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Author name: Vinod Jha

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GST Council: अब 10 हजार से कम टैक्स पर नहीं आएगा नोटिस, नहीं होगी गिरफ्तारी; 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नए नियम

GST Council: 57वीं GST काउंसिल की बैठक में टैक्सपेयर्स को राहत देने वाले कई अहम फैसलों पर सहमति बनी है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के बाद कहा कि GST के तहत 10 हजार रुपये से कम टैक्स राशि के लिए डिमांड नोटिस नहीं भेजा जाएगा. इसके अलावा GST में गिरफ्तारी हटाने और अभियोजन की सीमा बढ़ाने की सिफारिश की गई है. हालांकि, इन बदलावों को लागू करने की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2027 से शुरू होगी. साल में सिर्फ एक बार बदली जाएंगी GST की दरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब GST की दरों में बदलाव साल में केवल एक बार करने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि दरों में बदलाव का फैसला 1 अप्रैल से लागू होने के लिए ही लाया जाएगा. इससे कारोबारियों और टैक्सपेयर्स को टैक्स व्यवस्था में अधिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है. 10 हजार से कम टैक्स पर नहीं भेजा जाएगा डिमांड नोटिस 57वीं GST काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि 10 हजार रुपये से कम टैक्स राशि के लिए कोई GST डिमांड नोटिस नहीं भेजा जाएगा. प्रशासन के इस कदम का उद्देश्य छोटे मामलों में टैक्स प्रशासन की प्रक्रिया को आसान बनाना और टैक्सपेयर्स पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ कम करना है. GST में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने की सिफारिश काउंसिल ने GST के तहत गिरफ्तारी को हटाने की सिफारिश की है. इसके साथ ही अभियोजन के लिए टैक्स की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गई है. यानी 5 करोड़ रुपये से कम के मामलों में अभियोजन नहीं चलाने का प्रस्ताव है. 25 हजार की सामान्य पेनल्टी घटकर 10 हजार रुपये होगी GST व्यवस्था में सामान्य पेनल्टी को भी कम करने की सिफारिश की गई है. वित्त मंत्री के मुताबिक, सामान्य पेनल्टी की मौजूदा 25 हजार रुपये की सीमा को घटाकर 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है. प्रशासन का मानना है कि इससे छोटे अनुपालन संबंधी मामलों में कारोबारियों को राहत मिलेगी. ITC को लेकर फंसा पेच, अधिकारियों की कमेटी करेगी समीक्षा बैठक में CGST Act की धारा 16(2)(c) में संशोधन पर भी चर्चा हुई. मौजूदा व्यवस्था में यदि सप्लाई चेन में किसी स्तर पर सप्लायर ने टैक्स जमा नहीं किया या फर्जी ITC का मामला सामने आया, तो अंतिम और वास्तविक टैक्सपेयर का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) भी प्रभावित हो सकता है. ईमानदार टैक्सपेयर्स को मिलेगी राहत देने की कोशिश वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कई मामलों में टैक्सपेयर के पास वैध इनवॉयस होती है, उसे माल या सेवा की सप्लाई मिल चुकी होती है और वह सप्लायर को टैक्स का भुगतान भी कर चुका होता है. इसके बावजूद सप्लाई चेन में किसी दूसरे स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर उसका ITC रोक दिया जाता है. काउंसिल ने इस समस्या को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा की. पूरी सप्लाई चेन की जगह सप्लायर तक सीमित करने का प्रस्ताव वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण बताया कि प्रशासन की ओर से प्रस्ताव था कि अंतिम टैक्सपेयर के ठीक पहले वाले सप्लायर तक ही अनुपालन की जिम्मेदारी सीमित की जाए और पूरी सप्लाई चेन की गड़बड़ी का असर अंतिम खरीदार पर न पड़े. लेकिन कुछ राज्यों ने इस मुद्दे पर और विचार की मांग की. इसके बाद अधिकारियों की कमेटी बनाने का फैसला लिया गया. 3 महीने में रिपोर्ट देगी अधिकारियों की कमेटी अधिकारियों की समिति को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है. रिपोर्ट आने के बाद GST काउंसिल की बैठक बुलाकर इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा. वित्त मंत्री ने साफ किया कि इस मुद्दे पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. GST प्रशासन में लागू होगा ‘फेसलेस’ सिस्टम वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण GST प्रशासन में फेसलेस व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि आयकर विभाग में लागू फेसलेस सिस्टम को टैक्सपेयर्स से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. इसी अनुभव के आधार पर अब CGST प्रशासन में भी इस सुधार को आगे बढ़ाने की योजना है. फेसलेस सिस्टम से टैक्स प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद फेसलेस व्यवस्था के तहत टैक्सपेयर्स और अधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क को कम करने का प्रयास किया जाता है. प्रशासन का मानना है कि इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है और टैक्स प्रशासन को अधिक तकनीक आधारित बनाया जा सकता है. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा आज की GST काउंसिल की बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था, बल्कि केंद्र प्रशासन की पहल के तौर पर इसकी घोषणा की गयी है. 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे प्रक्रिया सुधार निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैठक के एजेंडे में शामिल लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बनी है. दो मुद्दों पर आगे समीक्षा के लिए अधिकारियों की कमेटी बनाई गयी है. उन्होंने कहा कि प्रक्रिया से जुड़े सभी सुधारों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. GST दरों में इस बैठक में कोई बदलाव नहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि 57वीं GST काउंसिल की बैठक में GST की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. दरों से जुड़े फैसलों को साल में एक बार लेने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है. वहीं, अधिकारियों की कमेटी से जुड़े दोनों मामलों पर रिपोर्ट आने के बाद अंतिम फैसला किया जाएगा. ये भी पढ़ें: PM Kisan 24वीं किस्त को लेकर आया अपडेट, ₹2000 पाने से पहले किसान जरूर कर लें ये काम The post GST Council: अब 10 हजार से कम टैक्स पर नहीं आएगा नोटिस, नहीं होगी गिरफ्तारी; 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नए नियम appeared first on Naya Vichar.

