पोर्टफोलियो में कई ऐसे मॉडल मौजूद हैं, जो अलग-अलग जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारों को विकल्प देते हैं. अगर आप नई केटीएम (KTM) खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो ये 6 मोटरसाइकिलें आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. KTM 390 Duke: परफॉर्मेंस लवर्स की पहली पसंद KTM 390 Duke कंपनी की सबसे लोकप्रिय परफॉर्मेंस नेकेड बाइक मानी जाती है. इसमें 398.7cc का लिक्विड-कूल्ड इंजन मिलता है, जो दमदार पावर और शानदार थ्रॉटल रिस्पॉन्स देता है. बाइक में कॉर्नरिंग ABS, राइड-बाय-वायर और स्ट्रीट, रेन व ट्रैक जैसे तीन राइडिंग मोड दिए गए हैं. 5-इंच TFT डिस्प्ले और प्रीमियम फीचर्स इसे अपने सेगमेंट की सबसे एडवांस बाइक्स में शामिल करते हैं. KTM 250 Duke: कीमत और परफॉर्मेंस का शानदार संतुलन जो राइडर्स 390 Duke की स्टाइल और फीचर्स चाहते हैं लेकिन थोड़ा कम बजट रखते हैं, उनके लिए 250 Duke बेहतरीन विकल्प है. इसमें 249.07cc इंजन मिलता है, जो शहर और हाईवे दोनों जगह संतुलित परफॉर्मेंस देता है. बाइक में सुपरमोटो ABS, TFT डिस्प्ले और एग्रेसिव डिजाइन जैसे फीचर्स मिलते हैं. यही वजह है कि इसे KTM रेंज का सबसे वैल्यू-फॉर-मनी मॉडल भी माना जाता है. KTM 200 Duke और RC 200: युवाओं की फेवरेट स्पोर्ट मशीनें KTM 200 Duke वह बाइक है जिसने हिंदुस्तान में ब्रैंड की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी. 199.5cc इंजन, हल्का वजन और तेज परफॉर्मेंस इसे शहर के लिए शानदार बनाते हैं. वहीं, अगर आपको फुल फेयर्ड स्पोर्ट्स बाइक पसंद है तो RC 200 बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. RC 200 में रेसिंग इंस्पायर्ड डिजाइन, एरोडायनामिक फेयरिंग और स्पोर्टी राइडिंग पोजिशन मिलती है. ट्रैक डे या वीकेंड राइड्स पसंद करने वाले युवाओं के बीच इसकी खास पहचान है. KTM 390 Adventure: लंबी यात्राओं और ऑफ-रोडिंग का साथी एडवेंचर टूरिंग का शौक रखने वालों के लिए KTM 390 Adventure सबसे आकर्षक विकल्पों में से एक है. इसमें लंबी सस्पेंशन ट्रैवल, मजबूत चेसिस और ऑफ-रोड मोड के साथ कॉर्नरिंग ABS जैसी टेक्नोलॉजी दी गई है. खराब रास्तों और लंबी यात्राओं में यह बाइक भरोसेमंद साथी साबित होती है. ऊंचा विंडस्क्रीन और एडवेंचर-फोकस्ड डिजाइन इसे टूरिंग प्रेमियों के लिए खास बनाता है. KTM 160 Duke TFT: कम बजट में KTM का असली मजा अगर आपका बजट सीमित है लेकिन KTM का अनुभव लेना चाहते हैं, तो 160 Duke TFT सबसे सस्ता विकल्प है. इसमें 164.2cc इंजन, 5-इंच फुल-कलर TFT डिस्प्ले, स्मार्टफोन कनेक्टिविटी और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन जैसे फीचर्स दिए गए हैं. डुअल-चैनल ABS और सुपरमोटो मोड जैसी सुविधाएं इसे अपने सेगमेंट में अलग पहचान देती हैं. रोजाना इस्तेमाल करने वाले युवाओं के लिए यह शानदार विकल्प बनकर उभरी है. कौन-सी KTM आपके लिए सही रहेगी? अगर आपका फोकस हाई परफॉर्मेंस पर है तो 390 Duke सबसे मजबूत दावेदार है. संतुलित कीमत और फीचर्स चाहने वालों के लिए 250 Duke बेहतर रहेगी. स्पोर्ट्स बाइक प्रेमियों के लिए RC 200 और शहर में स्टाइलिश राइडिंग के लिए 200 Duke अच्छी पसंद है. वहीं, एडवेंचर राइडिंग पसंद करने वालों को 390 Adventure पर नजर डालनी चाहिए. कम बजट वाले खरीदार 160 Duke TFT के जरिए KTM फैमिली का हिस्सा बन सकते हैं. ये भी पढ़ें: स्पोर्ट्स बाइक खरीदनी है? KTM RC 160 में मिलते हैं दमदार इंजन और प्रीमियम फीचर्स, कीमत भी 2 लाख से कम ये भी पढ़ें: KTM 790 Duke हुई अपडेट, 105hp ताकत के साथ मिले बड़े अपडेट, जानिए पूरी डिटेल The post KTM खरीदने का है प्लान? 390 Duke से RC 200 तक, कौन-सी KTM आपके लिए है बेस्ट? appeared first on Naya Vichar.

