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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी, अभिजीत दीपके ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उनकी पार्टी देशभर में आंदोलन शुरू करेगी. दीपके ने कहा, “अगर 48 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कॉकरोच जनता पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी. जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, हम पीछे नहीं हटेंगे.” उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए. दीपके ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग यह तय कर रहा है कि किसे वोट देने का अधिकार मिलेगा और किसे नहीं. क्या है पूरा विवाद? चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आई है. The Indian Express की रिपोर्ट के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने बताया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं. ये भी पढ़ें: क्या बिहार, बंगाल समेत 5 राज्यों में दोबारा चुनाव होंगे? ECI में लिखित आपत्ति सामने आने के बाद विपक्ष ने कर दी ये मांग जिसके बाद से विपक्ष भी ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग कर रही है. इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉफ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की इस्तीफे की मांग की है और 48 घंटे के भीतर इस्तिफा नहीं देने पर देशव्यापी आंदोलन करने की चेतावनी दी है. The post ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी, अभिजीत दीपके ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम appeared first on Naya Vichar.

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‘दबोचते हैं, गोद में उठाते हैं, रोकें तो गोली चलती है,’ जमुई का वीडियो देख बोली ऑर्केस्ट्रा डांसर, ये रोज हमारे साथ होता है

जमुई की घटना पर बिहार की एक ऑर्केस्ट्रा डांसर ने अपनी भावनाएं नया विचार के साथ साझा की. आप भी पढ़ें और सोचे. जमुई का वायरल वीडियो देखकर बहुत लोगों को गुस्सा आया होगा. मुझे भी बुरा लगा… पर मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं है. क्योंकि रोटी के लिए मैं स्टेज पर होती हूं और वहां हमारे साथ ये रोज होता है. फर्क बस इतना है कि जमुई में उस दिन किसी ने वीडियो बना लिया और दुनिया ने देख लिया. पर हमारी जिंदगी की ऐसी अनगिनत घटनाएं बिना रिकॉर्ड हुए खत्म हो जाती हैं. मैं 24 साल की हूं और बिहार के सासाराम की रहने वाली हूं. पेशे से ऑर्केस्ट्रा डांसर हूं. सोशल मीडिया पर मेरी प्रोफाइल है, जहां मैंने अपने काम के बारे में साफ-साफ लिखा है, क्योंकि मैं ये काम छिपकर नहीं करती. बचपन में डांस पसंद था, आज यही रोजी-रोटी है मुझे बचपन से ही डांस का शौक था. पढ़ाई में मन नहीं लगता था. घर की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि बहुत कुछ कर सकूं. इसलिए किसी के घर लगन (शादी-ब्याह) हो, मोहल्ले में पूजा हो या कोई अन्य कार्यक्रम, मैं डांस करने जरूर जाती थी. फिर सोचा कि जिस काम को मैं इतनी अच्छी तरह से कर सकती हूं, तो फिर उसे ही रोजी-रोटी का जरिया क्यों ना बनाऊं. स्टेज पर डांस करने के पैसे मिलते थे. मैंने शुरुआत की तो घरवालों ने बहुत डांटा. बहुत कुछ सुनाया. लेकिन मैं नहीं मानी, डांस करना नहीं छोड़ा. मेरी शादी हो गयी, बच्चा भी है आज इस पेशे में करीब सात साल हो चुके हैं. मेरी शादी हो गयी है. मेरा बच्चा भी है, लेकिन मेरा काम आज भी यही है. इसकी कमाई से मेरा घर चलता है. मैं डांसर हूं. इसका मतलब यह तो नहीं कि कोई भी मुझे छूए जमुई का वीडियो मेरे लिए नया नहीं है जब जमुई वाला वीडियो देखा, तो मेरे मन में सबसे पहले यही ख्याल