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मां रूपी सोरेन की अंतिम विदाई, नेमरा में फूट-फूटकर रोए CM हेमंत सोरेन, देखें तस्वीरें

नेमरा से सुनील चौधरी, नवीन शर्मा, अरविंद सिंह, राज कौशिक, कुणाल कुमार की रिपोर्ट रांची/नेमरा: मां की गोद से बड़ा इस दुनिया में शायद ही कोई सहारा होता है. मां का जाना उस खालीपन को छोड़ जाता है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को अपनी मां रूपी सोरेन को नम आंखों से अंतिम विदाई दी. नेमरा में अंतिम संस्कार के दौरान मुख्यमंत्री कई बार अपनी आंखों से आंसू पोंछते नजर आए. मां को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था. रांची से रूपी सोरेन का पार्थिव शरीर पैतृक गांव नेमरा पहुंचा. पैतृक आवास के आंगन में परिवार और समाज की परंपरा व संस्कृति के अनुसार अंतिम रस्में पूरी की गयीं. इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत परिवार के सदस्यों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया और श्मशान घाट की ओर रवाना हुए. मां के अंतिम संस्कार के समय CM हेमंत सोरेन जहां गुरुजी हुए थे पंचतत्व में विलीन, वहीं मां को दी अंतिम विदाई रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार उसी स्थान पर किया गया, जहां करीब एक साल पहले उनके पति और झारखंड आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन यानी गुरुजी का अंतिम संस्कार हुआ था. उसी घाट पर आज परिवार ने रूपी सोरेन को भी अंतिम विदाई दी. इस दौरान हेमंत सोरेन, उनके दोनों बेटे समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया. अंतिम विदाई के वक्त पूरा परिवार भावुक था. नेमरा में मौजूद लोगों की आंखें भी नम थीं. ये भी पढ़ें… The post मां रूपी सोरेन की अंतिम विदाई, नेमरा में फूट-फूटकर रोए CM हेमंत सोरेन, देखें तस्वीरें appeared first on Naya Vichar.

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जब थिएटर की स्टेज पर हाथ में झाड़ू लहराते बोले थे नाना, ‘मेरे जैसी भद्दी शक्ल वाले भी एक दिन हीरो बनेंगे, सदाशिव बोल उठे थे शाबाश…’

“‘स्टेज पर उस वक्त कोई बड़ा कलाकार नहीं था. कुछ लोग काम कर रहे थे. शाम को नाटक होना था. स्टेज की तैयारी चल रही थी. तभी नाना ने झाड़ू उठा ली. झाड़ू को उन्होंने ऐसे पकड़ा जैसे तलवार हो. कमर के पास खींचकर, पूरे तेवर के साथ उसे हवा में लहराया और जोर से बोले-“क्या समझ रखे हो तुम लोग अपने आप को? मेरे जैसे भद्दी शक्ल वाले भी एक दिन हीरो बनकर आएंगे. मैं बताऊंगा.” सदाशिव भाई भी वहीं थे. उन्होंने तालियां बजाईं और कहा-शाबाश! शाबाश! जियो!” नाना पाटेकर को समझना हो, तो शायद उनकी फिल्मों से पहले उनके नाटकों तक जाना पड़ेगा. उस नाना तक, जो बड़े पर्दे का सितारा बनने से बहुत पहले स्टेज की धूल में अपना संसार तलाश रहा था. उस नाना तक, जिसे मैंने पहली बार पृथ्वी थिएटर में देखा था. मैं(तापस चक्रवर्ती) एक रंगकर्मी झारखंड से हूं. थिएटर मेरे लिए शौक नहीं, एक तरह की बेचैनी थी. रंगमंच की दुनिया में बड़े कलाकारों को देखने, उनसे मिलने और उनके आसपास कुछ वक्त बिताने की एक अलग ही लालसा होती थी. इसी लालसा ने मुझे झारखंड से मुंबई खींच लिया था. उस समय पृथ्वी थिएटर आज जैसा चमकता हुआ ठिकाना नहीं था. वहां पहुंचकर लगता था कि थिएटर किसी इमारत का नाम नहीं, बल्कि उन लोगों का नाम है जो उसके लिए अपना सब कुछ छोड़ सकते हैं. मैं विनोद कुमार और रंगायन की टीम के साथ आया था. पृथ्वी पर अपना नाटक किया था. शायद 1981-82 की बात होगी. नाटक के बाद मैं वापस चला गया, लेकिन पृथ्वी मेरे भीतर रह गया. 