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फ्लाईदुबई की घटना से याद आया 50 साल पुराना एंटेबे हाइजैक, जब 100 यहूदियों को छुड़ाने दुश्मन देश में घुस गई थी इजरायली सेना, नेतन्याहू के भाई ने संभाला था मोर्चा

Operation Thunderbolt : 30 सितंबर 2026 की सुबह दुबई एयरपोर्ट पर एक फ्लाईदुबई के बोइंग 737 MAX 8 विमान उड़ान भरने के लिए तैयार था. यात्री अपने परिजनों से विदा लेकर विमान में सवार हुए. विमान को इजरायल के तेल अवीव पहुंचना था. कुछ ही घंटों बाद विमान के दो पायलटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया. दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला चाकूबाजी तक पहुंच गया. को-पायलट ने साथी पायलट पर चाकू से हमला किया और विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की. 1 मिनट के अंदर विमान करीब 17 हजार फीट नीचे आ गया. टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट को हाईजैक कर क्रैश कराने की भी कोशिश हुई. हालांकि, पायलट और कुछ यात्रियों ने हाथापाई कर उसे रोक लिया. 180 यात्रियों से भरे इस विमान में 150 यहूदियों को बचाने के लिए इजराइल ने तुरंत फाइटर जेट्स रवाना कर दिए. इन उनकी निगरानी में फ्लाइट का रास्ता बदला गया और उसे सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. यात्रियों के परिजनों को समाचार मिली कि विमान को हाइजैक कर लिया गया है. हालांकि, बाद में सामने आया कि यह हाइजैक की घटना नहीं है. फ्लाईदुबई की यह फ्लाइट हाइजैक होने से तो बच गई, लेकिन इस घटना ने 50 साल पुरानी एंटबे हाइजैक घटना की याद ताजा कर दी है. आज उसी एंटबे हाइजैक की कहानी जानते हैं… तारीख, 29 जून 1976. इजरायल का फेमस बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जहां से फ्लाइट AF 139 को सुबह 9 बजे टेक ऑफ करना था. फ्लाइट का अगला स्टॉपेज था ग्रीस का एथेंस एयरपोर्ट. दो संगठनों ने मिलकर बनाया था प्लान चारों आतंकवादियों में से दो, जैल और फैज, PLFP ग्रुप से थे, जो इजरायल और फिलिस्तीन की लड़ाई में फिलिस्तीन की ओर से अपनी आजादी के लिए लड़ रहे थे. वहीं बाकी दो हाईजैकर ब्रिजिट और विल्फ्रेड जर्मनी के रिवॉल्यूशनरी सेल से थे. ये उन ग्रुप के सदस्य थे, जो जर्मनी और दूसरे देश में चल रहे अमेरिका की मनमानी के खिलाफ लड़ रहे थे. कैद साथियों की रिहाई थी मकसद इजरायल के इस प्लान हाईजैकिंग में इन दोनों ग्रुप का साथ आने का जो लक्ष्य था, वो ये कि ये अपने लोगों को, जो इजरायल की जेल में बंद थे, उन्हें छुड़ाना चाहते थे. करीब 3 बजते-बजते हाईजैक हो चुका प्लेन अब लीबिया के बेनगाजी के एयर स्पेस में पहुंच जाता है. हाईजैकर के दबाव में आकर फ्लाइट कैप्टन लीबिया एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से बात कर के सारा माजरा समझता है. वह बताता है कि प्लेन हाईजैक हो चुका है. कुछ देर की बातचीत के बाद प्लेन को बेनगाजी एयरपोर्ट में लैंड करने की परमिशन मिल जाती है. बेनगाजी में कुछ घंटे रुका विमान लीबिया में लैंड करने के बाद आतंकवादियों से मिलने लीबिया की ओर से ऑफिसर्स आते हैं. आतंकवादी उनसे इतने नाम से बेखौफ होकर मिलते हैं. उनमें से एक हाईजैकर सभी यात्रियों के पासपोर्ट ले लेता है. सारी चीज ऐसी चल रही थी, जैसे कुछ हुआ ही ना हो. करीब 6 से 7 घंटे बेनगाजी एयरपोर्ट पर रुकने के बाद प्लेन वापस टेक ऑफ कर जाता है. नॉर्मल तरीके से बीच-बीच में हाईजैकर अनाउंसमेंट करते रहते हैं. यात्रियों के बीच एक बार फिर हड़कंप मच जाता है, जब उन्हें पता लगता है कि अब उनका प्लान युगांडा की ओर मोड़ दिया गया है. Yitzhak Rabin, इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री परिवारों के दबाव में इजरायली प्रशासन इन सब के बीच हाईजैक कर लिए गए पैसेंजर्स के परिवार वाले इजरायली प्रशासन पर दबाव बनाने लगे थे. प्रशासन के ऑफिस में घुसकर हल्ला करने लगे थे, कहीं तोड़फोड़ भी की जाने लगी थी. गवर्नमेंट में इस बात का भी प्रेशर था कि अगर वह यात्रियों को छुड़ाने में सफल नहीं होते, तो बात उनकी सत्ता पर आ जाएगी. किसी एक यात्री को भी कुछ हो जाता है, तो जनता कभी माफ नहीं करेगी और दोबारा वह कभी पावर में नहीं आ पाएंगे. उस समय इजरायल के प्रधानमंत्री थे Yitzhak Rabin. प्रधानमंत्री राबिन ने एक मीटिंग बुलाई और यह कहा कि हाईजैकर्स की मांग मान लेनी चाहिए. हम अपने यात्रियों की जान जोखिम में नहीं डाल सकते. लेकिन इस डिस्कशन में शामिल इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर Shimon Peres अड़ जाते हैं कि बंधक बनाए गए आतंकवादियों को अगर छोड़ दिया जाए, तो अभी जितना डैमेज हो सकता है, यह उससे कहीं अधिक डैमेज पहुंचाएंगे. प्रधानमंत्री और डिफेंस मिनिस्टर के बीच तनातनी जैसा माहौल भी बन जाता है. लेकिन अंत में यह फैसला किया जाता है कि एक प्रॉपर प्लान बनाया जाए, इसके बाद देखें कि क्या हो सकता है. योनातन नेतन्याहू, बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई कमांडो लेकर युगांडा रवाना हुए विमान सारी चीज फाइनल होने के बाद अब चारों प्लेन ऑपरेशन थंडरबोल्ट के लिए उड़ान भरते हैं. जिसके पीछे दो बोइंग के पैसेंजर प्लेन भी चल पड़ते हैं. इन्हें बैकअप के लिए रखा गया था. इन चारों प्लेन में से पहले जो प्लेन था, जिसे सबसे पहले युगांडा में लैंड होना था, उसमें 29 लोगों की टीम थी. जिसे लीड कर रहे थे बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई योनातन (योनी) नेतन्याहू. बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री बन पाए, इसके पीछे इस ऑपरेशन और उनके बड़े भाई की सफलता बहुत बड़ा रोल निभाती है. Entebbe इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एरियल व्यू सफेद मर्सिडीज ने बढ़ाई परेशानी यहां पर एक बहुत बड़ी दिक्कत यह आ जाती है कि इजरायल के पास यह इनपुट नहीं होता कि ईदी अमीन जिस मर्सिडीज से ट्रेवल कर रहा है, वह ब्लैक नहीं बल्कि व्हाइट कलर की है. फेक काफिले का सामना सबसे पहले दो सैनिकों से होता है. ब्लैक की जगह व्हाइट मर्सिडीज देखकर दोनों में से एक सैनिक को शक हो जाता है कि आज अगर अमीन ब्लैक मर्सिडीज से क्यों नहीं आ रहे हैं. शक की आड़ में ही वह काफिले को रोक देता है. एक दिक्कत और आ जाती है. इजरायल के प्लान के मुताबिक उन्हें किसी भी युगांडा के सैनिकों पर हमला नहीं करना था, ताकि वॉर जैसी सिचुएशन को अवॉइड किया जा सके. लेकिन काफिले में बैठे एक इजरायली कमांडो ने अपनी साइलेंट गन