आया कि इसमें नया क्या है. हमारे ऑर्केस्ट्रा के स्टेज पर तो रोज ऐसा होता है. लोग स्टेज के पास आते हैं. हाथ लगाने की कोशिश करते हैं. कई बार दबोच लेते हैं. कई बार गोद में उठा लेते हैं. हम रोकते हैं, तो बहस शुरू हो जाती है. और बात सिर्फ आम लोगों के कार्यक्रमों की नहीं है. कई बार बड़े लोगों के घर, प्रभावशाली लोगों की पार्टियों और शादी-ब्याह में भी यही सब होता है. शिशु भी गलत तरीके से छूने की कोशिश करते हैं कई बार तो स्थिति इतनी शर्मनाक होती है कि बताने में भी शर्म आती है. रोकने पर कहते हैं : पैसा दे देंगे, काहे रोकती हो  दर्द यह है कि शिशु, 12 साल के लड़के अश्लील बातें करते हैं. कई बार कोई लड़का हमें गोद में उठा लेता है. जब हम उसे रोकते हैं, तो जवाब मिलता है कि पैसा दे देंगे, काहे रोक रही हो. उस समय हम क्या करें. हमारा टेंट वाला या साथ का कोई आदमी रोकने की कोशिश करता है, तो मामला हाथापाई तक पहुंच जाता है. कई बार गोली चलने की बात तक सामने आ जाती है. ऐसे में हमें स्टेज छोड़कर भागना पड़ता है. शादी में 4 से 6 हजार, बड़े लोगों के यहां 10 हजार तक फीस लगन वाले घर में एक दिन का करीब 4 से 6 हजार रुपया मिलता है. बड़े और प्रभावशाली लोगों के यहां कार्यक्रम हो, तो फीस 10 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. लेकिन पैसे बढ़ने से हमारी परेशानी कम नहीं होती. शादी में आई स्त्रीओं और परिवार के लोगों से दूर हमारा अलग स्टेज बनाया जाता है. लेकिन वहां बच्चा से लेकर बुजुर्ग तक पहुंच जाते हैं. कई शराब के नशे में भी पहुंचते हैं और उनके बेटे और भतीजे सामने खड़े होते हैं, फिर भी वे हमें छूने की कोशिश करते हैं. जैसे हमारा डांसर होना ही उनके लिए हमारे शरीर पर हक जताने का अधिकार बना जाता है. और सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब यह सब किसी बड़े आदमी के सामने हो रहा होता है और रोकने के बजाय हंसी में टाल दिया जाता है. जवान खून है, मजा लेने दो मैंने ऐसे मौके भी देखे हैं, जब सामने मौजूद बड़े-बुजुर्ग ने अश्लील हरकत कर रहे लड़कों को रोकने के बजाय कहा कि जवान खून है, मजा लेने दो. हम विरोध करें, तो उल्टा हमें ही समझाया जाता है. इतना ही सती सावित्री हो तो यहां क्या कर रही हो. और फिर कपड़ों पर सवाल आता है. ऐसे कपड़े पहनोगी, तो लोग छुएंगे ही. मेरा सवाल है : किसने दिया तुम्हें हक ….लेकिन मेरा सवाल है कि मैं स्टेज पर डांस कर रही हूं, इसका मतलब यह कब से हो गया कि कोई भी मुझे छू सकता है. मेरे कपड़े किसी को मेरी मर्जी के खिलाफ हाथ लगाने का अधिकार नहीं देते. काश, जमुई के वीडियो की तरह हमारी भी जिंदगी कोई दिखाये जमुई में जो हुआ, उसका वीडियो सामने आ गया. लोगों ने देखा कि एक लड़की को घेरकर उसके साथ क्या किया जा रहा था. लेकिन बिहार के अलग-अलग इलाकों में ऑर्केस्ट्रा और स्टेज पर काम करने वाली हम जैसी कितनी ही लड़कियां रोज ऐसी स्थिति से गुजरती हैं, इसका कोई वीडियो नहीं बनाता. हममें से बहुत सी लड़कियां मजबूरी में चुप रहती हैं, क्योंकि हमें रोटी के लिए अगले दिन फिर उसी स्टेज पर जाना है. फिर वही लोग सामने मिल सकते हैं. फिर वही सवाल उठ सकते हैं कि जब इतना बुरा लगता है, तो ये काम क्यों करती हो. मैं भी यही काम करके अपना घर चलाती हूं. अपने शिशु के लिए कमाती हूं. पर आप याद रखें मुझे नाचने की कीमत मिलती है, अपना शरीर छुआने की नहीं. जमुई का वीडियो देखकर लोग कह रहे हैं कि ये गलत हुआ. मैं बस इतना कहूंगी कि यह सिर्फ जमुई की कहानी नहीं. यह उन तमाम स्टेज की कहानी है, जहां किसी लड़की के डांस को, उसकी कलाकार आत्मा को ना देख कर उसके देह से स्पोर्ट्सने की आजादी की उस कलाकार की ओर से मौन सहमति समझ लिया जाता है.  बस इंतजार है उस दिन का जब हमारे इस दर्द