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अनंत सिंह की जगह मोकामा से अब ये लड़ेंगे विधानसभा चुनाव, बाहुबली ने किया नाम का ऐलान

Anant Singh: मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने अगले विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वह खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनकी जगह उनके बड़े बेटे अभिषेक सिंह मोकामा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे. अनंत सिंह ने यह घोषणा रविवार को बाढ़ अनुमंडल के घोसवरी प्रखंड सभागार में आयोजित जदयू कार्यकर्ता सम्मान समारोह के दौरान की. इस कार्यक्रम में उनके बड़े बेटे अभिषेक भी मौजूद थे. ‘अब मेरा बेटा चुनाव लड़ेगा’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले ही चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर लिया था. अब उनकी जगह उनके बड़े बेटे अभिषेक जनता के बीच रहकर काम करेंगे और आने वाले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार होंगे. उन्होंने कहा कि जनता का प्यार और भरोसा हमेशा उनके साथ रहा है. जब भी लोग उन्हें बुलाएंगे, वह पहले की तरह उनके बीच आते रहेंगे. ‘समस्याएं खत्म नहीं होतीं’ अपने संबोधन में अनंत सिंह ने मोकामा की समस्याओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र की समस्याएं कभी पूरी तरह खत्म नहीं होतीं. जरूरी यह है कि उन पर लगातार काम किया जाए और लोगों की परेशानियों का समाधान किया जाए. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें अभिषेक ने भी रखी अपनी बात कार्यक्रम में मौजूद अभिषेक सिंह ने भी पहली बार खुलकर चुनाव लड़ने के सवाल पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अगर जनता उन्हें योग्य समझेगी, तो वह जरूर चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि आने वाले चार से पांच साल तक वह लगातार जनता के बीच रहेंगे. लोगों की समस्याओं को समझेंगे और उनके काम करेंगे. इसके बाद यदि जनता को लगेगा कि वह इस जिम्मेदारी के योग्य हैं, तो वह चुनाव मैदान में उतरेंगे. शिक्षा और स्वास्थ्य होगी प्राथमिकता अभिषेक सिंह ने कहा कि मोकामा के विकास के लिए उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य होगी. उनका प्रयास रहेगा कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें और विकास कार्यों को गति मिले. अनंत सिंह के इस ऐलान के बाद मोकामा की नेतृत्व में नई चर्चा शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि अब वह अपने बेटे को सक्रिय नेतृत्व में स्थापित करने की तैयारी कर चुके हैं. आने वाले विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट पर सभी की नजरें अभिषेक सिंह की भूमिका पर टिकी रहेंगी. Also Read: बांकीपुर उपचुनाव: तेज प्रताप ने बढ़ाया सस्पेंस, आखिर किसे देंगे अपना समर्थन? The post अनंत सिंह की जगह मोकामा से अब ये लड़ेंगे विधानसभा चुनाव, बाहुबली ने किया नाम का ऐलान appeared first on Naya Vichar.