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ससुराल ने गाने से रोका, ऑडिशन में मिली ठोकर, 76 रुपये से शुरू हुआ सफर… फिर शारदा सिन्हा की आवाज बनी छठ की पहचान

एक दुल्हन विदा होने वाली थी. घर में रोने की आवाजें थीं. आंखों में आंसू थे. तभी पिता ने कहा—एक गीत गाओ. दुल्हन ने गाना शुरू किया. वह दुल्हन कोई और नहीं, शारदा सिन्हा थीं. जिस आवाज में उस दिन अपनी विदाई का दर्द था, वही आवाज कुछ सालों बाद हजारों बेटियों की विदाई का गीत बनने वाली थी. और फिर एक दिन ऐसा आया, जब छठ के घाटों पर उगते सूर्य से पहले लोगों को शारदा सिन्हा की आवाज सुनाई देने लगी. लेकिन इस आवाज तक पहुंचना इतना आसान नहीं था. ससुराल में गाने से रोकने की कोशिश हुई. मंच पर जाने को लेकर विरोध हुआ. शुरुआती सफर में कई मुश्किलें आईं. फिर बॉलीवुड का दरवाजा खुला तो ‘कहे तोसे सजना’ के लिए मिले सिर्फ 76 रुपये. रकम छोटी थी, लेकिन कहानी बहुत बड़ी होने वाली थी. क्योंकि यह सिर्फ एक गायिका के मशहूर होने की कहानी नहीं थी. यह उस स्त्री की कहानी थी जिसने परिवार, विरोध और जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज को बचाए रखा—और आखिरकार वही आवाज बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गई. आज 1 अक्टूबर को उनकी जयंती पर जब शारदा सिन्हा को याद किया जा रहा है, तो उनकी जिंदगी के ये किस्से बताते हैं कि ‘बिहार कोकिला’ बनने से पहले उन्होंने कितनी लंबी यात्रा तय की थी. जिस घर में बहू के गाने पर आपत्ति थी, वहीं से निकली छठ की आवाज शादी के बाद शारदा सिन्हा के सामने पहली बड़ी चुनौती संगीत को लेकर ही आई. उनकी सास को उनका बाहर जाकर गाना पसंद नहीं था. लेकिन पति ब्रजकिशोर सिन्हा ने उनका साथ दिया. शारदा सिन्हा ने खुद कई मौकों पर बताया था कि उनके पति उनके संगीत के सबसे बड़े समर्थकों में थे. एक वक्त था जब लोग यह तक पूछते थे कि पत्नी को गाने-बजाने की अनुमति देने वाला पति कैसा है. फिर जब शारदा सिन्हा की आवाज लोगों तक पहुंची और उनके गीत लोकप्रिय हुए, वही नजरिया बदलता गया. यानी जिस आवाज को रोकने की कोशिश हो रही थी, वही धीरे-धीरे लोगों की आवाज बनने लगी. 19 साल की उम्र में बेगम अख्तर के सामने पहुंचीं, फिर बदल गई कहानी शारदा सिन्हा का संगीत सफर भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. करीब 19 साल की उम्र में वह लखनऊ में HMV के टैलेंट ऑडिशन के लिए पहुंची थीं. संयोग से उस ऑडिशन में महान गायिका बेगम अख्तर बतौर अतिथि निर्णायक मौजूद थीं. शारदा सिन्हा ने मैथिली का विवाह गीत सुनाया. बेगम अख्तर उनकी आवाज से प्रभावित हुईं और उन्हें रियाज जारी रखने की सलाह दी. यही मौका उनके संगीत सफर की एक बड़ी सीढ़ी बना. आगे चलकर यही आवाज 1500 से ज्यादा गीतों तक पहुंची और मैथिली, भोजपुरी, मगही, हिंदी समेत कई भाषाओं में अपनी पहचान बनाई. अपनी ही विदाई में गाया गीत, फिर बन गईं विदाई के गीतों की आवाज अपनी शादी की विदाई से कुछ घंटे पहले शारदा सिन्हा ने पिता के कहने पर विदाई गीत गाया था. वह खुद याद करती थीं कि माहौल बेहद भावुक था और सभी रो रहे थे, फिर भी उन्होंने गीत गाया. बाद में उनकी आवाज में गाए शादी के गीत घर-घर पहुंचे. यह संयोग कितना खूबसूरत है—जिस लड़की ने अपनी विदाई में गीत गाया था, वही आगे चलकर अनगिनत बेटियों की विदाई की आवाज बन गई. और शायद यही वजह है कि उनके गीतों में सिर्फ सुर नहीं सुनाई देते थे. रिश्तों की कसक भी सुनाई देती थी. बॉलीवुड में पहुंचीं तो 76 रुपये मिले लोकगीतों से अपनी अलग पहचान बना चुकी शारदा सिन्हा की आवाज बॉलीवुड तक पहुंची. सलमान खान और भाग्यश्री की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के गीत ‘कहे तोसे सजना’ में उनकी आवाज सुनाई दी. इस गाने के लिए उन्हें 76 रुपये मिलने की बात कई रिपोर्टों में दर्ज है. इसके बाद ‘हम आपके हैं कौन’ का विदाई गीत ‘बाबुल जो तुमने सिखाया’ और बाद में ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का ‘तार बिजली से पतले’ जैसे गीतों ने उनकी आवाज को फिल्मों में भी अलग पहचान दी. लेकिन फिल्मों की चमक के बावजूद शारदा सिन्हा की असली पहचान लोकगीत ही रहे. फिर छठ आया और शारदा सिन्हा की आवाज घर-घर पहुंच गई उनके करियर का सबसे बड़ा रिश्ता छठ से बना. ‘केलवा के पात पर’, ‘सुनअ छठी माई’, ‘पटना के घाट पर’ जैसे गीतों ने उन्हें छठ के गीतों की सबसे पहचानी जाने वाली आवाजों में शामिल कर दिया. उनके गीतों की लोकप्रियता बिहार से बाहर भी लगातार फैलती गई. और यहां उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत विरोधाभास सामने आता है. जिस पर्व की आवाज वह बन गईं, उसका व्रत उन्होंने खुद नहीं रखा था. वह कहती थीं कि छठ के गीत ही उनका अर्घ्य हैं और इन गीतों के जरिए लोगों को छठ से जोड़ना उनकी जिम्मेदारी है. उनकी आवाज में ‘वाह’ नहीं, ‘आह’ चाहिए थी उनकी गुरु पन्ना देवी ने उनकी आवाज की एक खासियत बहुत पहले पहचान ली थी. उनके मुताबिक शारदा सिन्हा की आवाज में ऐसी कसक थी कि गाते वक्त सिर्फ ‘वाह’ नहीं, ‘आह’ निकलनी चाहिए. यही कसक उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई. उनके गीतों में शादी थी, लेकिन विदाई भी थी. उत्सव था, लेकिन विरह भी था. छठ की आस्था थी, लेकिन परदेस गए अपनों की याद भी थी. इसलिए शायद उनकी आवाज सुनते ही लोगों को सिर्फ गीत नहीं, अपना घर याद आता था. आखिरी वक्त तक नहीं टूटा छठ से रिश्ता जिंदगी के आखिरी दौर में भी शारदा सिन्हा की आवाज छठ से जुड़ी रही. एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अपना अंतिम छठ गीत ‘दुखवा मिटाई छठी मइया’ रिकॉर्ड किया. छठ से कुछ दिन पहले यह गीत सामने आया था. 5 नवंबर 2024 को 72 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ. लेकिन उनकी आवाज वहीं रह गई, जहां से उनका सफर शुरू हुआ था—लोकगीतों में, घरों में और छठ के घाटों पर. आज भी छठ आते ही जब कहीं दूर से शारदा सिन्हा की आवाज सुनाई देती है, तो लगता है जैसे कोई बहुत अपना पुकार रहा हो. ससुराल ने रोकने की कोशिश की थी. सफर में मुश्किलें आईं. बॉलीवुड में शुरुआत 76 रुपये से हुई. लेकिन शारदा सिन्हा