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क्या इंसानों के हाथ से निकल जाएगा एआई का कंट्रोल? UN में सैम ऑल्टमैन की चेतावनी में जानिए कितना दम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अप्रत्याशित प्रगति ने पूरी दुनिया को एक नए तकनीकी मोड़ पर ला खड़ा किया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की उच्चस्तरीय बैठक में ओपनएआई (OpenAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए एक गंभीर चेतावनी जारी की है. ऑल्टमैन ने साफ शब्दों में कहा कि यदि एआई प्रणालियों के विकास पर सही समय पर सख्त सुरक्षा मानक लागू नहीं किए गए, तो भविष्य में इंसानियत इस तकनीक से अपना नियंत्रण पूरी तरह खो सकती है. यह ऐतिहासिक बयान ऐसे समय में आया है जब एआई का दायरा साधारण एल्गोरिदम से बढ़कर स्वायत्त निर्णय लेने वाली तकनीकों तक फैल चुका है. क्यों बढ़ रहा है एआई पर से नियंत्रण खोने का खतरा? सैम ऑल्टमैन के अनुसार, जिस तीव्र गति से एआई मॉडल खुद को री-ट्रेन और अपडेट कर रहे हैं, वह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और कानूनों के बनाने की गति से कहीं अधिक तेज है. अति-स्वायत्तता (Hyper-Autonomy): एआई अब केवल यूजर के इनपुट पर काम करने के बजाय स्वतंत्र रूप से जटिल निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर रहा है. अप्रोच और पारदर्शिता की कमी: एआई सिस्टम के बैकएंड पर क्या प्रोसेसिंग चल रही है, इसे पूरी तरह समझ पाना खुद इसके डेवलपर्स के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. संवेदनशील क्षेत्रों में पैठ: स्वास्थ्य सेवा, वैश्विक बैंकिंग, सुरक्षा प्रणालियों और रक्षा ढांचों में एआई का एकाधिकार बढ़ रहा है. यदि इन तकनीकों में कोई बड़ी चूक या अनियंत्रित व्यवहार होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक सुरक्षा पर पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र संघ में वैश्विक नियमों की मांग यूएन सुरक्षा परिषद में फ्रांस, ब्रिटेन और अन्य सदस्य देशों ने इस मुद्दे को परमाणु तकनीक के शुरुआती दौर जैसा गंभीर बताया है. बैठक के दौरान विभिन्न वैश्विक विशेषज्ञों और टेक लीडर्स ने निम्नलिखित मुख्य सिफारिशें रखीं: अंतरराष्ट्रीय मानक: परमाणु ऊर्जा की तर्ज पर एआई तकनीक के निरीक्षण के लिए एक वैश्विक नियामक संस्था बनाई जाए. बायोलॉजिकल वेपन्स पर रोक: एआई का उपयोग जैविक हथियार या घातक स्वचालित हथियार प्रणालियों (Killer Robots) को विकसित करने में न हो, इसके लिए तुरंत सख्त वैश्विक नियम बने. लाइसेंसिंग और सेफ्टी ऑडिट: किसी भी एडवांस्ड एआई मॉडल को सार्वजनिक करने से पहले उसके सुरक्षा मापदंडों की स्वतंत्र जांच अनिवार्य की जाए. वैश्विक नेतृत्व और आर्थिक प्रतिस्पर्धा की चुनौती हालांकि, इस वैश्विक सुरक्षा ढांचे को लागू करना इतना आसान नहीं है. अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख देश तकनीकी बढ़त हासिल करने की होड़ में हैं. कुछ सलाहकारों का मानना है कि अत्यधिक नियमन या पाबंदियों से तकनीकी नवाचार की गति धीमी पड़ सकती है. वहीं दूसरी ओर, विकासशील देशों की चिंता यह है कि एआई का नियंत्रण केवल कुछ मुट्ठी भर शक्तिशाली कंपनियों या अमीर देशों के हाथों में सिमटकर न रह जाए. FAQs: सैम ऑल्टमैन की UN चेतावनी से जुड़े मुख्य सवाल 1. सैम ऑल्टमैन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में क्या मुख्य चेतावनी दी? उन्होंने आगाह किया कि एआई के तेजी से होते विकास के कारण भविष्य में इंसान इस पर से अपना प्रभावी नियंत्रण खो सकते हैं और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया इंसानों के हाथों से निकल सकती है. 2. एआई के अनियंत्रित होने से आम लोगों और वैश्विक सुरक्षा को क्या खतरा है? अनियंत्रित एआई साइबर हमलों, भ्रामक सूचनाओं के प्रसार, बैंकिंग व बुनियादी ढांचे के ठप होने और स्वायत्त रक्षा प्रणालियों के गलत निर्णयों का कारण बन सकता है. 3. क्या वैश्विक स्तर पर एआई को रोकने या नियंत्रित करने के लिए कोई नियम बन रहे हैं? हां, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ (EU) और जी-20 देश एआई की सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और एथिकल यूज़ के लिए साझा अंतरराष्ट्रीय नियम व मानक तैयार करने पर काम कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: Claude AI से मिसाइल तक पहुंचा आतंकी नेटवर्क? यमन के हथियार प्रोजेक्ट ने दुनिया के लिए बजाया खतरे का सायरन ये भी पढ़ें: UN और रेड क्रॉस ने ‘किलर रोबोट्स’ पर दी चेतावनी- ‘यह तकनीक इंसानियत के लिए खतरा’ The post क्या इंसानों के हाथ से निकल जाएगा एआई का कंट्रोल? UN में सैम ऑल्टमैन की चेतावनी में जानिए कितना दम appeared first on Naya Vichar.