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मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट, NCPI को बुलाए जाने पर आपत्ति

All Party Meeting Walkout : संसद के बेहद महत्वपूर्ण मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रविवार को सभी दलों की एक बैठक (ऑल पार्टी मीटिंग) बुलाई गई थी. केंद्र प्रशासन की ओर से बुलाई गई इस बैठक के शुरू होते ही विपक्ष ने एकजुट होकर मीटिंग से वॉकआउट कर दिया. विपक्ष द्वारा मीटिंग का बहिष्कार करने के बाद प्रशासन और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है. ये भी पढ़ें : सोनम वांगचुक के इलाज पर बना सस्पेंस : अस्पताल बोला- हर पल कीमती, परिवार की मंजूरी बाकी ​प्रशासन द्वारा बुलाई गई इस बैठक में भाग लेने के लिए कई प्रमुख विपक्षी दलों के बड़े नेता पहुंचे थे. लेकिन जैसे ही बैठक की कार्यवाही शुरू हुई, प्रशासन और विपक्ष के बीच कुछ जरूरी मुद्दों को लेकर गंभीर मतभेद सामने आ गए. इन मतभेदों के चलते बातचीत आगे बढ़ने से पहले ही विपक्षी नेताओं ने एक साथ बैठक से बाहर निकलने (वॉकआउट करने) का सामूहिक फैसला ले लिया. इस अचानक उठाए गए कदम ने प्रशासन के साथ विपक्ष के कड़े नेतृत्वक मुकाबले को और ज्यादा तेज कर दिया है. एनसीपीआई को बुलाने पर विपक्ष ने जताई आपत्ति सर्वदलीय बैठक में NCPI को बुलाए जाने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया. इससे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरे विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार कर वॉकआउट किया. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन 20 सांसदों को एनसीपीआई के नाम पर बैठक में बुलाया गया, उनके विलय को अब तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनकी अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें किस आधार पर बैठक का निमंत्रण दिया. महुआ ने कहा कि विपक्ष ने इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसी के प्रतीक के तौर पर सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट किया. टीएमसी सांसद काकोली घोष का दावा लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय हो चुका है. उन्होंने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को स्वीकार कर लिया है और सदन में एनसीपीआई के सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी. उनके इस बयान से सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई की मौजूदगी को लेकर जारी विवाद और तेज हो गया है. ये भी पढ़ें : राम मंदिर चंदा विवाद में ट्रस्ट के ऑडिट की मांग : राहुल गांधी और खरगे ने PM मोदी को लिखा पत्र क्या था मीटिंग का एजेंडा? केंद्र प्रशासन ने संसद सत्र के दौरान होने वाले संसद के कामकाज और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. हालांकि, बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद विपक्षी दलों के वॉकआउट करने से बैठक का मूल एजेंडा पीछे छूट गया और एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने का विवाद चर्चा का केंद्र बन गया. The post मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट, NCPI को बुलाए जाने पर आपत्ति appeared first on Naya Vichar.

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पीवी सिंधू ने जीता जापान ओपन का खिताब, अकाने यामागुची को हराया

स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर तोक्यो में जापान ओपन का खिताब जीता. उन्होंने फाइनल मुकाबले में सीधे सेटों में अकाने यामागुची को मात दी. खिताब जीतने के बाद पीवी सिंधू ने अपने मेंटर विमल सर को धन्यवाद करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट लिखा है. पीवी सिंधू ने अपने पोस्ट में लिखा है -बहुत-बहुत धन्यवाद, विमल सर. इतने सालों में आपके लगातार गाइडेंस, सपोर्ट और मेंटरशिप के लिए धन्यवाद. आप सच में इंडियन बैडमिंटन के सबसे अच्छे लोगों में से एक हैं. मैं हमेशा आपके और मेरे पिता के रिश्ते के लिए शुक्रगुजार हूं.वो सारी हिम्मत बढ़ाने वाली बातें, वो सारे लंबे मैसेज, जिसने मेरा हौसला बढ़ाया.प्लीज इंडियन बैडमिंटन की रीढ़ बने रहें. आप जैसे बहुत कम लोग हैं. The post पीवी सिंधू ने जीता जापान ओपन का खिताब, अकाने यामागुची को हराया appeared first on Naya Vichar.