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मलाइका से काजल राघवानी तक तेजू भैया के फैन, परिवार-पार्टी से हुए बाहर, अब सहवाग के शो में छाए… रियलिटी शो से कैसे बने ‘कमबैक किंग’?

टूटी शादी से सोशल मीडिया तक, अपनी पार्टी बनाने से लेकर अध्यात्म की राह तक… तेज प्रताप यादव ने हर बड़े झटके के बाद खुद को नए अंदाज में पेश किया, अब रियलिटी शो में उसी ‘तेजू भईया’ अंदाज का जलवा देखने को मिल रहा है. ‘राइज ऐंड फॉल 2’ OTT पर आते ही चर्चा में है. सोशल मीडिया पर शो की क्लिप्स, मीम्स और कंटेस्टेंट्स की केमिस्ट्री खूब वायरल हो रही है. लेकिन इन सबके बीच तेज प्रताप यादव का अंदाज सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है. कभी हंसी-मजाक, कभी बेबाक बातें, कभी अचानक पंचलाइन और कभी बेहद शांत रहकर पूरा माहौल पढ़ना—तेज प्रताप धीरे-धीरे शो के उन चेहरों में शामिल होते दिख रहे हैं, जिन पर कैमरे की नजर बार-बार जाती है. मनीष कश्यप के साथ उनकी जुगलबंदी हो, शहजाद पूनावाला के साथ नेतृत्वक बातचीत या काजल राघवानी और इरीना के साथ उनकी फ्लर्टिंग—तेज प्रताप इस बार सिर्फ नेतृत्व से आए कंटेस्टेंट नहीं लग रहे, बल्कि एक एंटरटेनर के तौर पर भी अपनी जगह बनाते दिख रहे हैं. लेकिन तेज प्रताप का यह ‘तेजू भईया’ वाला अंदाज अचानक नहीं आया है. उनकी जिंदगी को थोड़ा पीछे जाकर देखें तो पिछले कुछ सालों में उन्होंने कई बड़े झटके देखे हैं. और दिलचस्प बात यह है कि हर बार झटका लगने के बाद उन्होंने खुद को किसी नए रूप में पेश किया. पहला झटका: निजी जिंदगी में उथल-पुथल और फिर सोशल मीडिया का रास्ता तेज प्रताप की शादी और निजी जिंदगी लंबे समय तक सुर्खियों में रही. शादीशुदा जिंदगी में विवाद और तलाक की समाचारों ने उन्हें लगातार समाचारों में बनाए रखा. इस पूरे दौर में सोशल मीडिया उनके लिए एक नया मंच बनकर सामने आया. वह कभी छत पर रील बनाते दिखे, कभी गाना गाते और कभी अपने बिल्कुल अलग अंदाज में वीडियो शेयर करते. शुरुआत में खूब ट्रोलिंग हुई, memes बने और उनका मजाक भी उड़ाया गया. लेकिन तेज प्रताप ने इसी चीज को धीरे-धीरे अपनी ताकत में बदल लिया. लोग उनकी निजी जिंदगी की चर्चा करने के बजाय उनकी रील्स और वीडियो की बात करने लगे. यहीं से एक नेता के साथ-साथ ‘सोशल मीडिया वाले तेजू भईया’ की पहचान भी बनने लगी. फिर आया दूसरा मोड़: नेतृत्वक झटका और अपनी राह सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने के बाद तेज प्रताप की जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आया. 2025 में RJD से निष्कासन के बाद उनके सामने नेतृत्वक भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ. लेकिन यहां भी तेज प्रताप ने पीछे हटने के बजाय अपनी अलग राह चुनी. उन्होंने अपनी नेतृत्वक पार्टी जन शक्ति जनता दल बनाई और अपने दम पर नेतृत्वक जमीन तैयार करने की कोशिश की. चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात जरूर दिखा दी—जिस मंच से उन्हें अलग किया गया, उसी के बाहर उन्होंने अपना नया मंच खड़ा करने की कोशिश की. तीसरा मोड़: नेतृत्व से ज्यादा भारी पड़ा परिवार लेकिन नेतृत्वक लड़ाई के बीच एक और मोर्चा था, जो शायद ज्यादा निजी था—परिवार. RJD से निष्कासन के साथ लालू प्रसाद यादव की ओर से तेज प्रताप से पारिवारिक संबंध खत्म करने की बात भी सामने आई. इसके बाद तेजस्वी यादव के साथ उनके रिश्ते भी चर्चा में रहे. दोनों भाइयों से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और लोगों ने उनके बीच की दूरी और भावनाओं को अपने-अपने तरीके से देखा. हालांकि नेतृत्वक मतभेद अपनी जगह रहे, लेकिन कई मौकों पर तेज प्रताप पारिवारिक रिश्तों और जिम्मेदारियों से जुड़े नजर आए. यही वह phase था, जहां सियासत और परिवार की लड़ाई अलग-अलग नहीं रही—दोनों एक-दूसरे में घुलती चली गईं. और चौथा मोड़: जब जवाब देने के बजाय अध्यात्म चुना निजी रिश्तों और वैवाहिक विवादों से जुड़े आरोपों ने भी तेज प्रताप को लंबे समय तक घेरा. उनके खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए, लेकिन उन्होंने हर आरोप का जवाब सार्वजनिक बहस में देने के बजाय खुद को धीरे-धीरे पीछे खींच लिया. इसके बाद उनका झुकाव अध्यात्म की तरफ बढ़ा. वृंदावन जाना, धार्मिक गतिविधियों से जुड़ना और आध्यात्मिक जीवन की तरफ बढ़ना उनके public persona का नया हिस्सा बन गया. यानी एक दौर में जब हर तरफ उनके बारे में बातें हो रही थीं, तेज प्रताप ने इस बार शोर का जवाब शोर से नहीं दिया. उन्होंने रास्ता ही बदल लिया. और अब पांचवां पड़ाव—Rising & Fall का कैमरा यही वजह है कि आज ‘राइज ऐंड फॉल 2’ में तेज प्रताप को देखना सिर्फ एक रियलिटी शो देखने जैसा नहीं है. यह उस शख्स का एक और नया version है, जिसने जिंदगी में हर बड़े मोड़ के बाद खुद को नए मंच पर खड़ा किया. निजी जिंदगी में मुश्किल आई तो सोशल मीडिया का सहारा लिया. नेतृत्वक झटका लगा तो अपनी पार्टी बना ली. परिवार से दूरी हुई तो भी अपने तरीके से रिश्तों को संभालते दिखे. आरोपों और विवादों के बीच अध्यात्म की तरफ चले गए. और अब जब सामने रियलिटी शो का मंच आया है, तो यहां भी तेज प्रताप ने वही अपना अंदाज पकड़ लिया है—थोड़ा शांत, थोड़ा मजेदार और जरूरत पड़ने पर एकदम punchy. शायद यही वजह है कि फैंस उन्हें ‘तेजू पगलू’ कहकर बुला रहे हैं. काजल राघवानी और इरीना के साथ उनकी chemistry हो या मनीष कश्यप के साथ दोस्ताना अंदाज, तेज प्रताप ने शो में अपने लिए एक अलग space बना लिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि जिंदगी के इन चार बड़े पड़ावों के बाद ‘तेजू भईया’ का यह पांचवां chapter उन्हें कहां ले जाता है. क्योंकि तेज प्रताप की कहानी में एक चीज बार-बार दोहराती है—झटका आया, मंच बदला और तेज प्रताप फिर एक नए अंदाज में सामने आ गए. The post मलाइका से काजल राघवानी तक तेजू भैया के फैन, परिवार-पार्टी से हुए बाहर, अब सहवाग के शो में छाए… रियलिटी शो से कैसे बने ‘कमबैक किंग’? appeared first on Naya Vichar.

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10 साल, अनगिनत सवाल और एक आखिरी कॉल रिकॉर्डिंग से बेकसूर साबित हुए राहुल राज, जमशेदपुर की ‘आनंदी’ केस में बड़ा ट्विस्ट

‘बालिका वधू’ की वो मासूम सी ‘आनंदी’ तो आपको याद ही होगी? जी हां, वही प्रत्युषा बनर्जी… जिसकी एक मुस्कान पर टीवी इंडस्ट्री फिदा थी. प्रत्युषा बनर्जी और राहुल राज, फोटो- इंस्टाग्राम एक कॉल रिकॉर्डिंग से बेकसूर साबित हुए राहुल राज न्यायमूर्ति शिवकुमार डिगे की पीठ ने इस मामले में 1 अप्रैल 2016 को प्रत्युषा और राहुल के बीच हुई आखिरी फोन कॉल को सबसे अहम सबूत माना. कॉल की रिकॉर्डिंग से यह साफ हुआ कि राहुल राज, दिवंगत एक्ट्रेस को कोई भी आत्मघाती कदम उठाने से लगातार रोक रहे थे. उन्होंने कॉल पर यह भी कहा था कि वह अपनी गाड़ी मोड़ चुके हैं और तुरंत उनके पास वापस आ रहे हैं. राहुल के वकीलों ने दी थी ये दलील आखिरी बातचीत के अनुसार, प्रत्युषा काफी स्ट्रेस में थीं और उन्होंने अपनी इस हालत के लिए अपने माता-पिता समेत कई अन्य लोगों को भी जिम्मेदार ठहराया था. राहुल के वकीलों (आबाद पोंडा और श्रेयांश मिठारे) ने भी दलील दी कि जब उनका मुवक्किल प्रत्युषा को बचाने की कोशिश कर रहा था, तो इसे आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता. बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि बिना किसी सुसाइड नोट के पुलिस ने बहुत जल्दबाजी में एफआईआर दर्ज की थी. ऐसे में ट्रायल जारी रखना केवल न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. प्रत्युषा केस में कुछ ऐसे फंसे थे राहुल The post 10 साल, अनगिनत सवाल और एक आखिरी कॉल रिकॉर्डिंग से बेकसूर साबित हुए राहुल राज, जमशेदपुर की ‘आनंदी’ केस में बड़ा ट्विस्ट appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में निवेश की नई लहर, अडानी के बाद रिलायंस और अंबुजा नियोटिया समूह की सरकार के साथ बैठक