1982 में मैंने यहां नौकरी शुरू कर दी थी. मगर मन बार-बार मुंबई की उसी जगह पर लौटता था. छुट्टी मिलती, कोई बहाना मिलता और मैं पृथ्वी पहुंच जाता. वहां कोई मेरा इंतजार नहीं कर रहा था. न कोई बड़ा काम था, न कोई पहचान. बस नाटक देखने का जुनून था और उन लोगों के करीब बैठने की इच्छा, जिनसे मैं सीखना चाहता था. हंगल साहब जैसे लोग वहां थे. उनके अनुभव सुन लेना भी मेरे लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं था. शफी इनामदार जैसे कलाकार थे. सदाशिव अमरापुरकर जैसे लोग थे. और उसी दुनिया में एक नाम धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा था- नाना पाटेकर. नाना उस वक्त आज वाले नाना नहीं थे. वह स्टार नहीं थे. मगर उनमें एक चीज तब भी पूरी ताकत से मौजूद थी- थिएटर का जुनून. मेरी उनसे पहली मुलाकात भी किसी फिल्मी दृश्य जैसी नहीं थी. कोई औपचारिक परिचय नहीं. कोई हाथ मिलाना नहीं. मैं वहां खाना खा रहा था. टेबल-कुर्सी का इंतजाम नहीं था. खड़े-खड़े खाना होता था. बाहर एक छोटी सी खाने की जगह थी. आठ रुपये में पूरा खाना मिल जाता था. पास ही हरे रामा हरे कृष्णा मंदिर था. हम पैदल चले जाते थे. वहीं किसी चाईबासा के लड़के के जरिए मेरी नाना से मुलाकात कराई गई. नाना ने खाते-खाते पहला सवाल पूछा- “क्या करता है?” मैंने कहा- “नौकरी.” उन्होंने तुरंत पूछा- “फिर काहे को आया मरने?” मैंने कहा- “आपको देखने.” बस. इतना सुनते ही उन्होंने मुझे अपने अंदाज में जवाब दिया- “इतना मारूंगा ना, बिहार जाकर रुकेगा.” उनकी बात में एक अजीब सा अपनापन था. वह आपको पहली मुलाकात में ही सहज कर देते थे. उनकी भाषा में कोई बनावट नहीं थी. मैंने उनसे कहा कि मैं इतनी दूर सिर्फ इसलिए आता हूं क्योंकि मुझे थिएटर का नशा है. उन्होंने कहा था- “मैं महान-वहान कुछ नहीं हूं.” यही नाना थे. बाद में मैंने उनसे कहा कि मैं भी स्टेज के लिए ऐसा ही पागल हूं. सैकड़ों किलोमीटर से सिर्फ नाटक देखने और आप जैसे कलाकारों से मिलने चला आता हूं. उन्होंने शायद ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन वह मुलाकात मेरे भीतर रह गई. आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि उस दौर में पृथ्वी थिएटर एक तरह की यूनिवर्सिटी था. वहां कोई डिग्री नहीं मिलती थी, लेकिन जिंदगी भर के सबक मिल जाते थे. मैं कहता हूं- स्कूल नहीं, वह यूनिवर्सिटी थे. और नाना? नाना उस यूनिवर्सिटी के उन विद्यार्थियों में थे, जो पढ़ने के साथ-साथ पूरी इमारत की नींव भी मजबूत कर रहे थे. मैं खुद किसी नाटक का कलाकार नहीं होता था, फिर भी स्टेज पर मौजूद रहता था. रस्सी पकड़नी हो, लाइट लगानी हो, कोई ऊपर चढ़ा हो तो नीचे से सहारा देना हो, सामान हटाना हो, पर्दा खींचना हो- जो काम मिला, कर लिया. पृथ्वी में काम करने वाले हर आदमी से धीरे-धीरे पहचान होने लगी. उस वक्त पृथ्वी का टिकट भी आज की तरह महंगा नहीं था. तीस रुपये. हां, तीस रुपये. मेरे लिए वह तीस रुपये सिर्फ टिकट के पैसे नहीं थे. वह उस दुनिया में दाखिल होने की कीमत थे, जहां मैं अपने से बड़े कलाकारों को काम करते देख सकता था. जहां शाम को नाटक होना है, उससे पहले घंटों तैयारी चलती थी. कोई स्टार नहीं, कोई छोटा-बड़ा नहीं. जो काम सामने आया, वह कर दिया. और नाना भी उसी दुनिया के आदमी थे. रुकिएगा, यहां एक बात फिर से कहनी जरूरी है. सज्जाद को कौन भूल सकता है? नाना के शुरुआती थिएटर किरदारों में से एक सज्जाद था. आज जब नाना का नाम लेते ही फिल्मों के बड़े-बड़े किरदार आंखों के सामने घूम जाते हैं, तब कभी-कभी यह याद करना जरूरी है कि यह आदमी पहले स्टेज पर अपने किरदार के साथ जीता था. नाना को मैंने सिर्फ गुस्से में नहीं देखा. उनके भीतर गुस्सा था, लेकिन वह गुस्सा सिर्फ उनका स्वभाव नहीं था. उन्हें लगता था कि समाज में कुछ गलत हो रहा है तो उसे गलत कहना चाहिए. देश की मिट्टी में कोई गलत जगह गड्ढा खोद दे, तो वह तिलमिला उठते थे. आसपास कुछ गलत होता, तो भीतर से बेचैन हो जाते. शायद इसलिए दुनिया ने उन्हें गुस्सैल नाना के रूप में ज्यादा याद किया. लेकिन सच यह भी है कि उनके जैसा मजाकिया आदमी मिलना मुश्किल था. वह एकदम गंभीर चेहरा बनाकर एक शब्द बोलते और सामने वाला हंसते-हंसते लोटपोट हो जाता. मुझे उनकी एक तस्वीर आज भी याद है. स्टेज पर उस वक्त कोई बड़ा कलाकार नहीं था. कुछ लोग काम कर रहे थे. शाम को नाटक होना था. स्टेज