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8th Pay Commission : 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग से ₹18,000 बेसिक सैलरी हो सकती है ₹68,940? जानिए पूरा गणित

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्र प्रशासन के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच चर्चा तेज हो गई है. आयोग देशभर में कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों से सुझाव ले रहा है. इसी दौरान स्टाफ साइड ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर, ₹69,000 न्यूनतम बेसिक वेतन, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और HRA बढ़ाने जैसी मांगें रखी हैं. हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल आयोग ने फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन या किसी वेतन वृद्धि को लेकर कोई आधिकारिक सिफारिश या घोषणा नहीं की है. इसलिए ₹68,940 बेसिक पे की चर्चा केवल कर्मचारी संगठनों की मांग पर आधारित संभावित गणना है. 8वें वेतन आयोग का ताजा अपडेट 8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग फिलहाल देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स एसोसिएशन और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर रहा है. इन सुझावों के आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे केंद्र प्रशासन को सौंपा जाएगा. कर्मचारी संगठनों ने क्या-क्या मांग रखी है? स्टाफ साइड ने आयोग के सामने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं. प्रमुख मांगें न्यूनतम बेसिक वेतन ₹69,000 किया जाए. 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए. पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए. हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी की जाए. कर्मचारियों के अन्य भत्तों की भी समीक्षा की जाए. इन सभी मांगों पर अंतिम फैसला आयोग की सिफारिश और केंद्र प्रशासन की मंजूरी के बाद ही होगा. क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) है, जिसके आधार पर कर्मचारियों का नया बेसिक वेतन तय किया जाता है. 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था. इसी के आधार पर न्यूनतम बेसिक वेतन ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किया गया था. यदि भविष्य में 3.83 फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है, तो वर्तमान बेसिक वेतन उसी अनुपात में संशोधित होगा. वर्तमान बेसिक पे प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर संभावित नया बेसिक पे* ₹18,000 3.83 ₹68,940 नोट: यह केवल कर्मचारी संगठनों की मांग के आधार पर संभावित गणना है. आयोग या केंद्र प्रशासन ने अभी इसकी मंजूरी नहीं दी है. 7वें और 8वें वेतन आयोग में क्या अंतर हो सकता है? विषय 7वां वेतन आयोग 8वां वेतन आयोग (वर्तमान स्थिति) न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 ₹69,000 की मांग फिटमेंट फैक्टर 2.57 3.83 की मांग OPS लागू नहीं बहाली की मांग HRA वर्तमान व्यवस्था बढ़ाने की मांग स्थिति लागू विचाराधीन कितने लोगों पर पड़ेगा असर? 