कोलकाता : सत्ता में आने के बाद भाजपा ने पहले ही कहा था कि राज्य में कई उद्योग स्थापित होंगे. और ठीक वैसा ही हुआ. शुभेंदु एक के बाद एक उद्योगपतियों से मिल रहे हैं. गौतम अडानी और उनकी पत्नी ने पिछले सप्ताह राज्य का दौरा किया था और अब एक और उद्योगपति से मुलाकात की संभावना को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं. अंबुजा नेओटिया के नेता हर्ष नेओटिया ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की. प्रशासन परिवर्तन के बाद से वे मुख्यमंत्री से कई बार मिल चुके हैं. औद्योगिक नीति की घोषणा जल्द हर्ष को राज्य प्रशासन से संबंधित विभिन्न औद्योगिक कार्यक्रमों में देखा गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कुछ ही दिनों में राज्य की औद्योगिक नीति की घोषणा करने वाले हैं. ऐसे माहौल में बुधवार शाम को हर्ष नेओटिया की मुख्यमंत्री से मुलाकात का विशेष महत्व है. अंबुजा नेओटिया समूह मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास और अवसंरचना निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत है। समूह के शीर्ष अधिकारियों ने इन सभी क्षेत्रों में निवेश और रोजगार सृजन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री से विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें इन क्षेत्रों में हो रहा निवेश  इस बीच, बुधवार को नबन्ना में रिलायंस इंडस्ट्रीज के उच्च अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार, रिलायंस समूह ने राज्य के बिजली, परिवहन, फिल्म उद्योग, बुनियादी ढांचे और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश करने में रुचि दिखाई है. इस दिन मुख्यमंत्री ने रिलायंस समूह के पूर्वी क्षेत्र के निदेशक तरुण झुनझुनवाला सहित 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इससे पहले, उन्होंने मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के साथ भी विस्तृत बैठक की. बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त प्रवक्ता प्रभु मिश्रा, लोक निर्माण सचिव अंतरा आचार्य, भूमि एवं भू संगठन विभाग के सचिव सुरेंद्र गुप्ता, विद्युत विभाग के सचिव शांतनु बसु और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। इन सबके बीच, सूत्रों ने बताया कि इस बार नियोटिया समूह के साथ बैठक हो सकती है. Also Read: Kolkata Direct Investment: कोलकाता को मिलने वाली है बड़ी सौगात, फ्रांस करेगा सीधा निवेश और शुरू हो सकती है डायरेक्ट फ्लाइट The post बंगाल में निवेश की नई लहर, अडानी के बाद रिलायंस और अंबुजा नियोटिया समूह की प्रशासन के साथ बैठक appeared first on Naya Vichar.

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‘किसान पिता ने सबकुछ दिया, मैं सिर्फ उम्मीद दे रहा हूं’, वैकेंसी पेंडिंग, कोर्ट केस और भर्ती अटकने से बीत गए प्रियतम की जिंदगी के कई साल

“कब तक पढ़ोगे?” प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं से शायद यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है. कभी परिवार पूछता है, कभी रिश्तेदार, कभी पड़ोसी और कई बार यही सवाल अभ्यर्थी खुद से भी करता है. लेकिन, इस सवाल का जवाब उस युवा से बेहतर शायद कोई नहीं जानता, जो कई वर्षों से एक प्रशासनी नौकरी के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है. उसके लिए हर सुबह सिर्फ पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि अपने सपने को बचाए रखने की एक और कोशिश होती है. बिहार के मधेपुरा जिले के बिशनपुर गांव के रहने वाले प्रियतम कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. यह कहानी सिर्फ एक BPSC अभ्यर्थी के परीक्षा देने और परिणाम का इंतजार करने की कहानी नहीं है. यह उस युवा की कहानी है, जिसने सीमित संसाधनों के बीच सपना देखा, उस सपने के लिए वर्षों तक मेहनत की, कई बार असफलता का सामना किया और फिर भी खुद को दोबारा खड़ा किया. लेकिन, इस सफर में एक सवाल लगातार उनके सामने खड़ा रहा-“आखिर क्या इस इंतजार की कोई आखिरी तारीख है?” एक सीमांत किसान के घर से शुरू हुआ सपना प्रियतम कुमार का जन्म 13 दिसंबर 1994 को मधेपुरा जिले के बिशनपुर गांव में एक सीमांत किसान परिवार में हुआ. उनके पिता जयकृष्ण यादव और मां सबिता देवी गांव में रहकर खेती-बारी का काम करते हैं . परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. सीमित संसाधनों के बीच जिंदगी आगे बढ़ रही थी, लेकिन प्रियतम के सपने सीमित नहीं थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्रशासनी विद्यालय से हुई. बचपन से ही उनके मन में एक सपना था—पढ़ाई के जरिए अपनी जिंदगी बदलना और परिवार के लिए कुछ करना. एक छोटे से गांव से निकलकर प्रशासनी नौकरी तक पहुंचना उनके लिए सिर्फ करियर का सवाल नहीं था, बल्कि उस परिवार की उम्मीद भी थी, जिसने अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें पढ़ाया और आगे बढ़ने का अवसर दिया. शायद इसी वजह से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी उनके लिए सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रही. इसमें माता-पिता की उम्मीद, परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की इच्छा और खुद को साबित करने का सपना भी शामिल हो गया. 