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‘कानूनन हम ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा नहीं ले सकते, विवेक के आधार पर देना होगा त्यागपत्र’: सलमान खुर्शीद

8 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगे या नहीं, यह कौन तय करेगा? ज्ञानेश कुमार खुद यह तय करेंगे या देश का कानून? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील सलमान खुर्शीद से बात की. जानिए, उन्होंने इन सवालों के जवाब में क्या कहा है… {“type”:”faq”,”question”:”क्या संविधान या कानून में CEC के इस्तीफे को लेकर कोई जिक्र है?”,”answer”:”नहीं, संविधान में CEC के इस्तीफे की प्रक्रिया को लेकर सीधे-सीधे कोई उल्लेख नहीं है, हालांकि, अनुच्छेद 324 में चुनाव आयोग, CEC की नियुक्ति, कार्यकाल और उन्हें हटाने का जिक्र जरूर किया गया है. CEC को हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया महाभियोग के जरिए अपनाई जाती है.nnमुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त स्वैच्छिक तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. 2020 में अशोक लवासा और 2024 में अरुण गोयल ने अलग-अलग वजहों से इस्तीफा दिया था. यह इसका उदाहरण है. कोई जबरदस्ती उनसे इस्तीफा नहीं ले सकता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”अगर कानूनन कोई इस्तीफा नहीं ले सकता है तो यह प्रदर्शन क्यों?”,”answer”:”ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन इसलिए हो रहा है, ताकि वह नैतिक तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे दें. अगर देखा जाए तो विवेक के आधार पर ज्ञानेश कुमार को पहले ही इस पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. वह लोकतंत्र के सबसे ताकतवर पदों में से एक पर बैठे हैं. अगर उनको लेकर ही लोगों के मन में संदेह होगा तो फिर पूरी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा होने लगेगा.”}{“type”:”faq”,”question”:”क्या कोई ठोस सबूत ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है, नहीं तो बिना सबूत इतना बड़ा प्रदर्शन क्यों?”,”answer”:”सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दर्ज हैं. सभी याचिकाओं में SIR प्रक्रिया और ज्ञानेश कुमार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. अब कोर्ट की यह जिम्मेदारी है कि वह इसकी जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी नियुक्त करे. एक ऐसी कमेटी, जो लोगों और नेतृत्वक दलों के संदेह की जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दे.nnअगर जांच नहीं होती है और वह पद पर बने रहते हैं तो इससे लोकतंत्र को लेकर संदेह और गहरा जाएगा। इसलिए जितनी जल्दी इसकी ठोस जांच हो जाए, उतना अच्छा है.”}{“type”:”faq”,”question”:”अगर मुद्दा इतना ही महत्वपूर्ण है तो विपक्षी दल एकजुट क्यों नहीं हैं?”,”answer”:”सभी दल एकजुट हैं. आप जिस आम आदमी पार्टी की बात कर रहे हैं, वह भी हमारे मुद्दे पर साथ है. भले ही वह हमारे प्रदर्शन में किसी नेतृत्वक वजह से शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर सभी दल एकजुट हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”मुख्य चुनाव आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है?”,”answer”:”संविधान के अनुच्छेद 324(5) में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान तरीके से और समान आधारों पर पद से हटाया जा सकता है. nnयह प्रावधान 2023 अधिनियम की धारा 11(2) में भी पाया जा सकता है. अनुच्छेद में आगे कहा गया है कि किसी अन्य चुनाव आयुक्त या क्षेत्रीय आयुक्त को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जाएगा.nnचुनाव आयोग को नेतृत्वक दबावों से बचाने के उद्देश्य से, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का मानदंड जानबूझकर बहुत कठिन रखा गया है. nnसंविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया बताई गई है, किसी न्यायाधीश को केवल प्रमाणित दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है.nnदुर्व्यवहार में किसी भी प्रकार की भ्रष्ट गतिविधियां या पद का दुरुपयोग शामिल हो सकता है. वर्षों से, न्यायालयों ने इसकी व्याख्या इस प्रकार की है कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के लिए अनुपयुक्त कार्य या मुख्य चुनाव आयुक्त के जरिए अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफलता भी शामिल है. अक्षमता से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने में असमर्थ हो.”} The post ‘कानूनन हम ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा नहीं ले सकते, विवेक के आधार पर देना होगा त्यागपत्र’: सलमान खुर्शीद appeared first on Naya Vichar.

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क्या आप जानते हैं कि रूपी सोरेन भी लड़ी थीं लोकसभा चुनाव? बाबूलाल मरांडी से हुआ था मुकाबला

रांची: झारखंड की नेतृत्व में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के परिवार का दुमका से गहरा और पुराना रिश्ता रहा है. शिबू सोरेन की धर्मपत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन किस्कू ने अपने जीवन में केवल एक बार चुनाव लड़ा था. वर्ष 1999 में उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दुमका लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था. इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता और उस समय केंद्र प्रशासन में मंत्री रहे बाबूलाल मरांडी से हुआ था. कांटे के मुकाबले में रूपी सोरेन महज 4648 मतों के अंतर से चुनाव हार गयी थीं. 1999 में शिबू सोरेन की परंपरागत सीट पर उतरीं वर्ष 1999 का दुमका लोकसभा चुनाव झामुमो के लिए काफी महत्वपूर्ण था. दुमका को लंबे समय से शिबू सोरेन की नेतृत्वक कर्मभूमि माना जाता रहा है. ऐसे में पार्टी ने उनकी पत्नी रूपी सोरेन को मैदान में उतारा. दूसरी ओर भाजपा ने उस समय के केंद्रीय मंत्री और पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल बाबूलाल मरांडी को उम्मीदवार बनाया. चुनाव में दोनों के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला. सिर्फ 4648 वोट से मिली हार चुनाव परिणाम में भाजपा के बाबूलाल मरांडी को 2,01,141 वोट मिले, जबकि झामुमो की रूपी सोरेन किस्कू को 1,96,493 मत प्राप्त हुए. दोनों उम्मीदवारों के बीच केवल 4648 वोट का अंतर रहा. इस तरह रूपी सोरेन अपने एकमात्र चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने भाजपा के मजबूत उम्मीदवार को कड़ी चुनौती दी. चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश भी की थी. दुमका से रहा गहरा पारिवारिक रिश्ता रूपी सोरेन का दुमका से रिश्ता केवल चुनाव तक सीमित नहीं था. शिबू सोरेन ने दुमका को अपनी नेतृत्वक कर्मभूमि बनाया था. अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चले लंबे आंदोलन में दुमका महत्वपूर्ण केंद्र रहा. शिबू सोरेन ने इसी क्षेत्र से आंदोलन को मजबूत किया और अलग झारखंड राज्य के गठन की नेतृत्वक लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. शिबू सोरेन आठ बार रहे सांसद दुमका लोकसभा सीट शिबू सोरेन के नेतृत्वक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रही. वह इस सीट से आठ बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. लंबे समय तक दुमका में सक्रिय रहने के कारण उनका यहां व्यापक नेतृत्वक और सामाजिक जुड़ाव बना. इसी दौरान रूपी सोरेन भी उनके साथ नेतृत्वक और सामाजिक गतिविधियों में नजर आती रहीं. दुमका के खिजुरिया स्थित आवास से भी सोरेन परिवार का पुराना रिश्ता रहा है. बेटों ने भी दुमका की नेतृत्व संभाली रूपी सोरेन और शिबू सोरेन के तीनों बेटों का भी दुमका की नेतृत्व से सीधा जुड़ाव रहा. उनके बड़े पुत्र स्वर्गीय दुर्गा सोरेन जामा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक बने. इसके बाद हेमंत सोरेन ने वर्ष 2009 में दुमका विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया. बाद में उन्होंने राज्य की नेतृत्व में अपनी अलग पहचान बनाई और झारखंड के मुख्यमंत्री बने. बसंत सोरेन भी लगातार दूसरी बार विधायक शिबू और रूपी सोरेन के छोटे पुत्र बसंत सोरेन भी दुमका की नेतृत्व में सक्रिय रहे हैं. वर्तमान में वह दुमका विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक हैं. इस तरह एक ही परिवार की कई पीढ़ियों ने दुमका का नेतृत्वक प्रतिनिधित्व किया है. शिबू सोरेन की लोकसभा नेतृत्व से लेकर दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन तक, दुमका सोरेन परिवार की नेतृत्वक यात्रा का अहम केंद्र रहा है. इसे भी पढ़ें: मां के पार्थिव शरीर के साथ एंबुलेंस में बैठे हेमंत सोरेन, भावुक कर देने वाला दृश्य; नेमरा रवाना हुआ काफिला एक चुनाव, लेकिन लंबा नेतृत्वक जुड़ाव रूपी सोरेन ने भले ही अपने जीवन में केवल एक बार चुनाव लड़ा, लेकिन दुमका से उनका जुड़ाव उससे कहीं पुराना और व्यापक था. 1999 के चुनाव में उन्होंने बाबूलाल मरांडी को कड़ी टक्कर दी. चुनाव परिणाम में मामूली अंतर से हार के बावजूद उनका नेतृत्वक महत्व परिवार और पार्टी के संदर्भ में बना रहा. दुमका ने सोरेन परिवार को लगातार नेतृत्वक जमीन दी और परिवार के सदस्यों ने भी अलग-अलग दौर में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. यही वजह है कि रूपी सोरेन का नाम भी दुमका और सोरेन परिवार के नेतृत्वक इतिहास से अलग नहीं किया जा सकता. इसे भी पढ़ें: Rupi Soren Funeral Live: मां की अंतिम विदाई में फूट-फूट कर रोए CM हेमंत, थोड़ी देर में पंचतत्व में विलीन होंगी रूपी सोरेन The post क्या आप जानते हैं कि रूपी सोरेन भी लड़ी थीं लोकसभा चुनाव? बाबूलाल मरांडी से हुआ था मुकाबला appeared first on Naya Vichar.