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर इसका सीधा असर पड़ेगा. लगभग 50 लाख केंद्रीय प्रशासनी कर्मचारियों पर. करीब 70 लाख पेंशनभोगियों पर. इनमें रेलवे, रक्षा सेवाओं और अन्य केंद्रीय विभागों के कर्मचारी एवं पेंशनर्स शामिल हैं. आयोग अब तक कहां-कहां कर चुका है बैठक? आयोग लगातार विभिन्न राज्यों में बैठकें आयोजित कर रहा है. अब तक आयोग ने. दिल्ली जम्मू-कश्मीर लखनऊ सहित कई स्थानों पर कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स से चर्चा की है. आगे भी विभिन्न राज्यों में संवाद का सिलसिला जारी रहेगा. आगे क्या होगा? 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तय समय सीमा के भीतर केंद्र प्रशासन को सौंपनी है. इसके बाद प्रक्रिया इस प्रकार होगी. आयोग अपनी सिफारिशें देगा. केंद्र प्रशासन उनका अध्ययन करेगी. केंद्रीय मंत्रिमंडल अंतिम निर्णय लेगा. मंजूरी मिलने के बाद नया वेतन और पेंशन लागू किए जाएंगे. इसलिए फिलहाल वेतन वृद्धि या फिटमेंट फैक्टर को लेकर किसी भी दावे को अंतिम नहीं माना जा सकता. क्या ₹69,000 न्यूनतम वेतन तय होना तय है? नहीं. अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा. ₹69,000 न्यूनतम बेसिक वेतन और 3.83 फिटमेंट फैक्टर कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव हैं. आयोग इन सुझावों पर विचार करेगा, लेकिन अंतिम सिफारिशें अलग भी हो सकती हैं. अंतिम निर्णय केंद्र प्रशासन की मंजूरी के बाद ही प्रभावी होगा. ये भी पढ़ें: 8वें वेतन आयोग में बढ़ सकता है HRA, जानिए किसे मिल सकता है ₹73860 तक का फायदा  The post 8th Pay Commission : 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग से ₹18,000 बेसिक सैलरी हो सकती है ₹68,940? जानिए पूरा गणित appeared first on Naya Vichar.

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Sonam Wangchuk का आंदोलन, क्यों नहीं बन सका दूसरा ‘अन्ना आंदोलन’?

Sonam Wangchuk का आमरण अनशन हिंदुस्तानीय लोकतंत्र के लिए एक अहम घटना रही. इसकी शुरुआत शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों, खासकर NEET और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बीच हुई थी. वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनाया और इसे ‘पैसिव रेजिस्टेंस’ (शांतिपूर्ण प्रतिरोध), यानी अहिंसक विरोध का एक रूप बताया.  हालांकि उनके शांतिपूर्ण आंदोलन ने नैतिक दबाव तो बनाया, लेकिन यह उस बड़े जन-आंदोलन में नहीं बदल पाया जिसकी उम्मीद उनके समर्थकों ने की थी. यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सोनम वांगचुक का आंदोलन उस देश में उम्मीद के मुताबिक जन-समर्थन क्यों नहीं जुटा पाया, जहां महात्मा गांधी के सत्याग्रह ने ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी, जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से सत्ता बदली थी, और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान ने राष्ट्रीय नेतृत्व की दिशा बदल दी थी.  इसका जवाब सिर्फ प्रशासन के रवैये में ही नहीं, बल्कि आंदोलन के ढांचे, विपक्ष की नेतृत्व, PM मोदी की रणनीतिक समझ को ना भेद पाना और बदलते लोकतांत्रिक माहौल में भी छिपा है. आंदोलन की सबसे बड़ी कमजोरी: मजबूत संगठन का अभाव किसी भी बड़े जनांदोलन की सफलता केवल उसकी नैतिक शक्ति पर निर्भर नहीं करती. उसके पीछे एक सुविचारित संगठनात्मक ढांचा, स्पष्ट रणनीति और दीर्घकालिक कार्ययोजना भी आवश्यक होती है. सोनम वांगचुक का आंदोलन शिक्षा सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर आधारित था, लेकिन यह शुरुआत से ही