65वीं BPSC से शुरू हुआ सफर प्रियतम ने BPSC की 65वीं परीक्षा से अपने प्रतियोगी परीक्षा के सफर की शुरुआत की ओर यह संघर्ष लगातार जारी रखा पर की परीक्षा मे सफलता नहीं मिली. एक प्रतियोगी अभ्यर्थी के लिए परीक्षा में असफल होना सिर्फ रिजल्ट में नाम न आने तक सीमित नहीं होता. उस एक परिणाम के पीछे कई महीनों की पढ़ाई, अनगिनत घंटे, नींद से समझौता और परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं. इसके बावजूद प्रियतम ने तैयारी नहीं छोड़ी. इसके बाद आई 70वीं BPSC परीक्षा. इस बार कहानी थोड़ी अलग थी. उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास की और मुख्य परीक्षा भी लिखी. वर्षों की मेहनत के बाद पहली बार उन्हें लगा कि मंजिल अब पहले से ज्यादा करीब है. लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया में मंजिल के करीब पहुंच जाना और मंजिल हासिल कर लेना, दो अलग-अलग बातें हैं. कुछ अंकों की दूरी और वर्षों का दर्द प्रियतम बताते हैं कि कई मौकों पर वह सफलता से महज 1 से 5 अंकों के अंतर से पीछे रह गए. कागज पर यह अंतर छोटा दिखाई देता है, लेकिन एक अभ्यर्थी के जीवन में इसका अर्थ बहुत बड़ा होता है. कुछ अंकों का यह अंतर कई महीनों की अतिरिक्त तैयारी और अगले अवसर के लंबे इंतजार में बदल सकता है. सबसे कठिन स्थिति तब होती है, जब अभ्यर्थी को लगता है कि उसने अपनी तरफ से मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़ी. उसने पढ़ाई की, मॉक टेस्ट दिए, सिलेबस पूरा किया, गलतियों को सुधारा और पिछली असफलताओं से सीखने की कोशिश की. फिर भी परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया. ऐसे समय में समाज का आसान सवाल सामने आता है—“चयन क्यों नहीं हुआ?” लेकिन इस सवाल का जवाब शायद उस व्यक्ति के पास भी नहीं होता, जिसने पूरी ईमानदारी से मेहनत की हो. ये भी पढ़ें: Success Story: सेल्फ स्टडी से टॉप की BPSC परीक्षा, बेतिया के अभिनव बने DSP समाज के लिए परिणाम, अभ्यर्थी के लिए पूरी जिंदगी जिसका चयन हो गया, वह मेहनती और प्रतिभाशाली कहलाता है. जिसका चयन नहीं हुआ, उससे अक्सर पूछा जाता है—“शायद तैयारी में कमी रह गई होगी.” लेकिन क्या हर असफलता का मतलब मेहनत की कमी होता है? कई बार दो अभ्यर्थी लगभग समान स्तर की तैयारी करते हैं. एक कुछ अंकों से आगे निकल जाता है और दूसरा कुछ अंकों से पीछे रह जाता है. फिर समाज दोनों को अलग-अलग नजर से देखने लगता है. एक के घर मिठाई जाती है, दूसरे के घर सवाल पहुंचते हैं. एक को बधाई मिलती है, दूसरे से पूछा जाता है—“अब क्या करोगे?” यहीं से एक प्रतियोगी अभ्यर्थी का असली मानसिक संघर्ष शुरू होता है. उसके मन में लगातार कई सवाल चलते रहते हैं— क्या मैं सही दिशा में हूं? क्या मुझे तैयारी जारी रखनी चाहिए? क्या मेरे इतने साल व्यर्थ चले गए? अगर अगली परीक्षा भी नहीं निकली, तो क्या होगा? बाहर से वह सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर वह हर दिन अपने भविष्य से जूझ रहा होता है. जब परीक्षा से ज्यादा मुश्किल हो जाता है इंतजार प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में सबसे कठिन चीज हमेशा कठिन सिलेबस नहीं होता. कई बार सबसे कठिन होता है यह पता न होना कि अगला अवसर कब मिलेगा. अभ्यर्थी अपनी जिंदगी की योजना बनाना चाहता है. लेकिन परीक्षा की तारीख अनिश्चित हो, तो भविष्य की योजना कैसे बने? उम्र बढ़ रही है, परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं और आर्थिक जरूरतें भी बढ़ रही हैं. दूसरी तरफ तैयारी वहीं खड़ी है. हर बार उम्मीद होती है कि अगली परीक्षा में शायद बात बन जाएगी. इसी उम्मीद में एक साल निकल जाता है, फिर दूसरा और फिर तीसरा. धीरे-धीरे वह युवा अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों को सिर्फ एक परीक्षा के इंतजार में बिताने लगता है. और फिर मन में एक और सवाल आता है— “क्या मैंने जिंदगी को सिर्फ एक परीक्षा के इंतजार में रोक दिया?” पढ़ाई के साथ चलता है आर्थिक संघर्ष बिहार के हजारों प्रतियोगी अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा की तारीख सिर्फ एक