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Salman Khan को शर्म आनी चाहिए… सुनील पाल ने सरेआम कर दी भाईजान की बेइज्जती, बोले- तुरंत बंद करो अपना गटर शो बिग बॉस

बिग बॉस 20 के वीकेंड का वार में सलमान खान ने जिस तरह से हेटर्स और ट्रोल्स की क्लास लगाई, उसने इंटरनेट का सिस्टम हैंग कर दिया, लेकिन भाईजान के इस ‘सॉलिड रेंट’ पर कॉमेडियन सुनील पाल ने पलटवार करते हुए सीधा सलमान को ही रोस्ट कर दिया है और बिग बॉस को एक “गटर” शो करार दिया है. सुनील पाल ने सलमान-शाहरुख को किया ‘कॉल आउट’ सुनील पाल ने पैपराजी से बात करते हुए सलमानके गुस्से पर रिएक्ट किया और सुपरस्टार्स के ‘स्टारडम’ पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने एकदम सीधे शब्दों में कहा, “हमने सलमान खान को बनाया है. सलमान खान ने हमें नहीं बनाया. भाईजान आज स्टार हैं तो हम सब की वजह से, हिंदुस्तान की जनता की वजह से. ये इसलिए है क्योंकि हमने उनकी इतनी फिल्में देखी हैं.” ये भी पढ़ें: ‘सॉरी कैटरीना…’ बिग बॉस में सलमान खान की फटकार के बाद पाकिस्तानी RJ ने जोड़े हाथ, वीडियो जारी कर मांगी माफी सुनील यहीं नहीं रुके. उन्होंने बड़े बजट की फिल्मों के फ्लॉप होने और कम बजट की फिल्म ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) की सक्सेस का कंपैरिजन करते हुए बॉलीवुड के ए-लिस्टर्स को खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने कहा, “सलमान खान, शाहरुख खान, सब लोग सबक ले लीजिए, आप लोगों का टाइम पास बहुत ज्यादा चल रहा है. ‘हनुमान अंश’ जो 2 करोड़ रुपये में बनी है, उसने 500 करोड़ रुपये कमाए और 500 करोड़ रुपये की फिल्म 50 करोड़ भी नहीं कमा पा रही है. शर्म आनी चाहिए आपको.” सलमान खान, फोटो- इंस्टाग्राम इंडस्ट्री के नेपोटिज्म और मोनोपॉली पर क्या बोले सुनील पाल उन्होंने कहा, “आप लोग इतने बड़े स्टार्स हैं कि आपने कॉर्पोरेट लेबर और इंडस्ट्री को खरीद लिया है और छोटे लोग फिल्में नहीं बना पा रहे हैं. भगवान हनुमान और नीम करोली बाबा की कृपा से ‘हनुमान अंश’ इतना कमा पाई.” एक्टर ने सलमान से बिग बॉस को तुरंत बंद करने की डिमांड की और इसे एक “गटर शो” कहा. सुनील के मुताबिक, इस शो में ऐसे सेलेब्स आते हैं जो देश के लिए एक “बड़ा नुकसान” हैं, लेकिन शो उन्हें बेवजह स्टार बना देता है. ये भी पढ़ें: Vivek Oberoi ने भुलाई Salman Khan से पुरानी दुश्मनी? सपोर्ट में कही ऐसी बात, ट्रोल्स भी रह गए हैरान The post Salman Khan को शर्म आनी चाहिए… सुनील पाल ने सरेआम कर दी भाईजान की बेइज्जती, बोले- तुरंत बंद करो अपना गटर शो बिग बॉस appeared first on Naya Vichar.

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कर्मचारियों-पेंशनर्स को इस बार जल्दी मिलेगी सैलरी, 25 सितंबर को ही खाते में ट्रांसफर होंगे पैसे

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सितंबर महीने की सैलरी और पेंशन को लेकर बड़ी समाचार है. 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल को देखते हुए केंद्र प्रशासन ने सितंबर की सैलरी और पेंशन का भुगतान तय समय से पहले करने का फैसला लिया है. इसके तहत भुगतान 25 सितंबर 2026 को किया जा सकता है. 25 सितंबर को जारी होगी सितंबर की सैलरी-पेंशन वित्त मंत्रालय ने सितंबर 2026 की सैलरी और पेंशन का भुगतान 25 सितंबर, शुक्रवार को करने की अनुमति दी है. सामान्य तौर पर महीने के अंत में होने वाला यह भुगतान इस बार पहले किया जाएगा. प्रशासन ने यह फैसला बैंक हड़ताल के दौरान संभावित बैंकिंग व्यवधान को देखते हुए लिया है. किन कर्मचारियों को मिलेगा इसका फायदा? कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) की ओर से 23 सितंबर को जारी ऑफिस मेमोरेंडम के मुताबिक, सभी केंद्रीय प्रशासनी कर्मचारियों की सितंबर महीने की सैलरी 25 सितंबर को जारी की जा सकती है. इसमें डिफेंस, पोस्ट और टेलीकम्युनिकेशन विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं. औद्योगिक कर्मचारियों के सितंबर के वेतन का भुगतान भी इसी तारीख को पहले किया जा सकता है. केंद्रीय पेंशनर्स को भी पहले मिलेगी पेंशन केंद्र प्रशासन के पेंशनर्स की सितंबर 2026 की पेंशन भी 25 सितंबर को जारी की जा सकती है. यह भुगतान संबंधित बैंक और पे एंड अकाउंट्स ऑफिस (PAO) के जरिए किया जाएगा. इसका मकसद बैंक हड़ताल के दौरान पेंशन भुगतान में संभावित देरी को रोकना है. बैंक हड़ताल की वजह से लिया गया फैसला 28 से 30 सितंबर के बीच प्रस्तावित बैंक हड़ताल सितंबर महीने के अंत और चालू तिमाही के अंतिम दिनों में पड़ रही है. ऐसे में बैंकिंग सेवाओं में व्यवधान की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सैलरी, पेंशन और अन्य जरूरी भुगतानों को पहले करने का निर्णय लिया है. अन्य भुगतानों को भी पहले करने की सलाह वित्त मंत्रालय की ओर से मंत्रालयों और विभागों को सितंबर के आखिरी दिनों में होने वाले अन्य जरूरी भुगतान और बैंकिंग लेनदेन भी संभव होने पर पहले करने की सलाह दी गई है. प्रशासन का उद्देश्य हड़ताल के दौरान वित्तीय लेनदेन प्रभावित होने की स्थिति में लोगों को परेशानी से बचाना है. अक्टूबर की सैलरी में होगा एडजस्टमेंट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 25 सितंबर को किया जाने वाला भुगतान एडवांस पेमेंट माना जाएगा. सितंबर की वास्तविक देय राशि तय होने के बाद अगर भुगतान में कोई अंतर सामने आता है, तो उसका समायोजन अक्टूबर 2026 की सैलरी या वेतन में किया जाएगा. RBI को भी भेजी गई सूचना CGA ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से संबंधित बैंकों की भुगतान शाखाओं तक इन निर्देशों को पहुंचाने का अनुरोध किया है. इस कदम का उद्देश्य प्रस्तावित बैंक हड़ताल के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के नियमित भुगतान में किसी तरह की देरी या परेशानी को रोकना है. ये भी पढ़ें: ग्लोबल मार्केट में हड़कंप: कच्चे तेल में उबाल और अमेरिका में 2007 के बाद वॉल स्ट्रीट धड़ाम The post कर्मचारियों-पेंशनर्स को इस बार जल्दी मिलेगी सैलरी, 25 सितंबर को ही खाते में ट्रांसफर होंगे पैसे appeared first on Naya Vichar.