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‘वोट चोरी’ के आरोपों पर 42 पूर्व जजों का खुला पत्र, दी ऐसी चेतावनी

हिंदुस्तान के लोगों के नाम लिखे खुले पत्र के जरिए 42 पूर्व न्यायाधीशों ने निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर गंभीर चिंता जताई है. पूर्व न्यायाधीशों ने बिना ठोस सबूत के लगाए जा रहे ‘‘वोट चोरी’’ के आरोपों पर भी सवाल उठाए हैं. ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर उठाए सवाल खुले पत्र में पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक प्राधिकारियों को बार-बार ‘‘चोर’’ या ‘‘समझौता कर चुके’’ बताने से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है. इन पूर्व जजों ने लिखा खुला पत्र क्र.सं. पदवी नाम पद/विवरण 1 जस्टिस हेमंत गुप्ता पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय 2 जस्टिस पंकज मित्तल पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय 3 जस्टिस बी.सी. पटेल पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर तथा दिल्ली उच्च न्यायालय 4 जस्टिस सुभ्रो कमल मुखर्जी पूर्व मुख्य न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय 5 जस्टिस परमोद कोहली पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सिक्किम उच्च न्यायालय 6 जस्टिस एस.एम. सोनी पूर्व न्यायाधीश, गुजरात उच्च न्यायालय एवं लोकायुक्त, गुजरात राज्य 7 जस्टिस एस.एन. ढींगरा पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय 8 जस्टिस कृष्णा एस. दीक्षित पूर्व न्यायाधीश, कर्नाटक एवं उड़ीसा उच्च न्यायालय 9 जस्टिस श्रीधर राव पूर्व न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय 10 जस्टिस आर.एस. राठौड़ पूर्व न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय 11 जस्टिस प्रशांत कुमार अग्रवाल पूर्व न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय 12 जस्टिस के.के. त्रिवेदी पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 13 जस्टिस डी.के. पालीवाल पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 14 जस्टिस राकेश सक्सेना पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 15 जस्टिस राजेंद्र कुमार पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 16 जस्टिस सुभाष संवत्सर पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 17 जस्टिस वेद प्रकाश शर्मा पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 18 जस्टिस आलोक वर्मा पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 19 जस्टिस आई.एस. श्रीवास्तव पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 20 जस्टिस सुभाष साकरीकर पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 21 जस्टिस एस.पी. खरे पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 22 जस्टिस पी.एन. सिंह पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 23 जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय 24 जस्टिस सुरेंद्र विक्रम सिंह राठौड़ पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय 25 जस्टिस एस.एन. श्रीवास्तव पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं लोकायुक्त, छत्तीसगढ़ राज्य 26 जस्टिस रमेश कुमार मेराठिया पूर्व न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय 27 जस्टिस करम चंद पुरी पूर्व न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय 28 जस्टिस (श्रीमती) राज राहुल गर्ग पूर्व न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय 29 जस्टिस सी.वी. नागार्जुन रेड्डी पूर्व न्यायाधीश, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय 30 जस्टिस विनोद गोयल पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय 31 जस्टिस जी.पी. मित्तल पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय 32 जस्टिस वी.बी. गुप्ता पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय 33 जस्टिस दीपा शर्मा पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय 34 जस्टिस पी.एन. रवींद्रन पूर्व न्यायाधीश, केरल उच्च न्यायालय 35 जस्टिस ज्योतिंद्रनाथ पूर्व न्यायाधीश, केरल उच्च न्यायालय 36 जस्टिस लोकपाल सिंह पूर्व न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय 37 जस्टिस सुभाष चंद्र पूर्व न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय 38 जस्टिस विवेक हिंदुस्तानी शर्मा पूर्व न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय 39 जस्टिस नरिंदर कुमार संस्थाएं (Institutions) 40 जस्टिस राजेंद्र कुमार पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं निर्णायक अधिकारी, गुरुग्राम रेरा प्राधिकरण (RERA) 41 जस्टिस सुभाष बत्रा पूर्व सदस्य (विधि/कानूनी), पीएनजीआरबी (PNGRB) 42 जस्टिस जे.ए.पी. श्रीवास्तव पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ‘संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार’ पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है. हालांकि, संस्थाओं को बदनाम करना अलग बात है. पत्र में कहा गया, ‘‘संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है. बदनाम करना नहीं.’’ संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर जोर पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 42 पूर्व न्यायाधीशों ने निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास महत्वपूर्ण है और ऐसे आरोपों से बचना चाहिए, जो बिना प्रमाण के उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हों. The post ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर 42 पूर्व जजों का खुला पत्र, दी ऐसी चेतावनी appeared first on Naya Vichar.