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Jharkhand SIR: दावा-आपत्ति की डेडलाइन खत्म, 63 लाख लोगों को नोटिस, जानें आगे क्या होगा

Jharkhand SIR Update: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावा-आपत्ति की समयसीमा 30 सितंबर को समाप्त हो गयी. झारखंड में करीब 63 लाख लोगों को नोटिस जारी किया गया है. अब समयसीमा नहीं बढ़ने की स्थिति में बीएलओ (BLO) लोगों के घर जाकर उनके सवालों का जवाब देंगे और कागजी कार्रवाई पूरी करेंगे. 60 दिन समय बढ़ाने का प्रस्ताव, अब तक नहीं हुआ फैसला विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के लिए दावा-आपत्ति की तिथि बुधवार को समाप्त हो गयी. यह तिथि 30 सितंबर तक थी. हालांकि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इसका समय 60 दिन बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन आज तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ. आयोग ने बैठक कर आंध्रप्रदेश व मेघालय में एसआइआर की तिथि बढ़ायी है. झारखंड में लगभग 63 लाख लोगों को नोटिस जारी किया गया है. मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 6,42,347 लोगों ने भरा फॉर्म-6 झारखंड में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 6,42,347 लोगों ने फॉर्म-6 भरा है. इसमें विदेश में रहने वाले 106 हिंदुस्तानीय नागरिकों ने फॉर्म-6 ए भरा. वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 12275 लोगों ने फॉर्म-7 भरा है. मतदाता विवरण में संशोधन के लिए 4,36,782 आवेदन मतदाता विवरण में संशोधन या एक ही परिवार के मतदाताओं को एक ही मतदान केंद्र से जोड़ने के लिए 4,36,782 लोगों ने फॉर्म आठ भरा है. मतदाता सूची अपडेट: आगे क्या होगा? अगर तिथि में बढ़ोतरी नहीं होती है, तो पहले से ही मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दे रखा है कि उनके नोटिस के निराकरण के लिए बीएलओ घर-घर जायेंगे. अगर तिथि में 60 दिनों की बढ़ोतरी होती है, तो मतदाताओं को इन कार्यों के लिए समय मिल जायेगा. ऐसे में नये तय समय में ये कार्य करने होंगे. अंतिम दिन ऐसे रहे हालात अंचल कार्यालयों में भारी भीड़ एसआइआर के लिए बड़गाईं, कांके, सदर, अरगोड़ा, रातू समेत रांची के अंचलों में दिनभर कतारें लगी रहीं. बुजुर्गों और किरायेदारों की परेशानी बुजुर्गों को यह डर सता रहा है कि 2003 के पुराने कागजात उनके पास नहीं हैं, जिससे कहीं उनका नाम वोटर लिस्ट से कट न जाए. वहीं, एक किराएदार को मकान मालिक से एनओसी (NOC) मिलने में दिक्कत आ रही है, जिस कारण वे भी परेशान हैं. ग्रामीण व आदिवासी बस्तियों में जागरूकता की कमी ओरमांझी के इरबा, हरचंडा, चुटूपालू जैसी बस्तियों में जानकारी के अभाव और कागजात नहीं होने से नये मतदाता परेशान हैं. पलायन बनी बाधा बड़े पैमाने पर लोगों के काम की तलाश में बाहर जाने की वजह से बीएलओ के लिए घर-घर जाकर लोगों का सत्यापन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. कई बार तो लोग मिलते ही नहीं हैं. ये भी पढ़ें: पलामू में विश्रामपुर के प्राइवेट अस्पतालों पर गिरी गाज, औचक निरीक्षण के दौरान SDM ने क्लिनिक किया सील The post Jharkhand SIR: दावा-आपत्ति की डेडलाइन खत्म, 63 लाख लोगों को नोटिस, जानें आगे क्या होगा appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Exam Scam: 15 लाख देकर बने DSP, इंटरव्यू में 80 अंक बढ़वाने का CID जांच में खुलासा