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राहुल गांधी शाम 4 बजे करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस : कहा- ‘संविधान के दुश्मन होंगे बेनकाब’

Voter List Controversy : चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोटर लिस्ट से जुड़े कामकाज को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोर्चा खोल दिया है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का एलान किया. अपनी पोस्ट में राहुल ने तीखा हमला बोलते हुए लिखा, “संविधान के दुश्मन बेनकाब हो चुके हैं. न्याय होकर रहेगा. मैं आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करूंगा. #VoteChori.” चुनाव आयुक्तों के 14 बार ऐतराज जताने की रिपोर्ट पर बवाल राहुल गांधी का यह तीखा रुख एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद देखने को मिला है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं. यह असहमति फॉर्म 6, वोटरों के नाम काटने (डिलीशन) और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर जताई गई थी. चुनाव आयोग की सफाई: ‘सभी की सहमति से हुए फैसले, यह सामान्य प्रक्रिया’ मामले के तूल पकड़ने पर चुनाव आयोग (ECI) ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उठाए गए सवालों को संस्थागत असहमति या मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट तैयार करते समय अंदरूनी सवाल, सुझाव और टिप्पणियां आना उसकी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है. आयोग ने जोर देकर कहा कि SIR समेत सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और मंजूरी से ही लिए गए हैं. 29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग से जुड़े इस ताजा विवाद और मौजूदा नेतृत्वक हालात पर रणनीति तय करने के लिए 29 सितंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक बुलाई गई है. जहां बीजेपी और चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपने हमले और तेज कर दिए हैं. ये भी पढ़ें: VIDEO : ‘सेवा भाव’ से योजनाएं, योजनाओं से विकास… PM Modi ने बताया देश की तरक्की का मंत्र ये भी पढ़ें: Cyclone Arnab : आधा हिंदुस्तान नहीं जानता कैसे रखे जाते हैं चक्रवाती तूफानों के नाम? ऐसे हुई थी इस सिलसिले की शुरुआत The post राहुल गांधी शाम 4 बजे करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस : कहा- ‘संविधान के दुश्मन होंगे बेनकाब’ appeared first on Naya Vichar.

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कौन सा स्कूटर ज्यादा पैसा वसूल… Honda QC3 या TVS iQube? अंतर देख के आप खुद तय कीजिए