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जब नाना पाटेकर पर भारी पड़ा ‘बिहारी’ किरदार, 14 महीने तक रहे परेशान, कहते थे- ‘ज्यादा दिन नहीं जी सकता’

बिहार की मिट्टी, वहां की ठेठ बोली और बात-बात में झलकता दबदबा. फिल्मों में जब किसी किरदार की जुबान में बिहार उतरता है तो सिर्फ उसका लहजा नहीं बदलता, पूरा व्यक्तित्व बदल जाता है. नाना पाटेकर ने भी एक ऐसे ही किरदार को पर्दे पर उतारा था, जिसकी भाषा में ठसक थी, बातों में हुक्म और अंदाज में ऐसा रौब कि सामने वाला संभलकर खड़ा रहे. यह था ‘अपहरण’ का तबरेज आलम. नाना पाटेकर को पर्दे पर आपने कई रंगों में देखा है. कभी गुस्से में आग उगलता पुलिस अफसर, कभी सिस्टम से लड़ता आम आदमी और कभी ऐसा किरदार, जिसकी सिर्फ आवाज सुनकर ही माहौल बदल जाता है. लेकिन तबरेज एक किरदार था, जिसे निभाते-निभाते खुद नाना पाटेकर उसके असर से परेशान हो गए थे. बिहार की नेतृत्व, अपराध और अपहरण के धंधे की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में नाना ने ऐसा नेतृत्वक किरदार निभाया था, जिसे देखकर दर्शकों को लगा कि वह किसी एक शख्स की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर के पूरे सिस्टम का चेहरा है. दिलचस्प बात यह है कि नाना खुद भी इस किरदार से लंबे वक्त तक दूर नहीं रह पाए. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह जिस किरदार को निभाते हैं, उसे फिल्म की शूटिंग के दौरान जीने लगते हैं. उसका असर उनके हावभाव और सोच पर भी पड़ता है. ‘अपहरण’ में तबरेज आलम का किरदार इतना जटिल था कि नाना ने निर्देशक प्रकाश झा से फिल्म जल्द खत्म करने को कहा था. उनका कहना था कि इस किरदार को लगातार दिमाग में रखना परेशान करने वाला हो रहा था. कौन था तबरेज आलम, जिसे निभाना नाना के लिए इतना मुश्किल था? ‘अपहरण’ में तबरेज आलम कोई साधारण विलेन नहीं था. वह एक ताकतवर नेतृत्वक शख्सियत था, जो नेतृत्व के साथ अपहरण के कारोबार से भी जुड़ा हुआ था. प्रकाश झा ने इसे बिहार में उस समय मौजूद अपहरण उद्योग और अपराध-नेतृत्व के रिश्ते की पृष्ठभूमि में रखा था. फिल्म की कहानी अजित यानी अजय देवगन के इर्द-गिर्द घूमती है. अजित एक पढ़ा-लिखा बेरोजगार युवक है, जो पुलिस में जाना चाहता है. लेकिन परिस्थितियां उसे धीरे-धीरे उस दुनिया में पहुंचा देती हैं, जहां तबरेज आलम की तूती बोलती है. अजित के लिए तबरेज शुरुआत में ताकत और सफलता का प्रतीक नजर आता है. लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगता है कि इस ताकत की कीमत कितनी बड़ी है. निर्देशक प्रकाश झा ने फिल्म के लिए बिहार में अपहरण के कारोबार को करीब से समझने की कोशिश की थी. उन्होंने लोगों से बातचीत की, जेल जाकर इस धंधे से जुड़े लोगों से बात की और अपहरण का शिकार हुए लोगों से भी बातचीत की. इसी अनुभव को फिल्म की पृष्ठभूमि बनाया गया. यानी तबरेज आलम का संसार सिर्फ फिल्मी कल्पना नहीं था. उसके पीछे बिहार के उस दौर का सामाजिक और नेतृत्वक माहौल था, जिसे प्रकाश झा करीब से समझना चाहते थे. असली राजनेता से प्रेरणा थी, लेकिन नकल नहीं की नाना ने तबरेज आलम को लेकर एक दिलचस्प बात खुद नाना पाटेकर ने बताई थी. उन्होंने कहा था कि प्रकाश झा ने उन्हें बताया था कि यह किरदार एक वास्तविक राजनेता से मॉडल्ड है. लेकिन नाना ने उस नेता का अध्ययन करके उसकी नकल नहीं की. उन्होंने साफ कहा था कि उन्होंने किरदार को वैसे निभाया, जैसा प्रकाश झा उसे पर्दे पर देखना चाहते थे. नाना के मुताबिक तबरेज के किरदार को आकार देने में करीब 80 फीसदी योगदान निर्देशक का था. वह सिर्फ निर्देशक के विजन को समझकर उसे अपने अभिनय से पर्दे पर उतार रहे थे. प्रकाश झा ने भी उस समय साफ किया था कि फिल्म में किसी वास्तविक बिहारी राजनेता के नाम पर कोई किरदार नहीं रखा गया था. यानी तबरेज आलम को किसी एक नेता की हूबहू कॉपी मानना सही नहीं होगा. यही बात इस किरदार को और दिलचस्प बनाती है. वह किसी एक व्यक्ति की बायोपिक नहीं था. बल्कि सत्ता, अपराध और अपने किए को सही ठहराने वाली मानसिकता का फिल्मी रूप था. ‘गलत’ काम करता था, फिर भी खुद को सही मानता था तबरेज आलम की सबसे खतरनाक बात सिर्फ उसका अपराधी होना नहीं था. उसकी असली ताकत यह थी कि वह अपने फैसलों को गलत मानता ही नहीं था. नाना ने खुद तबरेज को ऐसा नेतृत्वक व्यक्ति बताया था, जिसे पूरा विश्वास था कि वह जो भी कर रहा है, वह ऊपर वाले की इच्छा के मुताबिक कर रहा है. उसके लिए सही और गलत का फैसला नैतिकता से ज्यादा उसकी अपनी सोच तय करती थी. यही वजह थी कि नाना इसे सामान्य विलेन नहीं मानते थे. यहीं से किरदार में वह डर पैदा होता है, जो किसी चीखते-चिल्लाते गुंडे से नहीं बल्कि एक ऐसे ताकतवर आदमी से पैदा होता है, जिसे अपने गलत काम में भी कोई गलती नजर नहीं आती. और शायद यही वजह थी कि नाना को यह किरदार निभाना इतना भारी लगा. नाना ने कहा था- ज्यादा दिन तक इसे जीना मुश्किल है नाना पाटेकर का अभिनय करने का तरीका हमेशा से थोड़ा अलग रहा है. वह किरदार को सिर्फ कैमरे के सामने नहीं निभाते, बल्कि शूटिंग के दौरान उसके बारे में लगातार सोचते रहते हैं. ‘अपहरण’ के समय यही तरीका तबरेज आलम पर भारी पड़ गया. करीब 14 महीने के लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान नाना लगातार इस किरदार के बारे में सोचते रहे. उन्होंने बताया था कि वह फिल्म में निभाए जाने वाले किरदार को जीने लगते हैं और उसका असर उनके हावभाव तक पहुंच जाता है. तबरेज का किरदार उनके लिए इतना परेशान करने वाला हो गया कि उन्होंने प्रकाश झा से फिल्म जल्दी पूरी करने को कहा. सोचिए, पर्दे पर जिस किरदार को देखकर दर्शक डर रहे थे, उस किरदार से बाहर निकलने की बेचैनी खुद उसे निभाने वाले अभिनेता में पैदा हो गई थी. यही वजह है कि ‘अपहरण’ में नाना का तबरेज आलम सिर्फ एक विलेन बनकर नहीं रह गया. उसकी आवाज, ठहराव, बोलने का अंदाज और सत्ता पर भरोसा करने वाली बॉडी लैंग्वेज ने उसे नाना पाटेकर के सबसे यादगार किरदारों में शामिल कर दिया. नाना ने इस किरदार का श्रेय भी खुद तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने साफ कहा