JPSC Exam Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) भर्ती मामले की CID जांच में अभ्यर्थियों से पैसे लेकर डीएसपी और डिप्टी जेलर के पद पर चयन कराने की बात सामने आई है. 11वीं-13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान सिंडिकेट के सरगना अभय तिवारी ने आयोग के सदस्यों और अध्यक्ष के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये वसूले थे. जांच के अनुसार, पैसे के बदले अभ्यर्थियों के साक्षात्कार में अंक बढ़वाये गए, जिससे उनकी मेरिट में सुधार हुआ और उनका चयन संबंधित पदों पर हो सका. ये भी पढ़ें- फेसबुक पोस्ट से बदनामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से सहदेव उरांव को जमानत इंटरव्यू में 80 अंक बढ़वाने के बाद हुआ DSP पद पर चयन सीआईडी को मिले बयानों के अनुसार, बिचौलिए ब्रज कुमार राम ने अभ्यर्थी मनीष कुमार के साक्षात्कार में 80 अंक बढ़वाए थे. इसके बाद मनीष कुमार का चयन डीएसपी पद पर हुआ. जांच में बताया गया है कि इस काम के बदले ब्रज कुमार राम को पांच लाख रुपये मिले थे. इसी तरह की सेटिंग के जरिए मनीष कुमार के अलावा रॉबिन कुमार और शैलेश सिन्हा का भी डीएसपी पद पर चयन हुआ, जबकि राजेश कुमार रजक का चयन डिप्टी जेलर के पद पर किया गया. जांच में यह भी सामने आया है कि सीडीपीओ परीक्षा में भी चार अभ्यर्थियों के लिए सेटिंग कराई गई थी. The post JPSC Exam Scam: 15 लाख देकर बने DSP, इंटरव्यू में 80 अंक बढ़वाने का CID जांच में खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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174 लोगों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार को पीएम मोदी-नेतन्याहू का सलाम, बोले- ‘हीरो हैं’

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई के हिंदुस्तानीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को ‘सच्चा हीरो’ बताया है. फ्लाइट FZ1073 के कॉकपिट में पायलट और को-पायलट के बीच अचानक हाथापाई शुरू हो गई थी. इस दौरान को-पायलट ने स्मित पर चाकू से हमला कर दिया. घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. इसके बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्य अंदर पहुंचे और स्थिति को संभालने में मदद की. बाद में विमान का रुख सऊदी अरब की ओर मोड़ा गया और तबुक में सुरक्षित लैंडिंग कराई गई. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “मैं हिंदुस्तानीय पायलट कैप्टन स्मित की बहादुरी को सलाम करता हूं. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हमलावर का मुकाबला जारी रखा. उनकी हिम्मत से यात्रियों और क्रू के सदस्यों को हमलावर पर काबू पाने में मदद मिली. कैप्टन स्मित की इस बहादुरी से विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली. इनमें इजराइली नागरिकों के साथ दूसरे देशों के लोग भी शामिल थे. मैं उनके जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना करता हूं.” इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला किया. इसके बाद विमान अचानक तेजी से नीचे जाने लगा. को-पायलट ओमान का नागरिक था और उसने विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, विमान महज 30 सेकंड में करीब 14,000 फीट नीचे आ गया. कैप्टन स्मित मच्छार सच्चे हीरो : पीएम मोदी पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘’“कैप्टन स्मित मच्छर एक सच्चे हीरो हैं. बेहद खतरनाक हालात में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई और दूसरों की जान बचाने के लिए पूरी मजबूती से डटे रहे. उनकी बहादुरी से सैकड़ों लोगों की जान बचाने और एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद मिली. पूरे हिंदुस्तान को कैप्टन स्मित मच्छर पर गर्व है. उनके जल्द ठीक होने की कामना करता हूं.” ये भी पढ़ें: Watch Video: फ्लाईदुबई फ्लाइट में पायलटों के बीच झड़प, इजराइल ने भेजा लड़ाकू विमान, जानें पूरा मामला कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार ? कैप्टन स्मित मच्छार फ्लाईदुबई के उस विमान के हिंदुस्तानीय पायलट हैं, जिन पर कॉकपिट में को-पायलट ने चाकू से हमला किया था. वह गुजराती मूल के हिंदुस्तानीय नागरिक हैं और कमर्शियल एविएशन में उन्हें 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. स्मित जून 2022 में फ्लाईदुबई से कैप्टन के तौर पर जुड़े थे. इससे पहले उन्होंने करीब 11 साल तक स्पाइसजेट में काम किया. वह बोइंग 737 विमान उड़ाने में एक्सपर्ट हैं और उड़ान की सुरक्षा व नियमों के पालन पर खास ध्यान देते हैं. अपने करियर में उन्होंने दूसरे पायलटों को ट्रेनिंग भी दी है. स्मित ने वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है. The post 174 लोगों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार को पीएम मोदी-नेतन्याहू का सलाम, बोले- ‘हीरो हैं’ appeared first on Naya Vichar.