Honda QC3 vs TVS iQube: होंडा ने हिंदुस्तानीय बाजार में अपना नया इलेक्ट्रिक स्कूटर Honda QC3 लॉन्च कर दिया है. यह कंपनी का तीसरा इलेक्ट्रिक स्कूटर है. इससे पहले होंडा QC1 और Activa e को बाजार में उतार चुकी है. QC3 को कंपनी ने बड़े मास मार्केट को ध्यान में रखकर तैयार किया है. इसमें 3.0kWh की बैटरी दी गई है. कंपनी का दावा है कि यह स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर 145 किलोमीटर तक चल सकता है. हिंदुस्तानीय बाजार में होंडा QC3 का मुकाबला TVS iQube और Bajaj Chetak जैसे इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से होगा. ऐसे में सवाल है कि TVS iQube के मुकाबले नया Honda QC3 कितना बेहतर है? आइए कीमत, रेंज और चार्जिंग के आधार पर दोनों की तुलना करते हैं. Honda QC3 vs TVS iQube: कीमत में कितना अंतर? सबसे पहले कीमत की बात करें तो Honda QC3 की एक्स-शोरूम कीमत 1.35 लाख रुपये रखी गई है. हालांकि, अभी इसकी उपलब्धता सीमित है. Honda QC3 को फिलहाल दिल्ली, आगरा, कटक, सूरत और कोल्लम जैसे 5 शहरों में उपलब्ध कराया गया है. वहीं, TVS iQube 3.1kWh की कीमत करीब 1.30 लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होती है. TVS का इलेक्ट्रिक स्कूटर देश के कई शहरों में उपलब्ध है. यानी कीमत के मामले में दोनों के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है. लेकिन उपलब्धता के मामले में TVS iQube को बढ़त मिलती है. ये भी पढ़ें: नंबर-1 की कुर्सी पर अब भी कायम है यह स्कूटर, अगस्त में सबसे ज्यादा खरीदे गए ये 10 स्कूटर्स, देखें लिस्ट Honda QC3 vs TVS iQube: बैटरी और रेंज Honda QC3 में 3.0kWh बैटरी पैक दिया गया है. कंपनी के मुताबिक, यह स्कूटर 145 किलोमीटर की क्लेम्ड रेंज देता है. दूसरी ओर, TVS iQube कई बैटरी पैक विकल्पों के साथ आता है. इसके 3.1kWh बैटरी वेरिएंट की क्लेम्ड रेंज 123 किलोमीटर है. रेंज के आंकड़ों पर नजर डालें Honda QC3: 3.0kWh बैटरी, 145km क्लेम्ड रेंज TVS iQube 3.1: 3.1kWh बैटरी, 123km क्लेम्ड रेंज इस तरह सिर्फ कंपनी के दावों की तुलना करें तो Honda QC3 की रेंज ज्यादा है. हालांकि, वास्तविक रेंज सड़क, ट्रैफिक, राइडिंग स्टाइल और मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. चार्जिंग में Honda QC3 आगे इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय चार्जिंग टाइम भी काफी महत्वपूर्ण होता है. Honda का दावा है कि QC3 की बैटरी 0 से 80% तक सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट में चार्ज हो जाती है. वहीं, TVS iQube के 3.1kWh बैटरी वेरिएंट को चार्ज होने में 4 घंटे से ज्यादा समय लगता है. यानी चार्जिंग टाइम के मामले में भी Honda QC3 के आंकड़े बेहतर नजर आते हैं. दोनों इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में 32 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है. ऐसे में रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए दोनों में सामान रखने की पर्याप्त जगह मिल जाती है. फिर कौन-सा इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदें? कागज पर देखें तो Honda QC3 के स्पेसिफिकेशन काफी मजबूत नजर आते हैं. इसकी क्लेम्ड रेंज TVS iQube से ज्यादा है और चार्जिंग टाइम भी कम है. लेकिन यहां एक बड़ा फैक्टर उपलब्धता का है. Honda QC3 फिलहाल सिर्फ 5 शहरों में उपलब्ध है. कंपनी ने अभी इसकी उपलब्धता को दूसरे शहरों तक बढ़ाने और डिलीवरी को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी है. इसके मुकाबले TVS iQube की बिक्री कई शहरों में हो रही है. यह बाजार में पहले से मौजूद और स्थापित इलेक्ट्रिक स्कूटर है. दोनों में से किसका चुनाव करना सही? अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा क्लेम्ड रेंज और कम चार्जिंग टाइम है, तो Honda QC3 के आंकड़े आकर्षक हैं. वहीं, अगर आप ऐसा इलेक्ट्रिक स्कूटर चाहते हैं जो कई शहरों में आसानी से उपलब्ध हो और पहले से बाजार में स्थापित हो, तो TVS iQube पर विचार किया जा सकता है. ध्यान रखें: सिर्फ रेंज और चार्जिंग टाइम के आधार पर किसी स्कूटर को चुनना सही नहीं होगा. खरीदने से पहले कीमत, वास्तविक रेंज, सर्विस नेटवर्क, चार्जिंग सुविधा और आपके शहर में उपलब्धता भी जरूर देखनी चाहिए. ये भी पढ़ें: BMW 1 अक्टूबर को लॉन्च करेगी नई Naked Street Fighter बाइक, F 450 GS वाला इंजन मिलने की उम्मीद The post कौन सा स्कूटर ज्यादा पैसा वसूल… Honda QC3 या TVS iQube? अंतर देख के आप खुद तय कीजिए appeared first on Naya Vichar.

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NEET PG का रिजल्ट जारी, देखें कटऑफ लिस्ट