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पीएम मोदी ने किया इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का उद्घाटन, कहा- ‘देश के हर जिले तक पहुंची 5G कनेक्टिविटी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया. चार दिनों तक चलने वाला यह कार्यक्रम हिंदुस्तान की दूरसंचार, डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में हुई प्रगति को प्रदर्शित कर रहा है. आईएमसी 2026 की थीम “स्केल विदाउट बाउंड्रीज” (Scale Without Boundaries) रखी गई है. यह हिंदुस्तान की डिजिटल इनोवेशन क्षमता और तकनीक-संचालित विकास को दर्शाती है. समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस का यह मंच हिंदुस्तान में टेलीकॉम सेक्टर और डिजिटल कनेक्टिविटी के परिवर्तन का साक्षी रहा है. उन्होंने कहा, “अब देश के हर जिले तक 5G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है और पूरे हिंदुस्तान में 5 लाख 50 हजार से अधिक 5G बेस स्टेशन काम कर रहे हैं.” डिजिटल इन्क्लूजन (समावेशिता) और सस्ता डेटा इस अवसर पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का हमेशा से यह आग्रह रहा है कि तकनीक केवल आखिरी गांव तक ही नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक तक पहुंचे. उन्होंने जोर दिया कि तकनीक का वास्तविक विस्तार तभी संभव है जब वह सस्ती और समावेशी हो. संचार मंत्री ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि साल 2014 में एक गीगाबाइट (1 GB) डेटा की कीमत लगभग 268 रुपये थी, जबकि आज यह घटकर औसतन महज 8 रुपये रह गई है. इसके साथ ही हिंदुस्तान दुनिया के सबसे सस्ते डेटा वाले देशों में शामिल हो गया है. उन्होंने उपकरण निर्माताओं, टेलीकॉम ऑपरेटर्स और इस क्षेत्र से जुड़े तमाम कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से हिंदुस्तान में 5G तकनीक को दुनिया में सबसे तेजी से अपनाया गया है. हिंदुस्तान में अब 5G उपयोगकर्ताओं की संख्या 55 करोड़ (550 मिलियन) तक पहुंच गई है. वैश्विक मंच पर उभरता हिंदुस्तान इंडिया मोबाइल कांग्रेस का मुख्य ध्यान अगली पीढ़ी के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक आधारित आर्थिक विकास, समावेशी डिजिटल पहुंच और सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण पर है. इस वैश्विक आयोजन में तकनीक जगत के दिग्गज, नीति निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स, निवेशक और इनोवेटर्स एक साथ आए हैं. इस साल आयोजन का दायरा बढ़ाते हुए इसमें चार नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है: स्मार्ट मोबिलिटी (Smart Mobility) स्टेडियम एक्सपीरियंस (Stadium Experiences) इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स (Industrial Robotics) ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी (Transport Technology) आईएमसी 2026 में 100 से अधिक देशों के 1.5 लाख से भी ज्यादा प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं. इसके अलावा, 500 से अधिक पार्टनर और प्रदर्शक तथा 600 से अधिक स्टार्टअप्स इसमें शामिल हुए हैं. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 का आयोजन कहां हो रहा है? IMC 2026 के 10वें संस्करण का आयोजन नई दिल्ली के यशोभूमि (Yashobhoomi) कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है. 2. IMC 2026 की थीम क्या है? इस साल इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम “स्केल विदाउट बाउंड्रीज” (Scale Without Boundaries) रखी गई है. 3. हिंदुस्तान में वर्तमान में 5G कनेक्टिविटी और डेटा की क्या स्थिति है? हिंदुस्तान के सभी जिलों तक 5G नेटवर्क पहुंच चुका है और 5.5 लाख से अधिक बेस स्टेशन कार्यरत हैं. देश में 5G यूजर्स की संख्या 55 करोड़ हो गई है और 1GB डेटा की औसतन कीमत घटकर लगभग 8 रुपये रह गई है. ये भी पढ़ें: India Mobile Congress 2026: 10 साल में कैसे बदली हिंदुस्तान की डिजिटल कहानी, 6G और AI के दौर में पहुंचा IMC The post पीएम मोदी ने किया इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का उद्घाटन, कहा- ‘देश के हर जिले तक पहुंची 5G कनेक्टिविटी’ appeared first on Naya Vichar.