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बिहार के 6 अफसरों ने बनाई 10 करोड़ की अवैध संपत्ति, पति-पत्नी के यहां 80 लाख कैश, रेड में किसके यहां क्या मिला? पूरी डिटेल पढ़िए

Bihar Raid News: बिहार में सितंबर 2026 के दौरान आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance) ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों में बड़ी कार्रवाई की. एक महीने में पांच अलग-अलग मामलों में छह अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी हुई. इनमें EOU ने तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की. वहीं, Vigilance ने तीन अधिकारियों के खिलाफ छापे मारे. इनमें एक मामला पति-पत्नी से जुड़ा है. जांच एजेंसियों की कार्रवाई में जमीन, मकान, फ्लैट, बैंक खाते, निवेश, आभूषण और नकदी से जुड़े दस्तावेज मिले. कुछ मामलों में बड़ी रकम फ्रीज भी की गई. हालांकि, ये सभी आंकड़े जांच में सामने आए आरोपों और शुरुआती बरामदगी पर आधारित हैं. इन्हें अदालत से अंतिम रूप से साबित अपराध या जब्त संपत्ति नहीं माना जा सकता. 1. आनंद कुमार विभूति के ठिकानों पर EOU की रेड 8 सितंबर को EOU ने दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के BDO आनंद कुमार विभूति से जुड़े पांच ठिकानों पर छापेमारी की. कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई. EOU की शुरुआती जांच के अनुसार, आनंद कुमार विभूति पर अपनी ज्ञात और वैध आय से करीब 1 करोड़ 71 लाख रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है. यह उनकी ज्ञात आय से करीब 121 प्रतिशत अधिक बताई गई. तलाशी के दौरान परिवार से जुड़े 16 भूखंडों के कागजात मिले. करीब 70 लाख रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी भी सामने आई. इसके अलावा बैंक खाते, वाहन, आभूषण और मकान से जुड़े दस्तावेज मिले. पूर्वी चंपारण में करीब 70 लाख रुपये की लागत से बने मकान का भी रिपोर्टों में उल्लेख है. इस मामले में नकद जब्ती की कोई निश्चित राशि सार्वजनिक नहीं की गई है. 3. कमलेश कुमार के ठिकानों पर EOU की छापेमारी 22 सितंबर को EOU ने बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक, तकनीकी कमलेश कुमार के पटना और वैशाली स्थित चार ठिकानों पर रेड की. EOU के अनुसार, कमलेश कुमार पर अपनी ज्ञात आय से करीब 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है. यह राशि उनकी ज्ञात आय से करीब 103.30 प्रतिशत अधिक बताई गई. तलाशी में करीब 4 करोड़ 70 लाख रुपये मूल्य की 12 अचल संपत्तियों के कागजात मिले. इनमें जमीन, मकान और फ्लैट शामिल हैं. इसके अलावा कमलेश कुमार और उनके करीबी परिजनों से जुड़े 16 बैंक खातों में रखे करीब 25 लाख 86 हजार रुपये फ्रीज किए गए. आभूषण, लग्जरी वाहन, निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में आए. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 5. अमित कुमार गुप्ता के ठिकानों पर EOU की कार्रवाई 30 सितंबर दिन बुधवार को EOU ने परिवहन विभाग के प्रवर्तन अवर निरीक्षक अमित कुमार गुप्ता के आरा और दानापुर स्थित ठिकानों पर छापेमारी की. अमित कुमार गुप्ता कैमूर के मोहनियां चेकपोस्ट से जुड़े बताए गए हैं. EOU के अनुसार, उन पर अपनी ज्ञात आय से करीब 1 करोड़ 49 लाख 58 हजार 500 रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है. यह राशि ज्ञात आय से करीब 148 प्रतिशत अधिक बताई गई. EOU की टीम ने भोजपुर जिले के अवधपुरी में अमित कुमार गुप्ता के निजी आवास की तलाशी ली. यह मकान चंदवा मोड़ के पास स्थित है. तलाशी के दौरान यहां से 3 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. इसके साथ ही एक इलेक्ट्रिक कार TATA Tiago भी मिली. जांच टीम ने जमीन की खरीद से जुड़े कई दस्तावेज भी बरामद किए हैं. इन दस्तावेजों की जांच की जा रही है. EOU के अनुसार, अमित कुमार गुप्ता और उनके परिजनों के नाम पर अलग-अलग जिलों में जमीन खरीदे जाने की जानकारी मिली है. तलाशी में आरा, पटना और छपरा में 11 भू-खंड खरीदे जाने से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. इन संपत्तियों की खरीद और आय के स्रोत का मिलान किया जा रहा है. इसके अलावा अवधपुरी में G+3 मकान की जानकारी भी सामने आई है. आरा में करीब 5.1 डिसमिल जमीन पर निर्माणाधीन मकान का भी पता चला है. पटना के साई वरदान सिटी में एक फ्लैट से जुड़े दस्तावेज भी तलाशी के दौरान मिले हैं. पांच मामलों में छह अधिकारी जांच के घेरे में सितंबर में हुई इन कार्रवाइयों में कुल छह अधिकारियों के नाम सामने आए. इनमें आनंद कुमार विभूति, सत्येंद्र कुमार चौधरी, कमलेश कुमार, रविंद्र कुमार दिवाकर, कुमारी स्वीटी और अमित कुमार गुप्ता शामिल हैं. EOU ने आनंद कुमार विभूति, कमलेश कुमार और अमित कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की. Vigilance ने सत्येंद्र कुमार चौधरी तथा रविंद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी के मामले में छापेमारी की. इस तरह एक महीने में पांच अलग-अलग मामले सामने आए. इनमें छह अधिकारी जांच के दायरे में आए. इन पांच मामलों में एजेंसियों की ओर से बताए गए आय से अधिक संपत्ति के आंकड़ों को जोड़ें तो यह रकम करीब 9 करोड़ 38 लाख रुपये बैठती है. सबसे बड़ा आरोपित आंकड़ा कमलेश कुमार के मामले में है. इसके बाद सत्येंद्र कुमार चौधरी और आनंद कुमार विभूति के मामले आते हैं. वहीं रविंद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी के मामले में करीब 1.06 करोड़ रुपये की संयुक्त अनुपातहीन संपत्ति का आरोप है. सबसे ज्यादा कैश किस अफसर के यहां मिला? सितंबर की कार्रवाइयों में सबसे बड़ी स्पष्ट नकद बरामदगी रविंद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी के मामले में सामने आई. यहां करीब 79 से 80 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी है. इसी मामले में करीब 52.60 लाख रुपये के आभूषण और 48 महंगी घड़ियां भी मिलीं. कमलेश कुमार के मामले में 25.86 लाख रुपये 16 बैंक खातों में फ्रीज किए गए. इसके अलावा करीब 4.70 करोड़ रुपये की 12 अचल संपत्तियों से जुड़े कागजात मिले. बाकी मामलों में भी जमीन, मकान, बैंक खाते, निवेश, वाहन और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जांच में सामने आए हैं. Also Read: 3 लाख कैश, 11 प्लॉट और फ्लैट के दस्तावेज, 30 लाख से ज्यादा का निवेश, परिवहन विभाग के SI के यहां रेड में क्या-क्या मिला? The post बिहार के 6 अफसरों ने बनाई 10 करोड़ की अवैध संपत्ति, पति-पत्नी के यहां 80 लाख कैश, रेड में किसके यहां क्या मिला? पूरी डिटेल पढ़िए appeared first on Naya Vichar.

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