NEET PG Result 2026 Out: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने NEET-PG 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया है. यह परीक्षा 30 अगस्त 2026 को पूरे देश में आयोजित हुई थी, जिसमें MD, MS, DNB और DrNB कोर्सेज में एडमिशन के लिए 2,63,544 कैंडिडेट्स शामिल हुए थे. जयपुर के दो सेंटर्स पर बिजली गुल होने की वजह से कुछ स्टूडेंट्स परीक्षा पूरी नहीं कर पाए थे, इसलिए उनके लिए 5 सितंबर को दोबारा एग्जाम कराया गया, जिसमें 2,416 कैंडिडेट्स बैठे. NEET PG Result 2026 ऐसे करें चेक सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर NBEMS की ऑफिशियल वेबसाइट natboard.edu.in खोलें. होमपेज पर ‘Click here to view the result of NEET-PG 2026’ नाम का लिंक दिखेगा, उस पर क्लिक करें. अपना एप्लिकेशन नंबर, रोल नंबर और जन्मतिथि जैसी मांगी गई जानकारी भरें और सबमिट करें. सबमिट करते ही स्क्रीन पर आपका रॉ स्कोर और NEET-PG 2026 रैंक दिख जाएगा. NEET PG Result 2026 Check Here NEET PG Cut Off List कैटेगरी न्यूनतम पात्रता प्रतिशत कटऑफ स्कोर (720 में से) जनरल/EWS 50वां पर्सेंटाइल 262 जनरल PwBD 45वां पर्सेंटाइल 244 SC/ST/OBC (PwBD सहित) 40वां पर्सेंटाइल 226 NEET-PG 2026 में क्वालिफाइंग कटऑफ स्कोर कैटेगरी के हिसाब से तय किए गए हैं. जनरल और EWS कैटेगरी के स्टूडेंट्स के लिए 50वां पर्सेंटाइल यानी 720 में से 262 अंक जरूरी हैं. जनरल PwBD कैटेगरी के लिए 45वां पर्सेंटाइल यानी 244 अंक न्यूनतम रखे गए हैं. वहीं SC, ST और OBC कैटेगरी, जिसमें PwBD कैंडिडेट्स भी शामिल हैं, उनके लिए 40वां पर्सेंटाइल यानी 226 अंक क्वालिफाइंग कटऑफ के तौर पर तय किए गए हैं. ये भी पढ़ें: PMCH Patna Admission: बिहार के सबसे फेमस मेडिकल कॉलेज में कैसे मिलेगा एडमिशन? NEET-PG 2026 परीक्षा 30 अगस्त 2026 को पूरे देश में आयोजित हुई थी, जिसमें MD, MS, DNB और DrNB जैसे डायरेक्ट छह साल के कोर्सेज तथा पीजी मेडिकल डिप्लोमा कोर्सेज में एडमिशन के लिए कुल 2,63,544 कैंडिडेट्स शामिल हुए थे. ये भी पढ़ें: 2.65 लाख स्टूडेंट्स ने दी NEET PG परीक्षा, 2445 कैंडिडेट्स के लिए एग्जाम 5 सितंबर को The post NEET PG का रिजल्ट जारी, देखें कटऑफ लिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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Photos: जापान में भारतीय क्रिकेटरों की मस्ती, कोई बारिश के बीच घूमते तो कोई शॉपिंग करते आए नजर

Cricketers in Japan Photos: एशियन गेम्स 2026 के लिए जापान पहुंची टीम इंडिया के खिलाड़ी टोक्यो की सड़कों पर बारिश का लुत्फ उठाते दिखे. खिलाड़ियों के खास अंदाज ने फैंस का ध्यान खींचा. The post Photos: जापान में हिंदुस्तानीय क्रिकेटरों की मस्ती, कोई बारिश के बीच घूमते तो कोई शॉपिंग करते आए नजर appeared first on Naya Vichar.

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राजस्थान का फिटनेस, हरियाणा का PUC और नंबर बिहार का… नोएडा में 9 मौतों वाली बस का पूरा काला चिट्ठा