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राहुल-प्रियंका पर 3 और FIR, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की का आरोप, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर एक्शन

Delhi Protest: चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने एक और मामला दर्ज किया है. इस FIR में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं. पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट, धक्का-मुक्की, प्रशासनी काम में बाधा और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं. इससे एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी भवन की घटना को लेकर भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की थी. जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे विपक्षी सांसद INDIA गठबंधन के सांसद बुधवार (7 अक्टूबर) को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की ओर जाना चाहते थे. दिल्ली पुलिस ने सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद मौके पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान हुई. राहुल गांधी बैरिकेड वाला गेट खोलने की कोशिश करते नजर आए. पुलिस ने बाद में उन्हें हिरासत में लेकर बाराखंबा रोड पुलिस स्टेशन पहुंचाया. राहुल बोले- गिरफ्तारी और केस से नहीं रुकेंगे राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई के बाद कहा कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन सड़कों पर उतरते रहेंगे. उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी और कानूनी मामलों के बावजूद विरोध जारी रहेगा. राहुल ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन नहीं रोका जाएगा. संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी और विपक्ष जितनी बार जरूरत हो उतनी बार सड़कों पर उतरने, गिरफ्तारी का सामना करने या कानूनी कार्रवाई झेलने के लिए तैयार हैं. तानाशाही मोदी प्रशासन और चुनाव आयोग के बीच यह गठबंधन पहले ही बेनकाब हो चुका है. अब इस्तीफे और कार्रवाई का समय आ गया है- राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष प्रियंका गांधी भी हिरासत में ली गईं प्रियंका गांधी वाड्रा को भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया. उन्हें छत्रसाल स्टेडियम पुलिस स्टेशन ले जाया गया. पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रियंका सड़क पर लेटी हुई दिखाई दीं. प्रियंका ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे सांसदों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया. हिरासत के दौरान उन्होंने संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि विपक्ष संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा. पुलिस के आरोप प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और धक्का-मुक्की की गई. पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने से रोकने का आरोप है. जवानों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत भी दर्ज की गई है. इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग धाराओं में तीन FIR दर्ज हुई हैं. पुलिस खंगाल रही है प्रदर्शन से जुड़े वीडियो. वीडियो के जरिए घटनाक्रम और शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है. FIR पर राहुल का पलटवार राहुल गांधी ने FIR को लेकर कहा कि उनके खिलाफ पहले से 45 मामले दर्ज हैं और वह हर FIR को अपने लिए मेडल मानते हैं. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचने का है. कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को नेतृत्वक प्रतिशोध बताया और आरोप लगाया कि SIR और चुनाव आयोग से जुड़े सवाल उठाने पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है. Also Read: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज देशभर में कांग्रेस का प्रदर्शन, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जेन Z छेड़ेगा आंदोलन The post राहुल-प्रियंका पर 3 और FIR, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की का आरोप, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर एक्शन appeared first on Naya Vichar.

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“अचानक फोन आया और सब खत्म हो गया…” नाना पाटेकर के निधन से टूटे बेटे मल्हार, बदहवास हालत में गोवा के लिए रवाना

“मैं तो पुणे में था… उस सुबह अचानक फोन आया और सब कुछ खत्म हो गया.” यह दर्दभरे शब्द हैं दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर के. दरअसल, 8 अक्टूबर की सुबह फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बेहद बुरी समाचार सामने आई, जब 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर का अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया. सबसे ज्यादा दुख देने वाली बात यह रही कि जिस वक्त नाना पाटेकर अपनी जिंदगी की आखिरी सांसें ले रहे थे, उस दौरान वह अपने परिवार के साथ नहीं थे, बल्कि गोवा वाले घर पर अकेले थे. पिता के इस दुनिया को अलविदा कहते वक्त उनके बेटे मल्हार भी उनके पास मौजूद नहीं थे. अब इस गहरे सदमे के बीच बेटे मल्हार का पहला इमोशनल रिएक्शन सामने आया है, जो समाचार सुनते ही पुणे से सीधे गोवा के लिए रवाना हो चुके हैं. रोते हुए बोले मल्हार- ‘मैं गोवा भाग रहा हूं, कुछ समझ नहीं आ रहा’ पिता के अचानक चले जाने से मल्हार पूरी तरह टूट गए हैं. फोन पर मीडिया से बात करते हुए मल्हार का गला भर आया और उन्होंने रोते हुए कहा: “मुझे जैसे ही पता चला, मैं तुरंत सब कुछ छोड़कर परिवार के साथ गोवा के लिए निकल पड़ा हूं. मेरे पास अभी पूरी बात समझने तक का वक्त नहीं मिला है. मैं तो पुणे में था. गोवा पहुंचकर ही डॉक्टरों से बात करूंगा कि आखिर उस सुबह पापा के साथ क्या हुआ था.” मल्हार की लड़खड़ाती आवाज बता रही थी कि पिता को खोने का दर्द उनके लिए कितना बड़ा है. ये भी पढ़ें: 80 करोड़ के मालिक, फिर भी 1BHK में रहे नाना पाटेकर, जानिए कितनी संपत्ति छोड़ गए करीब 45 मिनट तक नाना की जान बचाने में जुटे रहे डॉक्टर नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला इलाके में अपने घर पर रुके हुए थे. 8 अक्टूबर की सुबह-सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और सीने में तेज दर्द हुआ. उन्हें फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की, सीपीआर दिया, लेकिन सुबह करीब 5:20 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. जब तक परिवार या बेटा गोवा पहुंच पाते, नाना पाटेकर हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद चुके थे. पिता के पार्थिव शरीर को पुणे लेकर आएंगे मल्हार मल्हार ने बताया कि वह गोवा पहुंचते ही अस्पताल की जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करेंगे. इसके बाद दोपहर तक वह अपने पिता के पार्थिव शरीर को लेकर पुणे लौटेंगे. मल्हार ने कहा: “अभी घर में सबका रो-रोकर बुरा हाल है. पापा के जाने का यकीन नहीं हो रहा. लेकिन अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें पूरे सम्मान के साथ आखिरी विदाई दें.” ये भी पढ़ें: रात 2:30 बजे दोस्त को किया था आखिरी मैसेज… फिर फर्श पर तड़पते रहे, नाना पाटेकर की आखिरी रात की कहानी जानें The post “अचानक फोन आया और सब खत्म हो गया…” नाना पाटेकर के निधन से टूटे बेटे मल्हार, बदहवास हालत में गोवा के लिए रवाना appeared first on Naya Vichar.

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