एक सीमित दायरे में सिमट गया. इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि यह छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, विश्वविद्यालयों, शिक्षा विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों को एक साझा मंच पर नहीं ला सका. आंदोलन का केंद्र धीरे-धीरे शिक्षा व्यवस्था से हटकर केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित हो गया. इससे मूल प्रश्न, परीक्षा प्रणाली में सुधार कही पीछे छूट गया और पूरा विमर्श व्यक्तिकेंद्रित यानि सोनम वांगचुक के इर्द-गिर्द दिखाई देने लगा. इतिहास बताता है कि सफल आंदोलन किसी व्यक्ति के विरोध पर नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की व्यापक मांग पर टिके होते हैं. यही वह बिंदु था, जहां यह आंदोलन अपनी संभावनाओं से पीछे रह गया. अन्ना आंदोलन से तुलना क्यों जरूरी है? 2011 का अन्ना हजारे आंदोलन केवल भ्रष्टाचार विरोधी अभियान नहीं था. वह एक सुव्यवस्थित सामाजिक आंदोलन था. उसमें पूर्व नौकरशाह, न्यायविद, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, मध्यम वर्ग, उद्योग जगत और मीडिया- सभी की सक्रिय भागीदारी थी.  आंदोलन के पास स्पष्ट मांग थी- जनलोकपाल कानून.  उसके पास रणनीति थी, नेतृत्व था, संवाद था और पूरे देश में स्वयंसेवकों का मजबूत नेटवर्क था। इसके विपरीत, सोनम वांगचुक के आंदोलन में ऐसी व्यापक सामाजिक भागीदारी दिखाई नहीं दी. न तो बड़े छात्र संगठनों का संगठित समर्थन मिला, न ही विश्वविद्यालयों की निर्णायक भागीदारी दिखी. नागरिक समाज के वे चेहरे भी अनुपस्थित रहे जिन्होंने अन्ना आंदोलन को राष्ट्रीय स्वरूप दिया था. यही कारण है कि यह आंदोलन नैतिक रूप से प्रभावशाली होने के बावजूद नेतृत्वक और सामाजिक रूप से सीमित रह गया. विपक्ष की दूरी: नेतृत्वक मजबूरी या रणनीति? पहली नजर में यह आश्चर्यजनक लगता है कि परीक्षा घोटालों जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष पूरी ताकत से आंदोलन के साथ क्यों नहीं खड़ा हुआ. लेकिन नेतृत्व केवल नैतिकता से नहीं, रणनीति से भी संचालित होती है. सोनम वांगचुक ने आंदोलन का मुख्य लक्ष्य धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बनाया. इससे पूरा संघर्ष एक मंत्री तक सीमित होता दिखाई दिया. विपक्ष के लिए यह एक नेतृत्वक दुविधा थी. यदि वह पूरी तरह इस आंदोलन के साथ खड़ा होता, तो उसका स्वतंत्र नेतृत्वक एजेंडा कमजोर पड़ सकता था. दूसरी ओर, यदि आंदोलन केवल एक मंत्री के खिलाफ सीमित रहता, तो उससे पूरी मोदी प्रशासन को नेतृत्वक रूप से घेरना कठिन हो जाता. यही कारण है कि विपक्ष का समर्थन प्रतीकात्मक यानि सिंबॉलिक अधिक दिखाई दिया, निर्णायक कम. जो भी मजबूरी हो, पर राहुल गांधी जैसे नेताओं की सीमित उपस्थिति भी इसी रणनीतिक संकोच का संकेत मानी गई. विपक्ष ने परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे को तो उठाया, लेकिन आंदोलन को अपने नेतृत्वक अभियान का केंद्रीय आधार नहीं बनाया. नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Qatar : जब रेगिस्तान से निकला पेट्रोल और गैस से भी बड़ा खजाना… कहानी Qatar, Al-Jazeera और Sheikh Hamad की नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Pacific : चीन के खिलाफ, हिंदुस्तान के लिए क्यों हैं Australia और New Zealand खास नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Indonesia : पीएम मोदी की यात्राएं टूरिज्म ट्रिप नहीं, चीन के लिए जाल ‌बिछा रहे हैं नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : अमेरिका-ईरान में फिर बमबारी… दूसरा ‘रूस-यूक्रेन’ बनाने पर आमादा क्यों है अमेरिका? प्रशासन की रणनीति: संवेदनशीलता और नेतृत्वक यथार्थ का संतुलन प्रशासन का रवैया भी उल्लेखनीय रहा. उसने आंदोलन को पूरी तरह कुचलने की कोशिश नहीं की, लेकिन उसकी प्रमुख मांगों पर औपचारिक नेतृत्वक वार्ता भी नहीं की. दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस ने स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए हस्तक्षेप किया. प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उसकी प्राथमिकता प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है. साथ ही, प्रशासन इस बात से भी भलीभांति परिचित थी कि यदि किसी आंदोलन के दबाव में एक कार्यरत केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता, तो भविष्य में यह एक नेतृत्वक मिसाल बन सकती थी. इसलिए प्रशासन ने नैतिक दबाव को स्वीकार करने और नेतृत्वक मांग को अस्वीकार करने की दोहरी रणनीति अपनाई. यह आधुनिक हिंदुस्तानीय नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता भी है, जहां प्रशासनें विरोध प्रदर्शनों को पूरी तरह दबाने के बजाय उन्हें सीमित नेतृत्वक प्रभाव तक नियंत्रित रखने की कोशिश करती हैं. क्या आंदोलन ने प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्वक कौशल को कम आंका? सोनम वांगचुक आंदोलन का एक बड़ा नेतृत्वक आकलन शायद यह था कि लंबे अनशन और नैतिक दबाव से प्रशासन झुक जाएगी. लेकिन पिछले एक दशक की हिंदुस्तानीय नेतृत्व कुछ अलग संकेत देती है. नरेंद्र मोदी प्रशासन ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ लंबे आंदोलन देखे. कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक किसान आंदोलन का सामना किया. विभिन्न राज्यों में आरक्षण, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर भी बड़े प्रदर्शन हुए. इन आंदोलनों के अनुभवों ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान प्रशासन केवल सड़क पर बने दबाव के आधार पर त्वरित नेतृत्वक निर्णय लेने से बचती

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लाडले और लाडली के लिए चुनें ऐसा नाम, जो सुनते ही दिल को भा जाए

Baby Names: नाम तो बहुत मिल जाएंगे, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो सुनते ही खास लगते हैं. अगर आप अपने शिशु के लिए किसी आम नाम की जगह कुछ यूनिक और खूबसूरत नाम ढूंढ रहे हैं, तो कीमती रत्नों से प्रेरित ये नाम आपको जरूर पसंद आएंगे. इन नामों की खास बात यह है कि हर नाम किसी न किसी खूबसूरत रत्न से जुड़ा है और अपने साथ एक खास अर्थ भी रखता है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ नाम, जो आपके शिशु को सबसे अलग पहचान दे सकते हैं. इन खूबसूरत नामों के पीछे छिपे हैं दिलचस्प अर्थ नाम अर्थ माणिक कीमती रत्न, चमक, शक्ति और समृद्धि जेड शांति, समझदारी, सौभाग्य और समृद्धि रूबी प्यार, साहस, जुनून और जीवन कोरल सुरक्षा, जीवन और समुद्र की खूबसूरती रत्ना रत्न, गहना या अनमोल खजाना नील गहराई, शांति, ज्ञान और मजबूती नीलम ज्ञान, सच्चाई और सौभाग्य पन्ना शांति, समृद्धि और प्राकृतिक सुंदरता ओपल रचनात्मकता, खूबसूरती और खास व्यक्तित्व