Noida Bus Accident: यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात चलती स्लीपर बस में लगी आग ने 9 यात्रियों की जान ले ली. दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही राज कल्पना ट्रैवल्स की बस BR32PA8647 में करीब 30-35 यात्री सवार थे. शुरुआती जांच में AC में स्पार्क या ब्लास्ट के बाद इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगने की आशंका जताई गई है. हादसे के बाद अब सिर्फ यह सवाल नहीं है कि बस में आग कैसे लगी. बस सड़क पर किस तरह दौड़ रही थी, उसके दस्तावेज कितने राज्यों से जुड़े थे और पुराने नियम उल्लंघनों के बावजूद उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का बड़ा हिस्सा बन गया है. बिहार में रजिस्ट्रेशन, हादसा यूपी में और रिकॉर्ड कई राज्यों से जुड़े वाहन रिकॉर्ड के मुताबिक BR32PA8647 का रजिस्ट्रेशन 5 अप्रैल 2023 को बिहार के मधुबनी RTO में हुआ था. यह नवंबर 2022 में निर्मित Eicher Pro 6019 S CWC BS-VI मॉडल की बस बताई गई है. रिकॉर्ड में बस का रंग काला दर्ज है. हादसे के बाद सामने आए परिवहन रिकॉर्ड में परमिट की शर्तों के उल्लंघन, वाहन में नियमों के विपरीत मॉडिफिकेशन और अन्य यातायात नियमों से जुड़े मामले भी दर्ज बताए गए हैं. राजस्थान का फिटनेस, हरियाणा का PUC हादसे के बाद बस के दस्तावेजों को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, बस का मूल रजिस्ट्रेशन बिहार का है, जबकि उसके फिटनेस प्रमाणपत्र का रिकॉर्ड राजस्थान और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल यानी PUC का रिकॉर्ड हरियाणा से जुड़ा बताया जा रहा है. अगर ये रिकॉर्ड परिवहन विभाग की जांच में भी सही पाए जाते हैं तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि बस की फिटनेस जांच राजस्थान में कब, किस प्राधिकरण या अधिकृत केंद्र पर हुई और हरियाणा में PUC किस तारीख को किस सेंटर से जारी हुआ था. सवाल सिर्फ यह नहीं कि फिटनेस कहां का था, जांच कैसी हुई? जानकारों के अनुसार, किसी व्यावसायिक वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र सड़क पर उसके संचालन की तकनीकी योग्यता से जुड़ा होता है. ऐसे में हादसे के बाद जांच का अहम बिंदु यह होगा कि जिस तारीख को बस का फिटनेस किया गया, उस समय AC सिस्टम, इंजन, वायरिंग, फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और वाहन की बॉडी की स्थिति कैसी थी. अगर फिटनेस के दौरान कोई तकनीकी खामी नहीं मिली थी तो हादसे से पहले बस की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसका जवाब मेंटेनेंस और फिटनेस रिकॉर्ड से मिलेगा. PUC हरियाणा का था तो जांच का रिकॉर्ड भी अहम मीडिया रिपोर्टों में हरियाणा से जुड़े PUC रिकॉर्ड का उल्लेख सामने आया है. ऐसे में जांच का अगला सवाल यह होगा कि PUC कब हुआ, किस सेंटर पर हुआ और परीक्षण के दौरान वाहन से जुड़े कौन-कौन से मानक दर्ज किए गए. PUC मुख्य रूप से वाहन के प्रदूषण उत्सर्जन से संबंधित प्रमाणपत्र है, इसलिए इसे बस की यांत्रिक सुरक्षा या फिटनेस का विकल्प नहीं माना जा सकता है. 19 चालान का रिकॉर्ड भी सामने आया हादसे के बाद बस के पुराने ट्रैफिक रिकॉर्ड ने भी सवाल खड़े किए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक बस पर कुल 19 लंबित चालान और करीब 1.75 लाख रुपये की देनदारी बताई गई है, इनमें परमिट संबंधी उल्लंघन, रेट्रोफिटिंग और फ्यूल से जुड़े नियमों के उल्लंघन समेत कई मामले शामिल बताए गए हैं. दूसरी रिपोर्ट में बिना परमिट, ओवरस्पीडिंग और बिना ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े चालानों का भी उल्लेख है. अलग-अलग रिपोर्टों में लंबित चालानों की रकम में अंतर है, इसलिए अंतिम आंकड़ा परिवहन विभाग के प्रमाणित वाहन रिकॉर्ड से मिलान के बाद ही तय किया जाना चाहिए. कम उम्र के चालक से बस चलाने का भी चालान परिवहन रिकॉर्ड पर आधारित रिपोर्ट में जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलवाने से जुड़ा चालान होने की बात सामने आई है. जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी चालान बताया गया है. इसके अलावा परमिट संबंधी उल्लंघनों का रिकॉर्ड भी सामने आया है. यह पूरा रिकॉर्ड अब जांच एजेंसियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हादसे के बाद यह पता लगाना जरूरी है कि बस के खिलाफ पहले दर्ज कार्रवाई केवल चालान तक सीमित रही या वाहन की तकनीकी और संचालन संबंधी स्थिति की भी जांच की गई थी. हादसे से पहले यात्रियों ने दी थी खतरे की चेतावनी हादसे की FIR में इससे भी गंभीर बात सामने आई है. शिकायत के अनुसार, बस में बैठे यात्रियों को ड्राइवर केबिन की तरफ से जलने की बदबू महसूस हुई. यात्रियों ने चालक और परिचालक को बस रोककर जांच करने के लिए कहा था. FIR में आरोप है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और कुछ देर बाद चालक की सीट के पास से आग की लपटें निकलने लगीं. FIR में चालक और परिचालक के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. AC से शुरू हुई आग ने कुछ ही देर में लिया विकराल रूप मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार के अनुसार प्रारंभिक जांच में बस के AC में स्पार्क, शॉर्ट सर्किट या ब्लास्ट की आशंका सामने आई है, इसके बाद इंजन में मौजूद लुब्रिकेंट ऑयल ने आग पकड़ ली और आग तेजी से पूरी बस में फैल गई. यह अभी प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष है. अंतिम कारण फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के बाद स्पष्ट होगा. आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बस से निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिला. कुछ यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई. दमकल और पुलिस टीमों ने मौके पर पहुंचकर 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला. अब जांच के घेरे में सिर्फ ड्राइवर नहीं, पूरा रिकॉर्ड हादसे के बाद चालक और परिचालक को हिरासत में लिया गया है तथा मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. FIR में बस के चालक और परिचालक के खिलाफ हिंदुस्तानीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. लेकिन हादसे की पूरी तस्वीर समझने के लिए जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाना होगा. बस का फिटनेस प्रमाणपत्र, PUC, परमिट, पुराने चालान, रेट्रोफिटिंग का रिकॉर्ड, AC और इंजन की तकनीकी स्थिति तथा हादसे से ठीक पहले चालक को यात्रियों की

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