हीरा मजबूती, चमक और अनमोल होने का भाव मोती सादगी, पवित्रता और अनमोलता माणिक्या शक्ति, चमक और समृद्धि माणिक (Manik) माणिक नाम संस्कृत के ‘माणिक्य’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ कीमती रत्न या रूबी होता है. यह नाम चमक, शक्ति और समृद्धि से जुड़ा है. हिंदुस्तानीय परंपरा से जुड़ा होने के बावजूद यह नाम आज भी काफी खास लगता है. जेड (Jade) हरे रंग के खूबसूरत रत्न से प्रेरित जेड एक छोटा और स्टाइलिश नाम है. यह नाम शांति, समझदारी, सौभाग्य और समृद्धि से जुड़ा माना जाता है. इसकी खास बात यह है कि यह लड़के और लड़की, दोनों के लिए रखा जा सकता है. रूबी (Ruby) गहरे लाल रंग के कीमती रत्न रूबी से प्रेरित यह नाम लड़कियों के लिए काफी खूबसूरत है. रूबी नाम प्यार, साहस, जुनून और जीवन से जुड़ा माना जाता है. क्लासिक होने के बावजूद यह नाम आज भी काफी स्टाइलिश लगता है. कोरल (Coral) समुद्र से जुड़े खूबसूरत रत्न कोरल से प्रेरित यह नाम काफी अलग और प्यारा है. यह नाम सुरक्षा, जीवन और समुद्र की खूबसूरती का एहसास कराता है. कुछ हटकर नाम चाहने वाले माता-पिता के लिए कोरल एक अच्छा विकल्प हो सकता है. रत्ना (Ratna) रत्ना एक खूबसूरत संस्कृत नाम है, जिसका अर्थ रत्न, गहना या अनमोल खजाना होता है. यह नाम हिंदुस्तानीय संस्कृति से जुड़ा होने के साथ ही सुंदरता, समृद्धि और अनमोल होने का भाव भी दर्शाता है. नील (Neel) नील नाम का संबंध नीले रंग और नीलम जैसे कीमती रत्न से माना जाता है. यह नाम गहराई, शांति, ज्ञान और मजबूती का प्रतीक है. छोटा और दमदार नाम पसंद करने वालों के लिए नील एक अच्छा विकल्प है. नीलम (Neelam) नीलम नीले रंग के बेहद खूबसूरत रत्न का नाम है. हिंदुस्तानीय परंपरा में इसे ज्ञान, सच्चाई और सौभाग्य से जोड़ा जाता है. यह नाम पारंपरिक होने के साथ-साथ काफी सुंदर और अर्थपूर्ण भी है. पन्ना (Panna) हरे रंग के चमकदार रत्न पन्ना से प्रेरित यह नाम काफी खूबसूरत है. पन्ना नाम शांति, समृद्धि और प्राकृतिक सुंदरता से जुड़ा माना जाता है. यह लड़कियों के लिए एक प्यारा और अर्थपूर्ण नाम हो सकता है. ओपल (Opal) ओपल अपनी अलग-अलग रंगों वाली चमक के लिए जाना जाता है. इसी वजह से यह नाम रचनात्मकता, खूबसूरती और खास व्यक्तित्व से जुड़ा माना जा सकता है. मॉडर्न और यूनिक नाम पसंद करने वालों के लिए ओपल एक शानदार विकल्प है. हीरा (Heera) हीरा दुनिया के सबसे कीमती और चमकदार रत्नों में से एक है. यह नाम मजबूती, चमक और अनमोल होने का प्रतीक माना जाता है. छोटा, प्यारा और अर्थपूर्ण नाम चाहने वालों के लिए हीरा एक खूबसूरत विकल्प है. मोती (Moti) मोती एक ऐसा नाम है, जिसकी खूबसूरती कभी पुरानी नहीं होती. यह नाम सादगी, पवित्रता और अनमोल होने का भाव दर्शाता है. पारंपरिक नामों की लिस्ट में मोती आज भी अपनी अलग जगह रखता है. माणिक्या (Manikya) माणिक्या नाम का संबंध लाल रंग के कीमती रत्न रूबी से है. यह नाम शक्ति, चमक और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. हिंदुस्तानीय संस्कृति से जुड़ा यह नाम सुनने में काफी रॉयल और खास लगता है. यह भी पढ़ें: अपनी बेटी के लिए चुनें मां पार्वती से जुड़े ये सुंदर नाम, जो बनेंगे उसकी खास पहचान The post लाडले और लाडली के लिए चुनें ऐसा नाम, जो सुनते ही दिल को भा जाए appeared first on Naya Vichar.

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